Dec 26, 2012

स्तुति जमवाय माता



 जमवाय माता

म्हारी माता ए जमवाय, थारो मोटोड़ो दरबार !
म्हारो हेलो सुणो !!

दोसा सू आया दुल्हराय, हारोड़ी फोजा ने जिताय!
बुढ़िया को भेष बनाय, राणी को चुडलो अमर करयो !
म्हारो हेलो सुणो !!

कामधेनु बण दोड़, माता सिंघ पीठ ने छोड़ !
रण मे इमरत दियो निचोड़ , थणा सूं दूध झरयो !
म्हारो हेलो सुणो !!

तूँ कछवाहा कुल की जोत, तू अरियाँ द्लरी मोंत!
"काकिल" हिवडे करयो उघोत, थापी गादी आमेर की!
म्हारो हेलो सुणो !!

बेठी डूगर- घाटी बीच मायड कोट गोखड़ा खीच!
बेठ्या सेवक आख्याँ मीचं धाम 'बुढवाय' थप्यो !
म्हारो हेलो सुणो !!

मांची को बणायो रामगढ़, माता सिंघ पर चढ़ !
सारा असिदल दाब्या खड़ 'बुढवाय' सूं जमवाया बणी!
म्हारो हेलो सुणो !!

थारे दाल भात रो भोग, बणावे सगळा लोग!
कट्जा काया का भी रोग, चढ़ाता चिटकी चूरमो!
म्हारो हेलो सुणो !!

जात जडूला बेसुमार ल्यावे सारा ही परिवार !
गोरडूयाँ करसोला सिंगर बाधावा गावे मात का!
म्हारो हेलो सुणो !!


कीरत रो काई बखाण (माँ) भगतां रा मना ने जाण!
लीना चरणां मे सुवान भगती रो बरदान दियो !
म्हारो हेलो सुणो !!

तू छे शरड्णाइ साधार, अब तो भव सागर सुं तार!
लेवो डूबतडी ऊबार, नेया म्हारी मझधार सुं! 
म्हारो हेलो सुणो !!

सेवक ऊभा थारे द्वार , गावे विनती बारम्बार !
तू तो भगतां की आधार, सुहगया की गोद भरे! 
म्हारो हेलो सुणो !!



कुछ दिनों पहले रतन सिंह ने "कुलदेवी कछवाहा राजपूत " और  कछवाहा राजपूतो के बारे मे जानकारी दी थी, मुझे जब तक जानकारी है की सभी राजपूतो की कुलदेवी होती है और सभी राजपूतो को सबसे पहले अपनी कुल देवी की आराधना करनी चाहिए!  

Dec 23, 2012

पर्दा छोड़ राजनीति व सामाजिक स्तर पर भूमिका निभाए क्षत्राणीयां

जयपुर : पूर्व केन्द्रीय मंत्री कल्याण सिंह कालवी की जयंती पर शहर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ| मुख्य आयोजन श्री राजपूत करणी सेना की और से रविन्द्र मंच के ओपन थियेटर पर क्षत्रिय जान प्रतिनिधि गौरव सम्मान समारोह हुआ| कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि केंद्रीय कला व सांस्कृतिक मंत्री चंद्रेश कुमारी ने कहा कि क्षत्राणीयां जान-प्रतिनिधि के रूप में तो सामने आ रही है अब पर्दा छोड़कर राजनीति व सामाजिक स्तर पर भी सक्रीय पर भी भूमिका निभाये, ताकि समाज का स्तर ऊँचा हो| पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि कल्याण सिंह कालवी युवाओं को सक्रीय राजनीति में लेकर आये|
करणी सेना के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी व राजपूत समाज की विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों ने १३ जनवरी को अमरूदों के बाग़ में होने वाले राजपूत स्वाभिमान सम्मलेन में राजनैतिक विचारधारा व पार्टी स्तर को भूलकर शक्ति प्रदर्शन के लिए एकजुट होने का आव्हान किया|
इस मौके पर श्री राजपूत करणी सेना की वेब साईट का भी लोकार्पण किया गया| सम्मलेन में प्रदेशभर के जान-प्रतिनिधियों के तौर पर राजपूत जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच, जिला परिषद् व पंचायत समिति सदस्य व विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र संघ पदाधिकारियों को गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया|

Dec 17, 2012

क्षत्रिय जनप्रतिनिधि गौरव सम्मान समारोह का आयोजन 22 दिसंबर को

श्री राजपूत करणी सेना द्वारा २२ दिसम्बर २०१२ को दोपहर दो बजे जयपुर के रविन्द्र रंगमंच, रामनिवास बाग़ में क्षत्रिय जनप्रतिनिधि गौरव सम्मान समारोह का आयोजन किया जायेगा| जिसमें राजस्थान के प्रदेश भर के राजपूत जिला प्रमुख, जिला परिषद् सदस्य, प्रधान पंचायत समिति सदस्य,सरपंच, पार्षद व छात्रसंघ प्रतिनिधियों को सम्मानित किया जायेगा|

श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश संयोजक श्याम प्रताप सिंह राठौड़ ने इस आयोजन में भाग लेने के लिए सभी क्षत्रिय बंधुओं से अपील की है कि -
"लोकतंत्र की रीढ़ की हड्डी माने जाने वाली पंचायत राज व्यवस्था में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाले राजपूत जनप्रतिनिधि - जिला प्रमुख , जिला परिषद् सदस्य , प्रधान , पंचायत समिति सदस्य , सरपंच , पार्षद व छात्रसंघ में विजेता छात्र नेताओ को इस सम्मान से नवाजा जायेगा !!आप से अनुरोध है की अगर आप भी उपरोक्त श्रेणी में आते है या आपके संपर्क में ये जनप्रतिनिधि है तो आप उनके नाम , गावं का नाम व फोन न . यहाँ प्रदान करे , ताकि उनसे संपर्क कर उन्हें आमंत्रित किया जा सके ! आप सभी इस एतिहासिक सम्मान समारोह में सादर आमंत्रित है साथ ही संपर्क के सभी जनप्रतिनिधियों को भी सूचित करावे !!"

संपर्क करे - 9214059696 -9982987236

मूल्यांकन के मापदण्ड ............



व्यक्ति का सही मूल्यांकन कर पाना बहुत कठिन है ! अक्सर उपरी दिखावे के जाल में फंसकर हम गलत दिशा पकड़ लेते है और व्यक्ति की वास्तविकता तक नहीं पहुँच पाते ! वेश भूषा, खानपान आदि से भले लगने वाले लोग फरेबी और क्रूर निकल सकते है, तो दिखने में बुरे लगने वाले लोगों में भी पवित्रता के दर्शन हो जाते है ! अक्सर लोग आर्थिक पक्ष की सबलता को देख कर मान एवं सम्मान प्रदर्शित करते है, जबकि अर्थ अपने आपमे कोई सम्मान देने योग्य वस्तु ही नहीं है ! आवश्यकता से अधिक अर्थ का होना दुर्गुणों के मार्ग खोलने की प्रबल सम्भावनाये अपने आप में समाहित किये हुए होता है ! साधारण बोल चाल के शिष्ठाचार से किसी के जीवन मूल्यों को पहचानना भी अंधेरों में भटकने जैसा ही है ! पवित्रता हो तो कडवी बात भी मधुरता प्रदान करती है और उपरी शिष्ठाचार के निचे इर्ष्या और डाह की अग्नि छुप कर बेठी हो तो वह शिष्ठाचार का पर्दा वह गर्मी रोकने में असक्षम होगा ! बड़ी बड़ी राशियाँ लोग चंदे एवं दान में दे देते है, जितनी बड़ी रकम होती है लोग उसे उतना ही बड़ा दानी बना देते है, लेकिन वह दान जो बदले में सम्मान चाहता हो, किसी भवन पर अपना नाम लिखवाना चाहता हो अथवा प्रशस्ति पत्र की चाह रखता हो, वह तो दान की श्रेणी में ही नहीं आता ! वह तो मात्र सौदा ही हो सकता है ! नौकरी में घूसखोरी नहीं करने वाले को हम इमानदार कहते है, यह उसकी विशेषता अवश्य है की वह गलत तरीकों से धनार्जन नहीं कर रहा है ! परन्तु क्या ईमानदारी का क्षेत्र यही तक सिमित हो गया है ! वयव्हार में कितनी पवित्रता है, कितनी निर्मलता है इसी से सच्चा मूल्यांकन हो सकता है ! ईमानदारी को आर्थिक पहलु पर ही क्यों लटकाकर छोड़ दिया जाये ! ईमानदारी हमारे जीवन के सिद्धांतो के प्रति क्यों नहीं ! इमानदारी पूर्वक हम हमारे उत्तरदायित्वों का निर्वहन क्यों नहीं करे !

Dec 16, 2012

सारंगखेडा अश्वमेला : चेतक और कृष्णा के नाम से दिए जायेंगे पुरस्कार ......


