Aug 18, 2010

मैं और मेरा प्रण



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आशियाने
जन्म कुंडली देखे बिना पता करे , सरकारी नौकरी का योग

10 comments:

Surendra Singh Bhamboo said...

अति मार्मिक कविता है। इसके लिए आपको धन्यवाद

हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
मालीगांव
साया
आपकी पोस्ट यहा इस लिंक पर भी पर भी उपलब्ध है। देखने के लिए क्लिक करें
लक्ष्य

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही मार्मिक रचना, शुभकामनाएं.

रामराम.

P.N. Subramanian said...

पढ़कर दिल अशांत सा हो गया.

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही मार्मिक कविता जी.धन्यवाद

संजय भास्कर said...

अति मार्मिक कविता है। इसके लिए आपको धन्यवाद

हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
nai post pat..
.......... " मै तोड़ती पत्थर "

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुंदर ..मार्मिक

नरेश सिह राठौड़ said...

हमें तो अभी पता चला है की गिरासे साहब कवी है | बहुत बढ़िया प्रेरणा दायक कविता है |आभार

नरेश सिह राठौड़ said...

हमें तो अभी पता चला है की गिरासे साहब कवी है | बहुत बढ़िया प्रेरणा दायक कविता है |आभार

Anonymous said...

Khamma Hukum..........Thanks for your comments. I try to do little efforts with the help of your blessings.....!Thanks again.

abnish singh chauhan said...

Bahut sundar . Badhai sweekaren