Jan 26, 2011

मानवता के लिए सर्वस्व न्योछावर करें : स्व.तनसिंह जी जयंती समारोह

चन्दन सिंह भाटी
बाड़मेर 25 Dec.|आज राष्ट्र की विकट समस्याओं के समाधान के लिए क्षत्रिय चरित्र की महत्ती आवश्यकता है। अपने कर्तव्य के लिए मर मिटने का भाव, मानवता के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की चेतना और राष्ट्रीय चरित्र निर्माण यही स्व.तनसिंह के जीवन का मिशन था। आज इसी की भारत को आवश्यकता है। यह बात तनसिंह जयंती समारोह को... संबोघित करते हुए समारोह के मुख्य वक्ता एवं संघ प्रमुख भगवानसिंह रोलसाहबसर ने कही।
रोलसाहबसर ने राष्ट्र हित में बिना जाति पंथ व भेद के राष्ट्र रक्षा के लिए क्षत्रिय बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तनसिंह जैसे महापुरूष राष्ट्र की थाति है। यह मालाणी की धरती गौरवशाली है, जिस पर ऎसे महान पुरूष का जन्म हुआ। कार्यक्रम को संबोघित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक पुखराज गुप्ता ने कहा कि हमे गर्व है कि तनसिंह जैसे चिंतक, लेखक व मनीषी का इस धरती पर जन्म हुआ और उनका मार्गदर्शन मिला। एडवोकेट स्वरूपसिंह राठौड़ ने तनसिंह को आदर्श राजनेता बताते हुए उन्हें सादगी व आध्यात्मिकता की अद्भुत मिसाल बताया।
कार्यक्रम को संबोघित करते हुए बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन ने कहा कि तनसिंह ने सामान्य परिस्थितियों से संघर्ष करके देश व समाज को राजनीति व चिंतन के माध्यम से अपूर्व योगदान दिया। बाड़मेर के पूर्व विधायक तगाराम चौधरी ने तनसिंह को बाड़मेर जिले का महान सपूत बताते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। शिव के पूर्व विधायक डा. जालमसिंह रावलोत ने तनसिंह और उनके दर्शन को राष्ट्रीय जरूरत बताते हुए युवा पीढ़ी से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। एडवोकेट रूपसिंह चौहटन ने तनसिंह के साथ अपने संस्मरण बताते हुए उन्हें सफल आंदोलनकर्ता व सफल नेता बताया।
केप्टन हीरसिंह भाटी ने कहा आज देश को बचाना है तो तनसिंह के बताए रास्ते पर चलना पड़ेगा। कार्यक्रम को अरूणा माडपुरा, राज्यलक्ष्मी लूणू ने भी संबोघित किया। इस अवसर पर मेघूदान चारण ने काव्यपाठ किया। वहीं कालूसिंह गंगासरा ने तनसिंह के सहगीत प्रस्तुत किए

Jan 9, 2011

----:क्षत्राणी:----

कुँवरानी निशा कँवर नरुका


मै दुर्गा की जयेष्ट-पुत्री,क्षात्र-धर्म की शान रखाने आई हूँ !
मै सीता का प्रतिरूप ,सूर्य वंश की लाज रखाने आई हूँ!1!

मै कुंती की अंश लिए ,चन्द्र-वंश को धर्म सिखाने आई हूँ !
मै सावित्री का सतीत्त्व लिए, यमराज को भटकाने आई हूँ !२!


मै विदुला का मात्रत्व लिए, तुम्हे रण-क्षेत्र में भिजवाने आई हूँ !
मै पदमनी बन आज,फिर से ,जौहर की आग भड़काने आई हूँ !३!

मै द्रौपदी का तेज़ लिए , अधर्म का नाश कराने आई हूँ !
मै गांधारी बन कर ,तुम्हे सच्चाई का ज्ञान कराने आई हूँ !४!


मै कैकयी का सर्थीत्त्व लिए ,तुम्हे असुर-विजय कराने आई हूँ !
मै उर्मिला बन ,तुम्हे तम्हारे क्षत्रित्त्व का संचय कराने आई !५!

मै शतरूपा बन ,तुम्हे सामने खडी , प्रलय से लड़वाने आई हूँ!
मै सीता बन कर ,फिर से कलयुगी रावणों को मरवाने आई हूँ!६!


मै कौशल्या बन आज ,राम को धरती पर पैदा करने आई हूँ !
मै देवकी बन आज ,कृष्ण को धरती पर पैदा करने आई हूँ !७!

मै वह क्षत्राणी हूँ जो, महा काळ को नाच नचाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ जो ,तुम्हे तुम्हारे कर्तव्य बताने आई हूँ !८!


मै मदालसा का मात्रत्त्व लिए, माता की माहिमा,दिखलाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ जो ,तुम्हे फिर से स्वधर्म बतलाने आई हूँ !९!

हाँ तुम जिस पीड़ा को भूल चुके, मै उसे फिर उकसाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ ,जो तुम्हे फिर से क्षात्र-धर्म सिखलाने आई हूँ !१०!



"जय क्षात्र-धर्म "

कुँवरानी निशा कँवर नरुका
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति

Jan 1, 2011

जो ललकारे उसे ना छोड़े

ओ सीमा के प्रहरी वीरों !सावधान हो  जाना
इधर जो देखे आँख उठाकर ,उसको मार गिराना ||
बडे भाग्य से समय मिला है,उसको व्यर्थ ना खोना
भारत-हित बलि-भेंट चढ़ा कर,बीज सुयश के बोना ||

भाई और पड़ोसी होकर,छुरा भौंकते अपने
हथियारों के बल पर निशिदिन,देख रहे है सुख सपने |
अत्याचारी चीन,पाक को,बढ़ बढ़ हाथ दिखाना
घर बैठे गंगा आई है,न्हाना पुन्य कमाना ||

सीखा है धरती पर तुमने,करना वरण मरण का
साक्षी है इतिहास धारा पर,रावण सिया हरण का |
दे दो आज चुनौती,कह दो,हम है भारत वाले
हमें ना छेडो,हम उद्जन बम,हम रॉकेट निराले ||

चंद्रगुप्त,पोरस,सांगा -सा ,करना है रखवाली
भारत माँ के वीर सपूतो!तुम हो गौरवशाली |
पीछे रहे,न रहे कभी भी,माँ की रक्षा करने
जो ललकारे उसे ना छोड़े,डटे मारने मरने ||
जयजयकार किया करती है,जनता नर-हीरो की ,
जर जमीन,जोरू यह तीनो होती है वीरो की || 

(पाथेय कण पत्रिका से साभार लेखक -सज्जन कविरान ,अजमेर )