गुजरात की सीमा से महज 100 कि .मी . के दुरी पर शहादा --धुले रोड पर महाराष्ट्र में सुर्यकन्या तापी नदी के किनारे बसा सारंगखेडा गाव जो कभी रावल परिवार की जागीर का स्थल था , अपने शानदार अश्व-मेला की वजह से विश्व-प्रसिद्ध है। प्राचीन समय से यहाँ भगवन एकमुखी दत्त जी का मंदिर है। श्री दत्त जयंती के पावन अवसर पर यहाँ बहुत ही सुंदर मेले का आयोजन होता आया है। विभिन्न नस्लों के घोड़ों के लिए यह मेला दुनिया भर में मशहूर है। प्राचीन समय से भारत वर्ष के राजा-महाराजा; रथी -महारथी यहाँ अपने मन-पसंद घोड़ों की खरीद के लिए आते-जाते रहे है। आज भी देश के विभिन्न प्रान्तों से घोड़ों के व्यापारी यहाँ आते है। आनेवाली 27 दिसम्बर के दिन यात्रारंभ होगा। हर रोज लाखो श्रद्धालु भगवान दत्त जी के मंदिर में दर्शन करते है और यात्रा का आनंद भी लेते है। विभिन्न राजनेता, उद्योजक, फ़िल्मी हस्तिया यहाँ घोड़े खरीदने आते-जाते रहते है। इस साल भी अभिनेता शक्ति कपूर , लावणी सम्राज्ञी सुरेखा पुणेकर, ईशा और अभिनेत्री सोनाली कुलकर्णी यहाँ महोत्सव में उपस्थिति दर्ज करने पधार रहे है। इस मेले में कृषि प्रदर्शनी; कृषि मेला; बैल-बाजार; लोककला महोत्सव; लावणी महोत्सव तथा अश्व स्पर्धा आदि का आयोजन होता है।

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी का घोडा "चेतक" तथा छत्रपति शिवाजी महाराज जी घोड़ी "कृष्णा" इतिहास में प्रसिद्ध है। महाराणा प्रतापसिंह जी के जीवन में चेतक घोड़े का साथ महत्वपूर्ण रहा था। कृष्णा घोड़ी ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज के संघर्ष के काल में अभूतपूर्व योगदान दिया था। चेतक और कृष्णा के नाम से इस साल सारंगखेडा मेले में पुरस्कार दिए जायेंगे। दौड़ में सर्वप्रथम आनेवाले अश्व को चेतक पुरस्कार--11000 रु की नगद राशी .- चेतक स्मृति चिन्ह और रोबीले पण में सर्वप्रथम आनेवाले अश्व को कृष्णा पुरस्कार--11000 रु . की नगद राशी --कृष्णा स्मृतिचिन्ह प्रदान किया जायेगा। इस मेले में दोंडाईचा संस्थान के कुंवर विक्रांत सिंह जी रावल जी के अश्व -विकास केंद्र के घोड़े भी मौजूद रहते है। जिनमे फैला-बेला नाम की सिर्फ 2.5 फिट ऊँची घोड़ों की प्रजाति ख़ास आकर्षण का केंद्र रहेगी। सारंगखेडा के भूतपूर्व संस्थानिक तथा वर्तमान उपाध्यक्ष (जि .प .नंदुरबार) श्री जयपालसिंह रावल साहब तथा सरपंच श्री चंद्रपालसिंह रावल के मार्गदर्शन में इस मेले की सफलता के लिए स्थानीय पदाधिकारीगन प्रयत्नरत है।

इस अभूतपूर्व अश्व मेले के बारे में अधिक जानकारी के लिए क्लिक करे:



करणी सेना संयोजक श्याम प्रताप सिंह राठौड़ का दिल्ली दौरा

13 जनवरी 2013 को जयपुर के अमरूदों के बाग़ में श्री राजपूत करणी सेना द्वारा आयोजित राजपूत स्वाभिमान सम्मलेन को सफल बनाने के लिए व अन्य सामाजिक मुद्दों पर विचार विमर्श के लिए करणी सेना के संयोजक श्याम प्रताप सिंह ने कल दिल्ली का दौरा किया| दिल्ली में उन्होंने विभिन्न राजनैतिक दलों के राजपूत नेताओं से मुलाक़ात की|
श्याम प्रताप सिंह राठौड़ के अनुसार -

दिल्ली की यात्रा बेहद सकारात्मक रही , भा ज पा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह जी से उनके लोकसभा क्षेत्र गाज़ियाबाद में मुलाकात हुई . समाज के विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई तथा करणी सेना की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा की युवा वर्ग को सामाजिक भावना के साथ जोड़ने का बहुत अच्छा काम करणी सेना कर रही है . साथ ही करणी सेना के आगामी कार्यक्रम में पधारने की बात भी कही , भाजपा युवा नेता राजेंद्र सिंह जी सुरपुरा ने राजनीति में युवाओ के मार्गदर्शन की बात उनके सामने रखी | देश के पूर्व प्रधानमंत्री व युग पुरुष कल्याण सिंह जी कालवी के घनिष्ठ श्री चंद्रशेखर जी के पुत्र श्री नीरज शेखर (सांसद) से भी मिलना हुआ | स्व. कालवी से जुडी अनेक यादो को ताजा करते हुए उन्होंने राजस्थान में राजपूतो की वर्तमान स्थिति पर भी चर्चा की तथा करणी सेना की कार्यशेली व कार्यक्षेत्र की जानकारी प्राप्त की !

जोधपुर की बेटी व देश की कला व संस्क्रती मंत्री श्रीमती चंद्रेश कुमारी जी के निवास पर उनके पुत्र श्री ऐश्वर्य सिंह से भेंट हुई , बेहद ही अपनत्व से मिलते हुए उन्होंने अनके विषयों पर बात की , उन्होंने कहा की समाज में एक जागरूकता आन्दोलन की आवश्यकता है , जिसमे समाज व मुख्य रूप से क्षत्राणियो को लोकतंत्र में वोट के महत्व को समझाते हुए वोट कास्ट के लिए प्रेरित करे|

निज़ाम बदलने के लिए युवाओ को आना होगा आगे ...


हर तरफ यही हंगामा चलो चलो चलो .... कहा चले कब तक चलते रहे यूँही बिना वजह ????


पिछले 10 वर्षो में जगह जगह आयोजित सामाजिक कार्यकर्मो में 10 लाख से अधिक की तादात में राजपूत कौम कई तथाकथित ठेकेदारों के सानिध्य में एकत्रित हो चुकी है ! मेरे हिसाब से हर राजपूत का
इन सामाजिक समारोहों में शामिल होने पर एवरेज 500/- (प्रति राजपूत) का खर्चा तो हुआ ही है !
इस हिसाब से 10,00,000 X 500 = 50,00,00000 /- ( पचास करोड़ रु ) इन भव्य आयोजनों पर उड़ाकर इन ठेकेदारों ने समाज को क्या दिया ? उन्नति या अवनति यह आकलन करने का समय है ! क्या यह रुपया समाज को मिलने वाले किसी सरकारी आर्थिक पैकेज से कमतर था ?? क्या इन आयोजनों ने किसी आम राजपूत का हित साधने का किंचित मात्र भी प्रयास किया है ? या अपनी राजनैतिक दुकाने बचाने में आम राजपूत की उर्जा का महज इस्तेमाल करना ही ऐसे आयोजनों का मंतव्य रहा है ? समझ से परे है !!!
 मै आप सभी समाज बंधुओं से जरुर जानना चाहता हूँ की क्या ऐसे ही किसी राजनैतिक कम सामाजिक कार्यकर्मो का आयोजन समाज का भला कर देंगे ? क्या हम किसी भी संघटन के यह कहने मात्र से कही भी चले जायेंगे की """ यह प्रजातंत्र है, सर गिनवाने है, कटवाने की जरुरत नहीं है""

हम आम लोग कब ये बताने का साहस जुटा पायेंगे की हमने लाखो की तादात में सर गिनवाए है विगत 10 वर्षो में, तो फिर सर गिनवाने से होने वाला फायदा कोन खा गया ? या फायदे के नाम पर हमें अब तक क्यों बेवकूफ बनाया जा रहा है ? अरे हम आम लोग है हमारा फ़ायदा नहीं कर सकते तो कम से कम मत करो लेकिन हमारे ''' बच्चो का भविष्य बेचकर ''' आपके बच्चो का भविष्य निर्माण ''' तो किसी कीमत पर नहीं होने देंगे !!

