भाजपा से नाराज राजपूतों का फैसला 12 को
भूपेंद्र सिंह चुण्डावत,उदयपुर
भारतीय जनता पार्टी का परंपरागत वोट समझा जाने वाला राजपूत समाज विधानसभा चुनावों में इस बार साथ छोड़ सकता है। भाजपा से टिकटों में उपेक्षा के अंदेशे को भांपकर राजपूतों के सबसे बड़े संगठन श्री प्रताप फाउंडेशन ने 12 नवंबर को नई रणनीति के लिए प्रबुद्ध नेताओं की जयपुर बैठक बुलाई है। पता चला है कि फाउंडेशन के संयोजक भगवान सिंह रोलसाहबसर ने हाल ही कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह व पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की है। इसे सियासी हलके में नए संकेत माना जा रहा है। बदली परिस्थितियों में प्रदेश में नए सियासी समीकरणों की संभावना प्रबल हो गई है। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से जाति विशेष को ही महत्व दिए जाने से राजपूत समाज में नाराजगी है। समाज के प्रबुद्ध नेताओं के भारी दबाव के चलते भगवान सिंह रोलसाहबसर ने यह बैठक बुलाई है। संभावना जताई जा रही है कि फाउंडेशन विधानसभा चुनावों को लेकर कोई बड़ा निर्णय ले सकता है। श्री प्रताप फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे एंव भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर को प्रदेश में 42 सीटों पर राजपूत प्रत्याशियों की सूची सौंपकर टिकट देने की मांग रखी। भाजपा की ओर से उत्साहजनक आसार नहीं मिलने एवं उपेक्षापूर्ण रवैये को देखकर फाउंडेशन से जुड़े पदाधिकारी नाराज हो गए है। टिकट नहीं मिलने पर राजपूत प्रभाव वाली सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी उतारकर चुनाव लड़ने पर भी विचार किया जा सकता है।
4 comments:
वाह अच्छी जानकारी दी आपने राजस्थान के चुनावों के मद्देनजर ! राजनैतिक पार्टिया अभी जहाँ भी चुनाव होने हैं वहा पर कमोबेश ऐसे ही हालत में चल रही हैं ! धन्यवाद !
यहां भी जाति वाद
भाटिया जी ये तो अख़बार की तरह का एक समाचार मात्र है मेरे विचार नही | हालाँकि मुझे राजपूत होने का गर्व तो है लेकिन जातिवाद में कोई भरोसा नही है मेरे लिए सभी जातिया उतनी ही आदरणीय है जितनी मेरी अपनी जाति| हाँ जाति व्यवस्था में विश्वास जरुर रखता हूँ |
जातिगत आधार पर, जातिगत कारणों से किसी पार्टी को समर्थन देना या किसी पार्टी से समर्थन लेना, अन्तत: उस जाति का, पार्टी विशेष के वोट बैंक में बदल जाना होता है । ऐसे निर्णयों पर आज भले ही खुश्ा हो लें लेकिन यह दुधारी तलवार है । राजनीतिक समर्थन, राजिनतिक विचारधारा के आधार पर होना चाहिए, जातिगत आधार पर नहीं । मुसलमानों की दुर्दशा सारा देश देख रहा है । यह किसी भी स्वस्थ लोकतन्त्र के लिए अत्यधिक घातक है । यह ऐसा इलाज है जो बीमारी से अधिक खतरनाक है ।
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