Grab the widget  IWeb Gator

हठीलो राजस्थान-30

तोपां जाझां ताखड़ी,
सीस पडै कट कट्ट |
बण ठण बैठा किम सरै,
रण माची गहगट्ट ||१७८||

वीर पत्नी पति से कहती है - तोपें गरजती हुई गोले बरसा रही है,जिससे शत्रुओं के मुंड कट कट कर गिर रहे है | हे स्वामी ! बन ठन कर बैठने से कैसे काम चलेगा ? देखते नहीं, युद्ध की भयंकर मार काट मची हुई है |

मत इतरावो ठाकरां,
छैलां री लख छैल |
थोडा रहसी ठायणे,
रण माचंता रौल ||१७९||

हे ठाकुर ! अपने द्वारा पाले हुए छैलों की उपरी सजधज देखकर अभिमान मत करो | जब युद्ध छिड़ेगा उस समय तुम्हारे साथ थोड़े ही लोग रह जायेंगे | अर्थात ये बन ठन कर रहने छैले उस समय नजर भी नहीं आयेंगे |

सूरां खूब सतावियो ,
कूरा कीधो मोल |
ठीक पडैला ठाकरां,
रण माचंता रौल ||१८०||

हे ठाकुर ! तुमने वीरों को तो खूब सताया और कायरों का आदर किया | अब युद्ध छिड़ने पर तुम्हे पता चलेगा कि वीरों की अवमानना करने का परिणाम क्या होता है |

निरबल धरती आ नहीं,
रिपुवां रोको सोर |
की सीहां रो सोवणों,
की अगनी कमजोर ||१८१||

शत्रु पक्ष के बढ़ते प्रताप को देखते हुए भी जो लोग संघर्ष के लिए आतुर नहीं होते उनके लिए कहा गया है - तुम सिंह हो,सिंह को उठने के एक क्षण लगता है फिर तुम उठ क्यों नहीं रहे हो | तुम अग्नि हो ,जो राख हटाते ही प्रज्वलित होने की क्षमता रखती है व जिस धरती पर तुम पैदा हुए हो वह भी निर्बल नहीं है ,फिर तुम्हारे में यह निर्बलता कहाँ से व्याप्त हुई ? उठो व शत्रुओं की बकवास को बंद करो |

अरियां थे खप जाव सौ,
इण धरती रण धीर |
रण न्योतो पा आवसी ,
लड़वा पांचू पीर ||१८२||

हे शत्रुओ ! तुम नष्ट हो जावोगे | इस धरती पर रण बाँकुरे निवास करते है | रण निमंत्रण मिलते ही यहाँ के पांचो पीर युद्ध करने के लिए आ पहुंचेंगे |
(पाँचों पीरों में लोक देवता - हडबूजी,पाबूजी ,रामदेवजी,मांगलिया मेहाजी व गोगाजी शामिल है)

देख घोर घमसाण जुध,
तोपां टूटत कोट |
पांचू पीर पधारसी ,
डंके हन्दी चोट ||१८३||

टॉप के गोलों से दुर्ग भग्न होता तथा घमासान युद्ध छिड़ता देख कर पाँचों पीर अवश्य ही आ उपस्थित होंगे |

स्व.आयुवानसिंह शेखावत

देवालयों की रक्षार्थ शेखावत वीरों का आत्मोत्सर्ग |
मेरी शेखावाटी
ताऊ पत्रिका
वक्तव्यों के देवता

Comments :

5 comments to “हठीलो राजस्थान-30”
प्रवीण पाण्डेय said... Hindi Blog
on 

वीर नारियों को नमन। घर में रोकने के जगह तिलक लगा कर जो विदा करें स्वामी को।

नरेश सिह राठौड़ said... Hindi Blog
on 

देख घोर घमसाण जुध,
तोपां टूटत कोट |
पांचू पीर पधारसी ,
डंके हन्दी चोट ..... सुन्दर पक्तिया |

Udan Tashtari said... Hindi Blog
on 

अच्छा लगा पढ़कर.

Uncle said... Hindi Blog
on 

शानदार ओजस्विता से भरपूर दोहे

राज भाटिय़ा said... Hindi Blog
on 

बहुत अच्छी प्रस्तुति, धन्यवाद

समाचार

इतिहास

श्री तनसिंह जी की कलम से

राजपूत नारियां

 
hitcounter www.hamarivani.com
apna blog
 

Followers