Dec 6, 2012

‘‘हिन्दुस्थान री बडी मरजाद राखी‘‘ (रावल कान्हड़देव चैहान)

 अलाउद्दीन ने सभी हिन्दु राज्यों को समाप्त करने की नीति बनाई थी तथा वह हिन्दुओं को गुलामों के समान कर देना चाहता था। 1298 ई. में उसने सोमनाथ के मंदिर को तोड़ने के लिए गुजरात पर चढ़ाई की और वहाँ मन्दिर तोड़कर, सोना लूटकर हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाकर अपने साथ दिल्ली ले जाने लगा। मार्ग में जालौर राज्य की सीमा में जालौर से 18 मील दूर सकराना गाँव तक उसकी सेना आ पहुँची । सेना के साथ उलूग खाँ सेनापति था। यह देख रावल कान्हड़देव ने अपने मुख्य सामन्त जैत्र देवड़ा को उसके पास भेजा और कहलाया कि तुमने इतनी बड़ी संख्या में हिन्दुओं की हत्या करके मेरे राज्य में आकर ठीक नही किया है, क्या मुझे तुमने राजपूत नही जाना ? इस संदेष के बहाने जैत्र देवड़ा ने मुसलमानों के पडाव की जानकारी ली और पाया कि गुजरात लूट को प्राप्त करने के लिए बहुत से नव मुसलमानों में असंतोष है। जैत्र देवड़ा ने उनमें मुख्य मुहम्मदशाह को अपनी ओर आने का संकेत कर दिया और जालौर लौटा। जालौर से हिन्दुत्व की रक्षार्थ एक जबरदस्त राजपूत सेना ने जैत्र देवड़ा के नेतृत्व में मुसलमानों पर धावा बोला। घमासान यु़द्ध हुआ और शत्रु का कमाण्डर मलिक आईजुद्दीन मारा गया। इसके साथ-साथ अलाउद्दीन खिलजी का भतीजा भी इस युद्ध में मारा गया। हिन्दू वीरों का प्रहार ऐसा तीव्र था कि मुस्लिम सेनापति उलूग खां बाल-बाल बचा। इस प्रकार इन भारतीय सपूतों ने हजारों हिन्दुओं को मुक्त कराया और भगवान सोमनाथ की मूर्ति को छुड़ाकर जालौर ले आए। भारी संख्या में मुसलमान काम आए। इस अप्रत्याषित घटना से मुसलमान भाग निकले और अगले 5 वर्ष तक उन्होंने इधर देखा तक नही। 1305 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने सिवाणा के दुर्ग को जा घेरा। वहाँ के रावल शीतल देव जालोर के रावल कर्णदेव के भतीजे थे। इस घेरे में मुसलमानों के दो कमाण्डर जिनमें एक का नाम नाहर मलिक था काम आया। अन्त में 1310 ई. में अलाउद्दीन स्वयं विषाल सेना के साथ सिवाणा के घेरे में शामिल हुआ और उसको सफला मिली।

सिवाणा के पराभव के पष्चात भी जालोर के रावल कान्हड़देव ने मुसलमानों की अधीनता स्वीकार नही की। उस परम भट्टारक हिन्दू नरेष के ऐसे साहस और गौरव को देख सुल्तान अलाउद्दीन ने जालोर विजय करने का निष्चय किया और सेना को निर्देष देकर दिल्ली चला गया। अब मुस्लिम सेना ने बाड़मेर पर आक्रमण किया और भगवान महावीर स्वामी के सुन्दर और भव्य मन्दिर को तोडा। वहाँ से मुसलमानों ने भीनमाल को आग लगा दी। भीनमाल चैहान राजपूतों की ब्रह्मपुरी थी। जहाँ 45 हजार बाह्ममण श्रीमाली वेद पाठन का महान् राष्ट्रीय कर्तव्य पूरा करते थे। हजारों ब्राह्मणों को बन्दी बनाया और उन्हे मारवाड़ से ले जाया जाने लगा। यह सब मुसलमानों ने रावल कान्हड़देव के हिन्दू गौरव को तोड़ने के लिए घृणित काम किया। राजपूतों ने राष्ट्रीय पराभाव के इन दिनों में अपना कर्तव्य निभाया और ब्राह्मणों को मुक्त करने के लिए निकल पडे़। रावल कान्हड़देव ने 36 कुलों के राजपूतों को इस देष रक्षा के लिए बुलाया था। वे क्षत्रिय गौ-रक्षा ब्राह्मण प्रतिपाल थे अर्थात् राष्ट्र के धन और विद्धानों की रक्षा और पालना के लिए उत्तरदायी थे। रावल के बुलावे पर सोंलकी, राठौड़, परमार, चावड़ा, डोडिया, यादव और गोहिल आदि सभी आए। इन सभी ने गाँव खुडाला पर जबरदस्त धावा करके बाह्मणों को मुक्त कराया और तत्काल लौट गए। उस दिन अमावस्या थी इस कारण साल्हा, सोभित लाखण और अजयसिंह 4000 सेना के साथ तालाब पर स्नान करने रूके और उस समय अचानक मुसलमानों ने उन पर दूसरा आक्रमण किया। ये लोग 4000 थे अतः सभी वहाँ काम आए।

लाखण ने जो शोर्य और पराक्रम किया उसके कारण मरने पर मुसलमानों ने उनके शव की वन्दना की। इस घटना के बाद दिल्ली से और सेना आई और मुसलमानों ने जालौर दुर्ग को घेरा। रावल कान्हड़देव ने अब राजकुमार वीरम और अपने भाई मालदेव को जालौर बुला लिया। उन्होनें अपनी सेना के 8 भाग लिए और युवराज वीरम और मालदेव तथा सामान्त अणत सिसौदिया, जैन, बाघेला, जैत देवड़ा लूणकरण, माल्हण, सोभित देवड़ा और सहजपाल को कमाण्ड़र बनाया और मुस्लिम सेना दुर्ग पर चढ़ने या आक्रमण करने में असफल रही। अतः उसने दुर्ग से एक प्रबल धावा किया गया जिससे मुस्लिम चैकी उदलपुर जो जालौर के पास थी को समाप्त कर दिया गया। दुर्ग में अन्न और जल की कमी होने लगी। तभी बरसात हुई और दुर्ग में पानी पूरा हो गया। महाजनों ने अपने अन्न भण्डार खोल दिये। यह रावल के प्रति जनता का प्रेम था परन्तु शत्रु किसी प्रकार से भी कुछ देषद्रोही खोज ही निकालता है। बीका दहिया ऐसा ही देषद्रोही था उसने रात को मुसलमानों को एक गुप्त से दुर्ग में प्रवेष करा दिया। उसे जालौर दुर्ग प्राप्त होने का प्रलोभन दिया गया था। परन्तु उस देषद्रोही को तत्काल दण्ड दिया उसी की देष भक्त धर्म पत्नी वीरांगना हीरा देवी ने बीका की तत्काल हत्या की दी और रावल को जाकस सूचना कर दी। अब दुर्ग की रक्षा कठिन थी अतः महारानी ने जौहर की तैयारी की।

गढरी परधी घेर, बैरी रा घेरा पड़या।
सत्यां काली रात ने, जौहर सूं चनण करी।।


महारानी के साथ हजारों हिन्दू सती नारियों ने अपना जीवन अग्नि को सौप दिया। रावल कान्हड़देव की रानियां-उमादे कँवलदे, जैतल दे, भवलदे, ने अग्नि प्रवेष किया। इस प्रकार वैषाख शुक्ला पंचमी सम्वत् 1368 (1311 ई.) को उत्तरी भारत का सर्व शक्तिषाली हिन्दू-राज्य समाप्त हो गया। जनमानस में जो श्रद्धा और प्रेम तथा विष्वास रावल कान्हड़देव को प्राप्त था उसका अनुमान इसी से लगाया जाता है कि लोगों नें उन्हे अमर माना और यही कहा कि दुर्ग पतन के बाद अन्र्तध्यान हो गए थे। उनके बाद भी युवराज वीरम ने मुसलमानों से तीन दिन तक युद्ध किया और काम आये|

संसार के इतिहास में केवल भारत में ही जौहर की परम्परा रही है। यह पवित्रता ही वह गुण है जिसके कारण भारतीय नारी जग पूजित है। राजस्थान का इतिहास जौहर की घटनाओं से परिपूर्ण है। इस उत्सर्ग से भारत की गरिमा के बहुत वृद्धि हुई और यह सदा प्रेरणादायी रहेगा। जालौर के निष्चय हो जाने के पश्चात् वीर हिन्दू नारियाँ स्नान कर, पूजा करती थी और तुलसी दल की माला पहनती थी। वे पूरा श्रृंगार करती थी और महारानी की अगुआई में चिता में प्रवेष करती थी। ऐसी नारियों के बल पर ही भारत की रक्षा सम्भव हो सकी थी|

सौजन्य: अनिरूध सिंह सोहनगढ़

Dec 1, 2012

विधवा-विवाह और क्षत्राणी

कुँवरानी निशा कँवर
आजकल कुछ लोग हीन भावना से इतने ग्रषित है कि दुसरे वर्ग या वर्ण के समाजों के पैमाने से क्षत्रिय समाज की परम्पराओं ,मान्यताओं ,कर्त्यव निष्ठां ,धर्म पालन,यहाँ तक की क्षात्र धर्म की आधार शिला एवं क्षात्र धर्म की जननी परिवार एवं वैवाहिक संस्था तक को आधुनिकता,नारी के सामान अधिकारों के नाम पर विधवा हित चिन्तक बनकर क्षत्राणी को भी अबला,निस्सहाय,आदि शब्द देकर उसे अन्य समाजो के पैमानों पर कशने का दु :साहस कर रहे है,,,,,,, वे तथाकथित हित चिन्तक मुझे कुछ सावों का जवाब देने का कष्ट करें ,

1)सर्व प्रथम मुझे बताये कि किसी विधवा क्षत्राणी के पूर्ण अधिकार जिसकी वह है अधिकारिणी है नये पतिदेव प्रदान करेंगे ????? यानि अपने मृत पति का श्राद्ध कर्म करने का अधिकार उसे मिलेगा ?????

2)क्या वह क्षत्राणी अपने पूर्व सास श्वसुर की सेवा करने के लिए स्वतन्त्र होगी ??????

3) पुनर्विवाह किस उम्र तक की क्षत्राणी को करना चाहिए ??????

