Aug 23, 2008

आपकी वंशावली आस्ट्रेलियन वेबसाइट पर

जी हां आस्ट्रेलिया की एक वेबसाइट पर आप राजपूत बंधु अपने परिवार की वंशावली देख सकते है जो अभी तक रावों , बङवो, बहिभाटों व हरिद्वार के पंडितों के पास ही उपलब्ध होती थी , लेकिन अब यह आपको इंटरनेट पर आस्ट्रेलिया की वेबसाइट इंडियन प्रिंसली स्टेटस पर उपलब्ध हे जहाँ आप देख सकते है  व अपने परिवार की वंशावली अपडेट करा  सकते है |
 
वेबसाइट खुलते ही a to z तक लिखा है , अपने ठिकाने , गाँव आदि का पहले अक्षर के हिसाब से जैसे khandela के लिए आप k पर क्लिक करें | k से शुरू होने वाले ठिकानो की सूचि खुलेगी अब आप वहाँ अपने ठिकाने का नाम ढूंढ़ कर उस पर क्लिक करे आप के सामने होगी  पुरी जानकारी |
यदि जानकारी नही है  तो पेज के नीचे corrections, additions, suggestions पर क्लिक करे व अपनी जानकारी अपडेट करें |

उदाहरण के लिए मेरी वंशावली देखने के लिए इस पर क्लिक करें
   

Aug 8, 2008

राजपूत कौन

विविधायुध वान रखे नितही , रण से खुश राजपूत वही |
सब लोगन के भय टारन को ,अरी तस्कर दुष्टन मारन को |
रहना न चहे पर के वश में ,न गिरे त्रिय जीवन के रस में |
जिसके उर में शान्ति रही ,नय निति रखे राजपूत वही |
जननी भगनी सम अन्य त्रिया, गिन के न कभी व्यभिचार किया |
यदि आवत काल क्रपान गहि ,भयभीत न हो राजपूत वही |
धर्तिवान से धीर समीप रखे , निज चाकर खवासन को निरखे |
जिसने न रिपु ललकार सही , राजपूत रखे राजपूत वही |
पर कष्टं में पड़ के हरता ,निज देश सुरक्षण जो करता |
जिसने मुख से कही न नहीं ,प्रण पालत सो राजपूत वही |
अज्ञात कवि
(श्री सोभाग्य सिंह शेखावत के संकलन से )
Rajul Shekhawat

मेवाड के आराध्‍य सगसजी बावजी

Bhupendra Singh Chundawat
बलिदानों की धरती मेवाड में वीरों के पूजन की परंपरा रही है। उदयपुर में सगसजी सुल्तानसिंहजी से लेकर अन्य कई क्षत्रिय वीरों को सगसजी के रूप में पूजा जाता है। ये लोक देवता के रूप में मान्य हैं। श्रावण के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार को एक साथ सगसजी के जन्मोत्सव मनाया जाता है। सगसजी के स्थान आस्था के केंद्र तो हैं ही, मानवीय स्वार्र्थों, धोखाधडी, षडयंत्रों बिना सोचे-समझे किए गए जानलेवा फैसलों के घातक परिणामों से नसीहत लेने की बात भी कहते हैं। उदयपुर में सगसजी का सबसे प्राचीन व बड़ा स्थान सर्वऋतु विलास है। यहां सगसजी सुल्तानसिंह हैं। वे महाराणा राजसिंह (1652-1682) के ज्येष्ठ पुत्र थे जिनकी झूठी शिकायत, एक षडयंत्र के कारण खुद राजसिंह ने ही उनकी हत्या कर दी। सर्वऋतुविलास में प्रत्यक्ष में तो सुल्तानसिंह ही सगसजी के रूप में पूजे जाते हैं, किन्त अप्रत्यक्ष रूप में तीन भाई बिराजित है। इन तीनों के चबूतरे महासतिया में पास-पास बने हैं। सगसजी सरदारसिंह की स्थापना मंडी स्थित जोगपोल के दाताभवन में है। गुलाबबाग स्थित बावड़ी के समीप विराजित अर्जुनसिंह महाराणा जयसिंह के साले थे जिन्हें उदयपुर की एक गणगौर सवारी के दौरान नाव में शराब के साथ जहर देकर षडयंत्रपूर्वक मारा गया। करजाली हाउस स्थित स्थानक के सगसजी भैरूसिंह
की गोखड़े से गिराकर हत्या की गई। कंवरपदा स्कूल स्थित स्थानक के सगसजी कारोई ठिकाने से संबध्द हैं, जिनकी कवंरपदा की हवेली में धोखे से हत्या की गई। वारियों की घाटी स्थित रणसिंह, अस्थल मंदिर के पीछे वाले सगसजी, आयड़ तथा रामदास कॉलोनी वाले सगसजी भी मेवाड़ के मान्य ठिकानों से जुड़े हुए हैं। पीछोली स्थित सगसजी सर्वऋतुविलास वाले सगसजी है। सगसजी शब्द सगत या शख्स का तद्भव रूप है। शौर्य एवं शक्ति से जीवंत प्रतीक होने के कारण ही नाम सगत हुआ। सगत का अर्थ शक्ति से है। आदरसूचक 'जी' लगाने के कारण ही इन्हें सगसजी कहा जाने लगा। वे लोकदेव के रूप में लोक जीवन के दु:ख-दर्दों का निवारण करते हुए कल्याण कार्यों में लगे हुए हैं।