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हम भूल चुके है हाँ

Posted by Ratan Singh Shekhawat Nov 5, 2008

हम भूल चुके है हाँ
हम भूल चुके है जिस पीड़ा को उसको फ़िर उकसानी है |
केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||
ऋषि मुनियों की जन्म भूमि यह भारत इसका नाम
देवों की अवतार भूमि यह सतियों का प्रिय धाम
दूर देश से भिक्षुक आते थे विद्या के काम
इतिहास बताते हाँ ---
इतिहास बताते भारत के वेदों की अमर कहानी |
केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||
यवनों का अधिकार हुवा रिपुओं की सब कुछ बन आई
धर्म त्याग जो नही किया तो खाले उनकी खिचवाई
वेद जलाये देवालय तोडे मस्जिद वहां पे बनवाई
भारत का जर्रा हाँ ---
भारत का जर्रा -जर्रा कहता वीरों की नादानी |
केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||
नादिरशाही हुक्म चला था कट गए थे सिर लाखों
देश धर्म की बलिवेदी पर शीश चढ़े थे लाखों
दिल्ली के तख्त पलटते हमने देखे थे इन आंखों
नही सुनी तो हाँ --
नही सुनी तो फ़िर सुनले हम वीरों की कुर्बानी |
केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||
मुगलों ने जब किया धर्म के नाम अनर्थ अपार
चमक उठी लाखों बिजली सी राजपूती तलवार
और सुनो हल्दी घाटी में बही रक्त की धार
हर -हर की ध्वनी में हाँ--
हर-हर की ध्वनी में सुनते है वह हुँकार पुरानी |
केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||

काबुल को फतह किया पर नही मस्जिद तुडवाई
अत्याचारी गौरी की भी गर्दन कहाँ कटाई
अरे विदेशी शत्रु को भी हमने माना भाई
बुझते दीप शिखा की हाँ---
बुझते दीप शिखा की हमको फ़िर से ज्योति जगानी
केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||
याद हमें है दुर्गादास और वह सांगा रणधीर
याद हमें है सोमनाथ भी और बुंदेले वीर
याद हमें है हल्दी घाटी और हठी हमीर
याद हमें है हाँ--
याद हमें है रण में जूझी वह हाड़ी महारानी |
केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी ||
पु.स्व.श्री तन सिंह जी,बाड़मेर
मार्च 1946 पिलानी

6 comments

  1. बहुत वीर रस से ओतप्रोत कविता ! आपके ब्लॉग पर आकर लगता है की उसी काल खंड में पहुँच गए हैं जब राजपूती आन बान और शान अपने चर्म पर थी ! बहुत अच्छा लगता है हमारे पूर्वजो की यशोगाथा सुनकर ! बहुत शुभकामनाएं !

     
  2. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!! आभार!!

     
  3. यही धरोहर को याद कर जी रहे है हम राजपूत

     
  4. veer-ras se bhari aaap ki kavita achchee lagi...
    sach bhuul hi gaye hain..
    sab kuchh peechhey rah gaya sa lagta hai..
    aap ke blog par aana achcha laga.

     
  5. सुंदर रचना! (एक सती उल्लेख के अतिरिक्त)

     
  6. बहुत ही जिन्दा दिल है यह आप की कविता, पढ कर रंगो मै जोश भर आता है,
    धन्यवाद इस सुंदर रचना के लिये

     

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