4)किस विधवा को पुनर्विवाह करने की छूट होगी ,,,,,????????मतलब आर्थिक रूप से कमजोर या संतानहीन या 1 बच्चे की माँ ,2बच्चे की माँ या फिर वृद्धावस्था में जब बच्चे भी ठुकरा दे ?????
v 5)यदि विधवा का विवाह केवल इस आधार पर करने की वकालत की जारही हो कि "सारी जवानी कैसे कटेगी ?" तो उनके बारे में क्या व्यवस्था की जारही जो जीवित रह कर भी सूर्यास्त होते ही मदिरा की गोद में चले जाते है उनकी पत्नियों को भी यह आजादी मिलेगी ????? या फिर वर्ष के 10 माह राष्ट्र की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात है क्या उनकी पत्नियों को भी अस्थायी विवाह करने यह आजादी मिलेगी ?????

6)अन्य समाजो के पैमाने लिए फिरने वालो ने इस बात पर गौर किया या नहीं कि विवाह के प्रारम्भ सभी को सामंजस्य में थोडा समय लगता है ,अतः जब अन्य समाजों में आये दिन पति को पत्निठुकरा रही है तब पुनर्विवाह चलन में होने पर यह बुराई हमारे समाज में भी एक भयावह रूप क्यों नहीं लेगी ??????

7)विधवा को एक देवी और तपस्विनी की तरह सम्मान मिलने की स्थिति में पुनर्विवाह से अधिक सक्षम और समर्थ क्षत्राणी(राजमाता कुन्ती ) क्यों स्वीकार नहीं है आपको ??????

कुछ लोग फरमा रहे है कि हमने हर तर्क के लिए नोट बना रखे है ,आलेख लिख रखे है,,,,,,,,,,,,,,,उनके लिए रही बात नोटया आलेखों की, तो बना हुकुम,एक ही चीज को बार बार लिखने के बजाये ,,,,उसे लिख कर रख लिया जाये तो क्या ,,,,,,,,,,बुराई है ,,,,,,एक पत्निवृतियो से भी क्षत्रिय समाज भरा पड़ा ,,,,महाराज हरिचन्द्र जी स्वयं सर्वश्रेष्ट क्षत्रिय श्री राम ,राजर्षि मधुसुधन दास जी महाराज जैसे आज भी हजारो क्षत्रिय है ,,,,,,,,यहाँ फेस बुक के बजाये कोई शंका या वाद्विवाद है आमने सामने बैठकर होसकता है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मै क्षत्राणी और सिर्फ क्षत्राणी की ही बात ज्यादा कर सकती हूँ ,,,,,मै ऐसे किसी तर्क से सहमत नहीं जो क्षत्राणी को अबला,बेचारी,निस्सहाय ,या अकेले सतीत्व की रक्षा करने में असमर्थ सिद्ध करने का प्रयास करे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,यदि कोई यह कहता या सोचता हो कि केवल पति के कारण क्षत्राणी अपने सतीत्व की रक्षा कर सकती है तो यह उसका बहम है इसे वह आज और अभी अपने जेहन निकाल दे,क्योंकि संसार का कोई व्यक्ति युधिष्ठर ,भीम,अर्जुन,नकुल और सहदेव की सयुंक्त शक्ति से अधिक शक्तिशाली नहीं होसकता ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,फिरभी द्रौपदी की लाज बचाने में सफल नहीं होपाये ,द्रौपदी के सतीत्व की रक्षा उसके स्वयं के तेज़ ने की ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,श्री राम से बड़ा कोई योद्धा नहीं किन्तु फिरभी माता सीता के ऊपर रावण ने कुदृष्टि की ,,,,,,,,,,,,और माता सीता के तेज़ से ही उनके सतीत्व की रक्षा हुयी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,रही बात आजके युग की सोनिया गाँधी के पीहर और ससुराल दोनों कुलों में विधवा विवाह पर कोई रोकटोक नहीं फिर वह क्या इस बात का उदाहरन पर्याप्त नहीं कि नारी यदि सक्षम है तो उसे विधवा विवाह की कोई जरुरत नहीं

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या क्षत्राणी इस सोनिया के बराबर भी सक्षम नहीं बन सकती ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,फिर धिक्कार है ऐसे क्षत्रित्व पर ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आज आवश्यकता है राजपूत कन्याओ को सक्षम,समर्थ बनाया जाये उन्हें इतना समर्थ और सक्षम बना दिया जाये की स्वयं धर्म् न्याय और समाज उसकी ओर ताके ,न कि क्षत्राणी किसी आसरे की खोज करती फिरे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्षत्राणी कोई गाय नहीं है कि उसे खूंटा उखड जाने पर दुसरे ,तीसरे पर बाँधते फिरे ,,,,,,,,,,,जिनमे क्षत्रित्व नहीं वे पति के मरने का भी क्यों इंतजार करे,,,,,,,,,नहीं पसंद आरहा तो क्या जरुरत है सामंजस्य की ,,,,,,,,,,,,,,,,,,उसके जीते जी करो दूसरा ,तीसरा ,,,,हम सिर्फ और सिर्फ क्षात्र धर्म पालकों की बात कर रहें ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,जो सामाजिक,धार्मिक वर्जनाओ को नहीं मानना चाहते ,,,,उन्हें कोई नहीं रोक रहा ,,,,,,,,,,,,,,
"जय क्षात्र धर्म "
कुँवरानी निशा कँवर
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति

Nov 22, 2012

श्री क्षत्रिय वीर ज्योति का पंचम मंथन शिविर (हमीरगढ़ )

कुंवरानी निशाकँवर
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति के पंचम मंथन शिविर का आयोजन दिनांक 17/11/2012 से 18/11/2012 तक प्रातः स्मरणीय स्वतंत्रता के दीवाने महाराणा प्रताप की मेवाड़ धरा के हमीरगढ़ (भीलवाड़ा) में किया गयाथा ! मंथन शिविर "मंशा महादेव" मन्दिर में दिनांक 17/11/2012 को समय क़रीब 03.00 बजे शाम प्रारंभ हुआ !श्री क्षत्रिय वीर ज्योति के अध्यक्ष वासुदेव श्री कृष्ण की मंगलिक मंत्रोच्चारन केसाथ उपासना के उपरांत कार्य-क्रम की शुरुआत करते हुए सर्व‌-‌-प्रथम श्री क्षत्रिय वीर ज्योति के संस्थापक स्दस्य एवं आधार स्तंभ ठाकुर साहब जयपाल सिंह गिरासे (शिशोदिया) ने श्री क्षत्रिय वीर ज्योति की प्रस्तावना उपस्थित क्षत्रिय एवं क्षत्रनियो के समक्ष रखी !इसके बाद कुँवर राजेंद्र सिंह नरुका (बसेट) ने क्षत्रिय वीर ज्योति के लक्ष्य एवं उसे हासिल करने के लिए आगामी 46 वर्षों का कार्य-क्रम क्रम वार विस्तार से बताया ! मिशन के लिए धन एवं साधनों के स्रोत्रो पर भी विस्तार से बताया गया ! गुजरात से पधारे श्री मुक्तेश सिंह जी मन्हार ने पिछले 4 वर्षों तक के संस्थान के द्वारा लक्ष्य की दिशा में तय की गयी दूरी एवं क्रियाकलापों के बारे में बताया !गुजरात से ही पधारे श्री जयपाल सिंह जी झाला ने श्री क्षत्रिय वीर ज्योति के मिशन में अपने द्वारा किए गए कार्यों के बारे में बताया ! संस्थान के संस्थापन में अग्रणी भूमिका निभाने एवं मध्य-भारत में क्षत्रिय धर्म जागरण रत श्री डॉक्टर साहब प्रहलाद सिंह जी सिकरवार ने आज के परिवेश में क्षत्रिय वीर ज्योति के मिशन की अवश्यकता के बारे में बताया ! इसके बाद मंथन शिविर में उपस्थित सभी बंधुओं से अपने-अपने विचार व्यक्त करने को कहा गया !सभी उपस्थित क्षत्रिय बंधुओं ने अपना पूर्ण सहयोग श्री क्षत्रिय वीर ज्योति को प्रदान कराने का वायदा किया ! अपनी शंकाओं को प्रकत किया जिनका समाधान संस्थान की ओर से किया गया ! इस मंथन शिविर में राजा-अधिराज हेमेन्द्र सिंह जी बनेरा (पूर्व-सांसद ) सहित राजस्थान ,एम.पी.,गुजरात, महांराष्ट्र ,दिल्ली,उ.प्र. से कार्यकर्ताओ ने भाग लिया !शिविर के मेजबान रावत साहब युगप्रदीप सिंह जी हमीरगढ़ थे ! मंथन शिविर में राजा-अधिरज हेमेन्द्र सिंह जी बनेरा ने इस मिशन को क्षत्रिय धर्म पुनर्स्थापना के लिए अत्यन्त अवश्यक बताया और अपना पुराना सहयोग देने का अस्वशन दिया ,साथ ही वर्तमान सभी प्रकार के राजपुत राजनेताओ से सावधान रहने की सलाह दी ! श्री कुलदीप सिंह जी श्यामपूरा ने भी अपना सहयोग देने का वायदा किया ! मेजबान रावत साहब हमीरगढ़ (श्री युगप्रदीप सिंह जी ) ने सभी का यहा पधरने का आभार व्यक्त किया एवं अपने संगठन जय राजपूताना की ओर से इस मिशन के लक्ष्य हेतु पूर्ण सहयोग का आस्वाशन दिया ! क्षत्रिय धर्म की पुनर्स्थापना में क्षत्रनियो की भूमिका क्या है, और किस प्रकार आज क्षत्रनियो को दूषित होते इस वातावरण से बचाया जाए ,इस पर कुंवरानी साहिबा निशा कँवर जी ने सभी को विस्तार से समझाया ! इसके बाद सयंकाल माताजी के मन्दिर में दर्शन किए गए ! रात्रि 08.00 बजे से 12.00 बजे तक पुनः शंका समाधान का दौर हुआ ! इसके बाद दिनांक 18/11/2012 प्रातः 09.30 बजे सभी श्री क्षत्रिय युवक संघ के बालिका शिविर में बिलिया ,खरदा गए एवं ठाकुर जयपाल सिंह जी शिशोदिया,रावत साहब,युग प्रदीप सिंह जी हमीरगढ़ ,डॉक्टर साहब प्रह्लाद सिंह जी गुना एवं कुँवर राजेंद्र सिंह जी नरुका ने विस्तार से बालिकाओं एवं वहा उपस्थित सभी क्षत्रिय एवं क्षत्रनियो को क्षत्रिय धर्म एवं श्री क्षत्रिय वीर ज्योति मिशन के बारे में समझाया ! इसके बाद सायंकाल 03.00 बजे शिविर समापन हुआ एवं सभी ने भाव भीनी विदाई ली ! मेजबान रावत साहब हमीरगढ़ का मृदुल एवं मिलनसार व्यवहार कबीले तारीफ रहा !इस मंथन शिविर में युवा नवोदित व्यवसायी कुँवर हेमेन्द्र सिंह जी तंवर (दीपावास) भी उपस्थित रहे ! भँवर् कुश (11 वर्षीय) एवं भँवर बयिसा उत्तम कँवर(13 वर्षीय) ने भी मंथन शिविर में पूरा भाग लिया ! इस मंथन शिविर में जो मुख्य निर्णय हुए वे निम्न प्रकार है :‌-
1)अगला मंथन शिविर मध्य प्रदेश में गुना में मार्च 2013 में आयोजित होगा !इसके आयोजक डॉक्टर साहब प्रह्लाद सिंह जी सिकरवार होंगे !
2) सन् 2014 तक इस क्षत्रिय वीर ज्योति मिशन में कुल 10000 सक्रिय सदस्य बनाने है !
3) अगले मंथन शिविर में तय किया जयेगा कि सदस्यों से सदस्यता शुल्क कब से लेना शुरू किया जाएँ !
4)श्री क्षत्रिय वीर ज्योति के मिशन की जानकारी के लिए "क्षत्रिय संसद" ब्लॉग को नियमित किया जाएँ! और ज्ञान दर्पण ,राजपूत वर्ल्ड , पर भी लगातार इसकी जानकारी उपलब्ध करवायी जायेगी !
5) पति के साथ चिता में बैठकर स्वर्ग गमन करने वाली क्षत्रनियो से ज्यादा वे क्षत्रनियो महान मानी जाएँ जो विधवा रहकर अपने पति के परिवार का सहारा बनती है ! और उनके पति के लक्ष्य में अपना पूरा जीवन समर्पित करती है! अतः विधवा क्षत्रनियो को तपस्विनी और देवी का रूप मानकर उनका भरपुर सम्मान किया जयेगा !
6)क्षत्रिय युवक संघ के दोनों घटकों से दंपती शिविर के जरिये क्षत्रिय वीर ज्योति के स्थापित होने वाले गुरुकुलों के लिए क्षत्रिय एवं क्षत्रनियो के संस्कारित परिवारों को चिह्नित कराने का निवेदन किया जयेगा !
7 ) क्षत्रिय इतिहास जिसे हमारे राजनितिक और परम्परागत शत्रुओ ने दूषित कर दिया है उसकी सृष्टि की रचना से लेकर आजतक शुद्धिकरण के लिए परम श्रद्धेय देवी सिंह जी महार (आधुनिक विश्वामित्र )जैसे की शरण में बैठकर इस इतिहास की पुनः रचना की जाये जिससे श्री राम और श्री कृष्ण सहित अधिकांश क्षत्रिय महापुरुषों का चरित्र निम्न करने का पांडा-वाद ने प्रयास किया है उसे समाज जान सके !
"जय क्षात्र-धर्म"
प्रचार प्रमुख
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति

