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धरती माता किसने रखी लाज तेरे सम्मान की

धरती माता किसने रखी लाज तेरे सम्मान की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||
हाँ ! गाथाएँ बलिदान की ||

काबुल के तुफानो से जब जन मानस था थर्राया |
गजनी की आंधी से जाकर भीमदेव था टकराया ||
देख खानवा यहाँ चढी थी राजपूतों की त्योंरियां |
मतवालों की शमसिरों से निकली थी चिंगारियां ||
यहाँ कहानी गूंज रही सांगा के समर प्रयाण की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||

देखो इस चितौड़ दुर्ग का हर पत्थर गौरव वाला |
यहाँ चढाई कुल देवी पर शत-शत मुंडो की माला ||
महलों में जौहर धधका हर राजपूत परवाना था |
हर-हर महादेव के नारों से अवनी अम्बर गूंजा था ||
यहाँ गाथाएँ गूंज रही कण-कण में गौरव गान की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||

यही सीकरी यह पानीपत यही वही हल्दीघाटी |
वीर बांकुरों के शोणित से तृप्त हुई जिसकी माटी ||
हाल बता बुन्देल धरा तेरे उन वीर सपूतों का |
केशारियां कर निकल पड़े थे मान बचने माता का ||
भूल गए तो याद करो उस पृथ्वीराज महान की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||

आन बान हित कई बाँकुरे आजीवन थे यहाँ लड़े |
यवन सैन्य के झंझावत से पर्वत बनकर यहीं अडे ||
क्षिप्रा झेलम बोल जरा क्यों लाल हुआ तेरा पानी |
महाकाल से यहाँ जूझने दुर्गा की थी भृकुटी तनी ||
तेरी ही बेदी पर माता चिता जली अरमानों की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||

महाराणा सा सपूत पाकर धन्य हुई यह वसुंधरा |
जयमल पत्ता जैता कुम्पा झाला की यह परम्परा ||
जिन्दा है तो देख जरा जालौर और गढ़ उंटाला |
तारागढ़ और रणतभंवर में लगा शहीदों का मेला ||
आओ फिर से करें प्रतिष्ठा उस पावन प्रस्थान की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||

तडफ रहे है अब परवाने उसी शमां पर चढ़ने को |
आग उठी है रग-रग में फिर से बदला लेने को ||
भभक रहे है अब अंगारे प्रतिहिंसा के झोंको से |
भीख मांगता महाकाल निर्वासित राजकुमारों से ||
जगो यहाँ जगदेवों की लगी है बाजी जान की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||
श्री शिवबख्श सिंह जी ,चुई : ३० दिसम्बर १९५८
क्षत्रिय युवक संघ आई.टी.सी केम्प : त्रिलोकपुरा |

Comments :

15 comments to “धरती माता किसने रखी लाज तेरे सम्मान की”
वाणी गीत said... Hindi Blog
on 

क्या खूब लिखी खडग से गाथाएं अलबेलों ने...
बहुत बढ़िया ..!!

AlbelaKhatri.com said... Hindi Blog
on 

जय हो आपकी !
आपके तेवर और आपके लेखन की !
वाह !
आपका गीत...........
अद्भुत और अनूठा गीत बाँच कर यों लगा॥
जैसे नस नस में बारूद भर गया हो...
वाह !
ये है राजस्थान का वीररस ...........
हिन्दुस्तान का शौर्य !

बधाई !
_____________हार्दिक बधाई !

Nirmla Kapila said... Hindi Blog
on 

लाजवाब सुन्दर प्रस्तुति है बधाई

ताऊ रामपुरिया said... Hindi Blog
on 

बहुत बढिया प्रस्तुति !

रामराम.

ACHARYA RAMESH SACHDEVA said... Hindi Blog
on 

आओ फिर से करें प्रतिष्ठा उस पावन प्रस्थान की |

EXCELLENT.
GOOD FOR MOTIVATION.
REALLY.
I WILL TEACH IT TO MY STUDENTS.
RAMESH SACHDEVA
hpsdabwali07@gmail.com

जी.के. अवधिया said... Hindi Blog
on 

आओ फिर से करें प्रतिष्ठा उस पावन प्रस्थान की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||


बहुत ही सुन्दर!!!

Udan Tashtari said... Hindi Blog
on 

श्री शिवबख्श सिंह जी की जबरदस्त रचना पढ़वाने का आभार.

राज भाटिय़ा said... Hindi Blog
on 

वाह आप की रचना पढ कर बाहें फ़डफ़डाने लगी, ओर अपने पुर्वजो पर गर्व होने लगा. बहुत सुंदर.धन्यवाद

नरेश सिह राठौङ said... Hindi Blog
on 

बहुत सुन्दर रचना है

dhiru singh {धीरू सिंह} said... Hindi Blog
on 

अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की |
वीर रस की अनमोल कविता के लिए आपका धन्यबाद

प्रकाश पाखी said... Hindi Blog
on 

वीर नहीं डरते इन तलवारों से और बाणों से
माँ मिटटी का कर्ज चुकाते देखो अपने प्राणों से

ताऊ रामपुरिया said... Hindi Blog
on 

इष्टमित्रों और परिवार सहित आपको, दशहरे की घणी रामराम.

रामराम.

tagskie said... Hindi Blog
on 

hi.. just dropping by here... have a nice day! http://kantahanan.blogspot.com/

alka sarwat said... Hindi Blog
on 

क्षिप्रा झेलम बोल जरा क्यों लाल हुआ तेरा पानी |
तेरी ही बेदी पर माता चिता जली अरमानों की |
अलबेलों ने लिखी खड्ग से गाथाएँ बलिदान की ||
आओ फिर से करें प्रतिष्ठा उस पावन प्रस्थान की |
गौरवशाली अतीत याद दिला दिया कवि ने
आपने हमें उपलब्ध करायी ,इसके लिए शुक्रिया
जय हिंद

हैरान परेशान said... Hindi Blog
on 

रतन सिंह जी ,खून में उबाल ला देने वाली इस पोस्ट के लिए आभार

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