Nov 1, 2012

हमीरगढ़ में राजपूताना युवा सेवा संस्थान द्वारा वार्षिकोत्सव का सफल आयोजन.....!

श्री राजपुताना युवा सेवा संस्थान द्वारा हमीरगढ़ (जी.भीलवाडा,राजस्थान) में ता.२८ अक्टूबर के दिन दूसरा वार्षिकोत्सव दिवस मनाया गया! इस अवसर पर क्षत्रिय महाकुम्भ का सफल आयोजन किया गया था! हमीरगढ़ की पवित्र भूमि पर बड़े ही उत्साह से क्षत्रिय महाकुम्भ में सम्मिलित होने के लिए मेवाड़, मारवाड़,शेखावाटी, हाडोती सहित देश के कोने-कोने से सक्रिय क्षत्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहे!  विशाल शामियाने में रणवाद्यों के साथ  आनेवाले अतिथियों का स्वागत किया जा रहा था!  समारोह के शुरुवात माँ अम्बा भवानी  , वीरशिरोमणि महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पूजन से हुई! माँ भवानी की सामूहिक आरती कर शक्ति की उपासना की गयी! राजपुताना युवा सेवा संस्थान के द्वारा और हमीरगढ़ के रावत श्री युग्प्रदिप सिंहजी द्वारा उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया गया! समारोह की अध्यक्षता मंडलगढ़ के विधायक श्री प्रदीप कुमार सिंह  सिंगरौली ने की!  मुख्य अतिथि श्री लोकेन्द्रसिंह कालवी (शीर्ष संस्थापक: श्री राजपूत करणी सेना) ने इस अवसर पर मार्गदर्शन करते कहा की , शिक्षा ही अब समाज का विकास कर सकती है! आज इस समारोह से संकल्प लेकर नशामुक्ति; स्री-भ्रूण हत्या; दहेज़ प्रथा का त्याग कर शिक्षा के प्रति नवयुवकों को बढ़ावा दे ! राजनीती की दीवारे गिराकर समाज के लिए हमें एक ही मंच पर आना चाहिए.....उन्होंने यह भी कहा की अब सर गिराने की नहीं अपितु सर गिनाने की सक्त जरुरत है! लोकतंत्र में मजबूत समाज-शक्ति का निर्माण ही राष्ट्र को सही दिशा दे सकता है!  सिरोही संस्थान के भूतपूर्व महाराजा श्री रघुवीरसिंह जी ने इतिहास के प्रेरक प्रसंग बताकर उपस्थित कार्यकर्ताओं को क्षात्र-धर्म के पुनर्जागरण का आवाहन किया! जौहर स्मृति संस्थान के अध्यक्ष श्री राज ऋषि उम्मेदसिंह जी धौली ने मेवाड़ी भाषा में भाषण कर उपस्थित लोगोंका दिल जीता! उन्होंने आज के युवाओं से समाज के लिए समर्पित होने की आवश्यकता जताई! ठाकुर श्री मनोहरसिंह जी कृष्णावत ने समाज कार्य के लिए हर एक घर से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिले और आगे आये तब ही हम गति से आगे बढ़ेंगे.....अपने आवेश से उन्होंने सभी को प्रेरित किया! इस समारोह का खास आकर्षण रहा कुमारी धनश्री चौहान का अभिभाषण....! अपनी मृदु वाणी से ...वीररस युक्त काव्य-पंक्तिओं के सहारे....स्री-भ्रूण हत्या, दहेज़, नशापानी आदि कुरीतिओं पर प्रकाश डालकर समाज का प्रबोधन किया.....साथ ही नारी-शक्ति को समाज में परिवर्तन लाने के लिए कटिबद्ध होने का आवाहन किया! श्री प्रदीप कुमार सिंह; श्री कुलदीपसिंह शामपुरा ,श्री सुरेन्द्रसिंह मोत्रास ; श्री भूपेंद्र चौहान, श्री सुरेन्द्रसिंह ; रावत श्री युग्प्रदिप सिंहजी हमीरगढ़; भा.ज.प्. के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री नाहरसिंह जोधा जी ने भी समारोह को संबोधित  किया! राजस्थान विधान सभा के पूर्व उपाध्यक्ष श्री देवेन्द्रसिंह जी बद्लियास जी के पोते श्री प्रदयुम्न सिंह बद्लियास ने संस्थान को एक लाख रुपये की राशी प्रदान की! इस अवसर पर उपस्थित युवा वर्ग ने उत्स्फूर्त रक्तदान कर ६५ यूनिट रक्त संकलित किया! समारोह में आये सभी महानुभावों के लिए विशाल भोज का भी सुन्दर आयोजन रहा! समारोह में समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तिओं का विशेष सन्मान किया गया! इस समारोह के लिए  मुख्य अतिथि हिज हायनेस महाराव श्री रघुवीरसिंह जी (सिरोही संस्थान), श्री राजपूत करणी सेना के शीर्ष संस्थापक- श्री ठा. लोकेन्द्रसिंह जी कालवी; राज ऋषि श्रीमान ठाकुर उम्मेदसिंह जी धौली(अध्यक्ष:जौहर स्मृति संस्थान, चित्तोड़) , समारोह के अध्यक्ष: श्रीमान सुरेन्द्रसिंह जी सिंगरौली(विधायक,मंडलगढ़ ),श्रीमान भैरूसिंह जी चौहान (पूर्व अध्यक्ष: जि.प.चित्तोड़), श्रीमान ठा. मनोहरसिंह जी कृष्णावत(भूपाल नोबल्स,उदयपुर), श्रीमान रावत युग्प्रदिप सिंघजी हमीरगढ़, श्री शक्तिसिंह जी कारोही; श्री प्रद्युम्न सिंहजी बदलियास; श्री गजराज सिंह जी हाथीपुरा; श्री.मेघसिंहजी ,श्री.भूपेंद्रसिंहजी चौहान, आगरा; विपक्ष नेता श्री कमलसिंह पुरावत, उपप्रधान श्री भोपालसिंह पुरावत; श्री नाहरसिंह जी जोधा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष:भारतीय जनता पार्टी) ;श्री जयपालसिंह गिरासे(शिरपुर); श्री. भंवर खंगारोत रेटा (जय राजपुताना) ;श्री जसवंतसिंह बावलास; श्री इन्द्रपाल सिंह करेडा; श्री जितेन्द्रसिंह कारंगा (प्रदेक्षाध्यक्ष:श्री राजपूत करणी सेना); श्री कुलदीपसिंह श्यामपुरा; श्री नरपतसिंह, श्री मनिराज सिंह, श्री सिकरवार,श्री परमार, श्री गहलोत, श्री धनसिंह जी,श्री मंगलसिंह जी,श्री संदीपसिंह जी आदि. उपस्थित थे! बहुत ही सुन्दर तरीके से समारोह का सञ्चालन अनिताकुंवर कृष्णावत बाईसा ,उदयपुर   ने किया! इस समारोह की यशस्विता के लिए रावत श्री युगप्रदिप सिंह जी हमीरगढ़; श्री हर्षप्रदीपसिंहजी हमीरगढ़; श्री कुलदीपसिंह जी श्यामपुरा,श्री विनोद पंडित  और राजपुताना युवा सेवा संस्थान के कार्यकर्ताओ ने परिश्रम लिए! अगले वर्ष यह समारोह करेडा गाव में आयोजित करने की श्री इन्द्रपाल सिंघजी ने उदघोशना की!

Oct 28, 2012

जातिय भावनाओं का राजनैतिक दोहन ना होने दे राजपूत समाज

देश की आजादी के बाद से सत्ता हासिल करने के लिए सभी राजनैतिक दल वोट प्राप्त करने हेतु विभिन्न जातियों की जातिय भावनाओं का दोहन करने में लगे है| और देश की सभी जातियां व सम्प्रदाय अपने छोटे-छोटे हितों के लिए राजनैतिक दलों द्वारा जातिय भावनाओं का दोहन करवाने में लगी है| इनमें कई जागरूक जातियां या समुदाय आसानी से राजनैतिक दलों को अपनी भावनाओं का दोहन नहीं करने देते बल्कि यूँ कहूँ कि भावनाओं के दोहन के बदले अपना पूरा तुष्टिकरण करवाते है| पर राजपूत समाज इस मामले में बहुत पीछे व उदार रहा कि जब जिसने चाहा राजपूतों की जातिय भावनाओं का दोहन कर उनके वोट हथिया लिए और बदले में उन्हें कुछ नहीं दिया|

राजपूतों के जातिय भावनाओं का राजनैतिक दोहन करने में राजस्थान के पूर्व राजघराने सबसे आगे रहे और राजनैतिक दलों ने भी चुनावों में वोटों के लिए जब भी राजपूतों की जातिय भावना के दोहन की जरुरत पड़ी तब उन्होंने किसी साधारण राजपूत को उम्मीदवार बनाने के बजाय पूर्व राजघराने के सदस्यों का ही साथ लिया और उन्हें ही आगे रखा| यही कारण रहा कि राजनीति में राजपूत समाज के लोगों की संख्या बहुत कम है| और राजपूतों का राजनीति में प्रतिनिधित्व पूर्व राजघरानों के सदस्य ही करते है जिनसे कभी किसी साधारण व आम राजपूत को कोई काम पड़ता है तो उसका उनसे काम निकलवाना तो दूर अपनी समस्या बताने के लिए उनके पास पहुंचना भी मुमकिन नहीं|

पिछले लोकसभा चुनावों में वोटों के लिए राजपूतों की जातिय भावनाओं का दोहन करने का जोधपुर में एक नायाब उदाहरण देखने को मिला| इस बार के लोकसभा चुनावों में परिसीमन के चलते जोधपुर लोकसभा क्षेत्र राजपूत बहुल हो गया| चूँकि भाजपा राजपूतों को अपना पारंपरिक वोट बैंक मानती है उसे पता है कि राजपूत कांग्रेस विरोधी है इस वजह से उनका भाजपा को वोट देना पक्का है और शायद भाजपा राजपूतों का भाजपा को वोट देने की मज़बूरी भी समझती हो, और यही मज़बूरी समझ उसने भाजपा के किसी राजपूत कार्यकर्ता या नेता को टिकट नहीं देकर जसवंत सिंह विश्नोई को उम्मीदवार बनाया ये सोचकर कि राजपूतों के पास तो उसे वोट देने के अलावा कोई रास्ता ही नहीं तो वो उनका ख्याल क्यों रखे ? चूँकि जोधपुर लोकसभा क्षेत्र मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह नगर है और वह सीट जीतना उनके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न था और वे जानते थे कि राजपूतों के वोट कांग्रेस के लिए जुटाना आसान नहीं है इसलिए उन्होंने भी वोटों के लिए राजपूतों की जातिय भावनाओं का दोहन करने के लिए जोधपुर राजघराने की बेटी और हिमाचल की पूर्व महारानी चंद्रेसकुमारी जी को लाकर चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार बना दिया और उनके खड़े होते ही जोधपुर के राजपूतों ने चुनाव में उनकी जीत को अपनी जातिय प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर उन्हें रिकार्ड मतों से जीता भी दिया पर यह करते उन्होंने यह नहीं सोचा कि इस चाल से अशोक गहलोत ने उनकी जातिय भावनाओं का दोहन लिया और क्या कभी अपने किसी कार्य के लिए वे चंद्रेसकुमारी से मिल भी पाएंगे ? यदि अशोक गहलोत वाकई राजपूतों के हितैषी होते तो चंद्रेसकुमारी की जगह किसी आम कांग्रेसी राजपूत कार्यकर्त्ता को उम्मीदवार बनाते जो समाज के बीच में रहता हो और कार्य करता हो| पर उन्हें राजपूत समाज के भले से कोई मतलब ना था उन्हें तो सिर्फ जातिय भावनाओं का दोहन कर जोधपुर लोकसभा सीट जीतनी थी जो पूर्व राजघराने को साथ मिलाकर जीत ली| ठगा गया तो आम राजपूत पर सिर्फ अपनी अदूरदर्शिता के चलते|
यदि समाज में थोड़ी भी दूरदर्शिता व राजनैतिक समझ होती तो कांग्रेस या भाजपा पर दबाव डालकर अपने किसी ऐसे उम्मीदवार को लोकसभा में भेजते जो समाज के बीच में रहता हो, समाज के दबे कुचले लोगों के लिए संघर्ष करता हो, आमजन के लिए कभी भी सहज उपलब्ध रहता हो, अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को समझता हो महसूस करता हो|

पर अफ़सोस राजपूत समाज बिना सोचे समझे अपनी जातिय भावनाओं का दोहन करा बैठता है|

Oct 15, 2012

राजपूत सामाजिक कार्यकर्ताओं की विचार-विमर्श बैठक

नई दिल्ली : दिनांक १४ अक्टूबर २०१२ को दिल्ली में भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक श्री लक्ष्मण सिंह जी राठौड़ के आवास पर राजपूत समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सामाजिक कार्य करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक विचार-विमर्श बैठक संपन्न हुई| इस बैठक में उपस्थित सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जो अलग-अलग कार्य क्षेत्रों में अकेले व्यक्तिगत तौर पर राजपूत समाज के उत्थान के लिए कार्य कर रहें है एक साथ मिलकर कार्य करने की संभावनाओं व इसके लिए एक कार्य प्रणाली पर विमर्श किया गया|

बैठक में कुंवर राजेंद्र सिंह जी नरूका ने एक साथ मिलकर कार्य करने हेतु एक कार्य-प्रणाली की रूप रेखा समझाते हुए इसके लिए सभी से एक धरातल तैयार करने की जरुरत बताई और दो वर्ष की एक समय सीमा भी तय की| ध्यान रहे श्री नरूका जी क्षत्रिय विचारधारा वाले एक वृहद व शक्तिशाली संगठन बनाने का धरातल बनाने में जी-जान से जुटे है एक ऐसा संगठन जिसमें भाषण-बाजी न होकर क्षत्रिय समाज के कल्याण के लिए ठोस धरातलीय कार्य हो सकें|

निर्यात व्यवसायी श्री महेंद्र सिंह जी राठौड़ ने क्षत्रिय समाज के सामाजिक कल्याण हेतु अपनी अध्यक्षता वाले एनजीओ “विकास” की सेवाओं की पेशकश की| श्री महेंद्र सिंह जी उपस्थित सभी क्षत्रिय बंधुओं से कहा कि वे अपने अपने क्षेत्र में एनजीओ “विकास” की शाखा खोलकर सामाजिक विकास कार्यों में एनजीओ “विकास” के संसाधनों का उपयोग कर सकते है|

बैठक में श्री लक्ष्मण सिंह जी राठौड़ ने उपस्थित कार्यकर्ताओं से सामाजिक कार्यों की गति बढाने व भाषण-बाजी से मुक्त धरातल पर ठोस कार्य करने का अनुरोध करते हुए सामाजिक चेतना बढाने हेतु एक पत्र-पत्रिका के प्रकाशन की जरुरत बताई| ताकि उसके माध्यम से क्षत्रिय विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया जा सके| जो इस समाज के लिय ही नहीं देश के विकास के लिए भी जरुरी है|

सामाजिक चेतना लाने व समाज के बंधुओं को जोड़ने के लिए इस तरह के एक पत्र के प्रकाशन की संभावनाओं व उसकी क्रियान्विति हेतु कार्य शुरू करने की जिम्मेदारी ज्ञान दर्पण.कॉम व राजपूत मेट्रिमोनियल.इन वेब साईट के संचालक श्री रतन सिंह शेखावत,भगतपुरा को दी गयी| ज्ञात हो श्री रतन सिंह,भगतपुरा ज्ञान दर्पण.कॉम व राजपूत वर्ल्ड ब्लॉग पर अपनी लेखनी के माध्यम में सामाजिक चेतना जगाने के प्रयासों व क्षत्रिय समाज की नई पीढ़ी को अपने गौरवमयी इतिहास की संक्षिप्त जानकारी इन्टरनेट के माध्यम से देने हेतु पिछले कई वर्षों से जुटे है|
इस चिंतन बैठक में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के दिव्येंदु प्रताप सिंह, सोफ्टवेयर इंजीनियर विक्रम नागवंशी, सुरक्षा एजेंसी संचालक श्री गणपत सिंह जी राठौड़ व शिक्षाविद श्री नरूका जी आदि ने भाग लिया|
बैठक में उपस्थित सभी श्री रतन सिंह शेखावत की इस बात से सहमत थे कि आम राजपूत को न्याय दिलाने के लिए राजपूत करणी सेना की कार्य पद्धति को अपनाया जाय| ताकि छोटे-छोटे मामलों में भी किसी राजपूत का कहीं उत्पीडन करने की प्रशासन व अन्य लोगों की हिम्मत ना हो सके|
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Aug 9, 2012

लोकतंत्र का मर्म समझें क्षत्रिय : सत्ता के लिए सिर कटवाने की बात नहीं सिर्फ गिनवाने की बात पर ध्यान दें

एक समय था जब राज्य सत्ता प्राप्ति के लिए सिर काटने पड़ते थे और कटवाने पड़ते थे| बिना बलिदान दिए न तो राज्य मिलता था और ना ही सुरक्षित रहता था| पर आज जमाना बदल गया है आज सत्ता प्राप्ति के लिए सिर कटवाने नहीं मात्र गिनवाने पड़ते है|यही कारण है कि जब सिर कटवाने पर सत्ता मिला करती थी उस वक्त सत्ता से दूर रहने वाली जातियां जो सिर कटवाकर सत्ता हासिल करने के बजाय घर में बैठकर या सत्ताधारियों की सेवा करना सत्ता प्राप्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण समझती थी| वे आज सिर गिनवाकर सत्ता में भागीदार बनी हुई है| क्योंकि लोकतंत्र में सिर गिनवाने के महत्व को उन्होंने बखूबी समझा है, पर सिर कटवाकर सत्ता हासिल करने वाली वीर जाति "क्षत्रिय" लोकतांत्रिक प्रणाली में सिर गिनवाकर आसानी से सत्ता प्राप्त करने जैसे आसान मर्म को समझ नहीं पाई और आज बड़ी आसानी से मिलने वाली सत्ता से दूर है|

यदि आपको मेरी इस बात पर कि -"सत्ता सिर गिनवाने पर मिलती है" भरोसा ना हो तो निम्न उदाहरण आपके सामने है जिन्हें पढकर आपको भी मेरी यह बात सही लगेगी कि -आजकल सत्ता सिर्फ गिनवाने यानी लामबंद होकर वोट देने पर ही हासिल होती है-
1- आज दलितों व पिछडों को जो आरक्षण दिया हुआ है उससे देश का हर वर्ग दुखी है पर इसे हटाने का कार्य तो सरकार ही कर सकती है| पर चूँकि दलित व पिछड़े लामबंद होकर उसी राजनैतिक दल के पक्ष में सिर गिनवाते है मतलब वोट देते है जो राजनैतिक दल उनके जातिय हितों की रक्षा करें| अब जो दल या सरकार ये जाति-आधारित आरक्षण बंद करने की बात सोचते है तो डर जाते कि ऐसा करने से दलित व पिछड़े नाराज हो जायेंगे और हमें तो वोट देंगे नहीं बदले में विपक्ष को वोट दे देंगे इससे वे सत्ता से बेदखल हो जायेंगे| अब ऐसा रिस्क कौन ले ?
मतलब साफ जाहिर है दलितों व पिछडों ने लोकतंत्र में सिर गिनवाने वाली महिमा को बड़ी अच्छी तरह समझा और उसका फायदा उठा राज कर रहे है| आज हर सरकारी नौकरियों में उनके लिए तो दरवाजे खुलें ही है चाहे उनमे योग्यता हो या ना हों| और यही नहीं कुछ स्वघोषित दलित नेता चाहे किसी दल की सरकार हो उसमे मंत्री पद पा ही जाते है महज इस योग्यता पर कि वे दलित है,पिछड़े है|

2-अब मुसलमानों का उदाहरण ले लीजिए| वे भी लामबंद होकर किसी एक के पक्ष में चुनावों में सिर गिनवाते है और जिस दल को उनके वोट चाहिए वो सरकार बनने के बाद उनके तुष्टिकरण करने का पुरा ध्यान रखता है| इसका उदाहरण आप आजादी के बाद से ही देख रहे है कि किस तरह कांग्रेस सरकार इनका तुष्टीकरण करती आ रही है यही नहीं कई मामले ऐसे भी आये है कि कांग्रेस ने इस वोट बैंक की खातिर देशहित को भी परे किया है| इनके तुष्टीकरण की खातिर देश के कानून तक बदलें गए है| ताजा उदाहरण आप मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी का देख सकते है कि किस तरह वह मुस्लिम वोट बैंक के लिए उनका तुष्टीकरण करने में लगी है|
कहने का मतलब साफ है मुस्लमान भारत में अल्पसंख्यक है फिर भी वे सरकारों व राजनैतिक दलों से जो चाहे पा लेते है, किसी भी सरकार को झुकाने का माद्दा रखते है वह भी सिर्फ सिर गिनवाने की कला के पीछे|
मतलब साफ़ है मुसलमानों ने भी लोकतंत्र की इस सिर गिनवाने वाली खास बात का मर्म समझ लिया और वे कम होने के बावजूद वो सब पा जाते है, जो वे चाहते है कोई भी दल उनकी उपेक्षा नहीं कर सकता|

3- जाटों ने भी लोकतंत्र की इस सिर गिनवाने वाली बात को बड़ी बखूबी समझा और चुनावों में लामबंद हो वोट डालने शुरू किये उनके थोक वोट देखकर लगभग सभी राजनैतिक दलों ने चुनावों में जाट प्रत्याशी उतारने शुरू किये और वे अपने स्वजातीय द्वारा लामबंद होकर दिए वोटों से जीत कर सत्ता के भागीदार बने| यही नहीं राजस्थान के जाटों ने अपनी इसी लामबंदी का फायदा आरक्षण की सुविधा पाने में किया| उनके वोट बैंक को देखते हुए सरकार ने उनकी आरक्षण में शामिल करने की मांग मान ली| अब राजस्थान में कोई सरकारी कार्यालय ऐसा नहीं जहाँ जाट कर्मचारी नहीं|
और जाटों ने ये सब पाया लोकतंत्र में सत्ता के लिए सिर गिनवाने वाले आसान उपाय को अपनाकर| तो क्षत्रिय भाइयो उपरोक्त उदाहरण पढकर जो आपके सामने प्रत्यक्ष भी है आपको भी लोकतंत्र में सिर गिनवाकर सत्ता हासिल करने की महिमा के बारे में समझ आया होगा| अब जब सिर्फ सिर गिनवाने से सत्ता हासिल हो सकती है तो सिर कटवाने की बातें करने की क्या जरुरत ?

लोकतंत्र के इस मर्म को समझिए और लामबंद हो एक जबरदस्त वोट बैंक में अपने आपको तब्दील कर दीजिए कि सारे राजनैतिक दल आपके आगे पीछे हाथ जोड़कर भागे फिरें और आप उनसे देशहित में जो करवाना हो वो अपनी मर्जी से करवाएं| पर इसके लिए जरुरी है क्षत्रिय एकता| हम सब एक होकर, अपनी एकता के बल पर फिर अपना खोया गौरव पा सकते है| हमें यह एकता स्व-कल्याण और देशहित को ध्यान में रखकर ही करनी है न कि किसी अन्य जाति के खिलाफ| वैसे भी कोई भी क्षत्रिय अपने जन्म-जात संस्कारों के चलते दूसरी किसी जाति का बुरा सोच भी नहीं सकता| इतिहास गवाह है कि वे क्षत्रिय ही थे जिन्होंने सभी वर्गों,धर्मों के लोगों को साथ रखा|
नोट: आजतक जातिय व्यवस्था में मेरा भरोसा सिर्फ इतना ही था कि- जाति की बात सिर्फ शादी-ब्याह व अपनी रिश्तेदारी तक ही सीमित रखनी चाहिए|
पर सरकार व राजनैतिक दलों ने जिस प्रकार जातियों व संप्रदायों को उनके लामबंद होकर वोट देने के हिसाब से सुविधाएँ व विशेषाधिकार देकर जातिवाद को बढ़ावा दिया है मतलब जातिवादी व्यस्था को सुदृढ़ किया है ऐसे में जातिवाद से दूर रहने वाले लोगों के लिए जीना दुष्कर होता जा रहा है | जब सरकार ही जातिय आधार पर हमारा वर्गीकरण कर रही है तो हमें जातिवादी सोच रखने में बुराई क्यों लगे?

Jun 14, 2012

आखिर कब तक हम

आखिर कब तक हम अपने पूर्वजों द्वारा,
रोपित फसल ही खाते रहेंगे,
आखिर कब तक हम उनके अच्छे कार्यों की,
बस जय जय कार लगते रहेंगे,

महाराणा ,पृथ्वी,कुंवर सिंह, और बहुत से बड़े हैं नाम,
देश और कौम की खातिर,त्याग दिए जिन्होंने प्राण,
हाँ, उनकी जय जय कार लगाने में है हम सबकी शान,
पर आज का ये युग अब फिर मांग रहा हमसे बलिदान,

आखिर कब तक आपस में लड़ लड़ कर ,
अपना सम्मान लुटवाते रहेंगे,
आखिर कब तक हम आपसी फूट के कारण,
अपना सर्वस्व गंवाते रहेंगे,,

अब तो जागो मेरे रणबांकुरों,तुम ऐसा कुछ कर जाओ,
उनकी जय जय कार करो,अपनी भी जय करवाओ,
जैसे हम उनके वंशज करते सम्मान से उनको याद,
उसी तरह सम्मान करें हमारा, सब इस जग से जाने के बाद ,

हम सब मिलकर ''अमित'' कर जाएँ ऐसा कारनामा,
जिस से सारे गर्व से बोलें ''जय जय वीर राजपूताना''
Written by- Kunwar Amit Singh

Jun 6, 2012

महाराणा प्रताप भवन, दिल्ली

समस्त भारत के क्षत्रियों (राजपूतों) में अनेकों संगठन आजादी के बाद से एक सपना अपने हृदय में संजोये हुए थे की दिल्ली में एक विशाल राजपूत भवन बने, जिससे देश के सभी प्रान्तों के क्षत्रिय ससम्मान एक रात्री उसकी छत के नीचे बीता सके| सभी के हृदयों की इस भावना को ध्यान में रखकर राजपूतों के स्वाभिमान, गौरव एवं आवश्यकता को ध्यान में रखकर अखिल भारतीय राजपूत विकास समिति (पंजी.) ने इस स्वप्न को साकार करने का बीड़ा उठाया और अपने सिमित साधनों से लगभग छ: सौ वर्ग गज जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण, दिल्ली से नकद खरीदकर, इस भवन का निर्माण प्रारंभ किया| सर्व-सम्मति से इस भवन का नाम राजपूत बिरादरी के सपूत, कुल गौरव, युद्ध कौशल के धनी, स्वाभिमान के परिचायक, शूरवीर "महाराणा प्रताप" के नाम पर रखा गया| इस भवन की योजना निम्नलिखित है :-

१- भूतल : विशाल सभागार, ठाकुर जी का मंदिर, ध्यान मनन कक्ष, केयर टेकर कक्ष एवं जन सुविधाएँ|

२- प्रथम तल : अद्भुत हॉल, कार्यालय, कांफ्रेंस कक्ष, राजपूत इतिहास शोध संस्थान, पुस्तकालय, वाचनालय एवं जनसुविधाएं|

३- द्वितीय तल : १२ शयन कक्ष (डीलक्स- एसी, सेमी डीलक्स, साधारण डोरमेट्री), विशिष्ट अतिथि कक्ष, सब सुविधाओं सहित, विवाह प्रकोष्ट, रसोईघर, भंडार एवं अन्य सुविधाएँ |

४- तृतीय तल : विशेष योजना कक्ष तथा को-ओपरेटिव सोसाइटी, सूचना केंद्र, विद्यार्थी ट्रेनिंग केंद्र, रोजगार सूचना केंद्र, डिस्पेंसरी,प्रादेशिक जन संपर्क विभाग एवं निशुल्क सलाह ब्यूरो आदि(निर्माणाधीन)

इस भवन के सामने ग्राउंड में एक अष्ट धातु से बनी विशाल महाराणा प्रताप की प्रतिमा, वर्ष २००५ में लगाईं गयी थी तथा इस चौक का नाम चेतक चौक रखा गया है जो संस्था की विशेष उपलब्धि है| वर्तमान में महाराणा प्रताप भवन का भूतल,प्रथम तल व द्वितीय तल बनकर तैयार है जो समाज की समाज की सेवा में समर्पित है|

समस्त क्षत्रिय बंधुओं से अपील है की आप जब भी भी दिल्ली पधारें, इस भवन में अपने चरण डालकर हमें दर्शन देकर कृतार्थ करें| यह संस्था पूर्णत: सामाजिक है जो क्षत्रियों के आर्थिक, सामाजिक, शारीरिक, शैक्षणिक, राजनैतिक विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रही है| महाराणा प्रताप भवन में क्षत्रिय बंधुओं के सामूहिक दिल्ली भ्रमण करने, रहने-ठहरने, संस्थागत सम्मेलन, बैठक, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए निशुल्क व्यवस्था है|
पता : अखिल भारतीय राजपूत विकास समिति (पंजी.) महाराणा प्रताप भवन, चेतक चौक ब्लाक- बी, लारेंस रोड, दिल्ली- 35 दूरभाष : 011-27180149

Mar 25, 2012

हमीरगढ़ की यादगार सफ़र.....!




         रोज की भाग-दौड़ की जिंदगी से कुछ पल या दिन अगर कही पसंदीदा जगह पर जाकर बिताने का सुनहरा अवसर मिलता हो तो ''ना'' कौन कहेगा..? लोग ''सफ़र'' के लिए जाते है.....सफ़र के मजे भी लेते है......तरीका और सोच अलग-अलग होती है ...हर सफ़र जिंदगी का एक यादगार लम्हा भी बन जाती है...! सफ़र हमें भी बेहद पसंद है और आज-तक की जिंदगी इस देश के विभिन्न जगहों पर घुमते ही बीती हुई है! लेकिन हर सफ़र का कही कोई ना कोई उद्देश जरुर रहा है! कोलेज के दिनों छात्र आन्दोलन से जुड़े रहने से ऐसे अवसर प्राप्त होते थे! अधिवेशन अगर प्रयाग में होता था तो उत्तर प्रदेश के कई धार्मिक,प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक स्थल के जरुर दर्शन हो जाते थे! देश के विभिन्न कोने में जाने के कई सुनहरे अवसर हमें इस बहाने से भी मिले! कभी छुट्टी के दिनों किसी भी पसंदीदा स्थल की यात्रा का आयोजन हो जाता था! रेल के सफ़र का मजा कुछ और ही मिलता था! केवल पचीस साल की उम्र में ही भारत के चार धाम में से दो , सप्त नदिया ,बारह में से नौ ज्योतिर्लिंग के दर्शन , सात राज्य की सफ़र हम ने पूरी कर दी थी! इतिहास में विशेष रूचि होने से और संशोधन कार्य के बहाने राजस्थान और देश के अन्य प्रान्तों की ऐतिहासिक धरोहर का सफ़र करने का मौका कई बार मिला! संघटन के कार्य --विस्तार हेतु भी कई जगह हम आज-तक पहुच पाए!

      हमीरगढ़ की यात्रा भी बड़ी सुन्दर और चिर-स्मरणीय रहेगी! शब्दों में इसका वर्णन कर इस यात्रा के अनुभव एवं आनंद को सिमित नहीं किया जा सकता ! राव श्री युगप्रदिप सिंहजी हमीरगढ़ जी और श्री विनोद पंडित जी के निमंत्रण से हम ने हमीरगढ़ की यात्रा का कार्यक्रम बनाया! साथी कुंवर अतुलसिंह, कुंवर अमितसिंह,कुवर संदीपसिंह और कुंवर विश्वजीत सिंह भी इस यात्रा में हमारे साथ शरीक हुए! इंडिका गाड़ी से हमारी यात्रा शिरपुर से दोपहर ठीक बजे से शुरू हुई ....सेंधवा,धामनोद,धार,नागदा,रतलाम,नीमच,मंदसौर से गुजरते हुए ठीक रात के बजे हम वीरभूमि चित्तोड़ पहुचे....वहा पूर्व नियोजन के अनुसार हम सबने विश्राम किया! प्रात: वीरभूमि चित्तोडगढ की प्राचीर से उगते सूर्यनारायण जी का दर्शन कर हम ने ठिकाना हमीरगढ़ की और प्रस्थान किया! महाराज सा राव श्री जी के निर्देश के अनुसार आदरणीय श्री विनोद जी हाय-वे पर हमारी प्रतीक्षा कर रहे थे! उन्हें साथ लेकर हमारी गाड़ी हमीरगढ़ की और चल दी! सिसोदिया परिवार के रणबांकुरे ठाकुरों की इस पवित्र धरती को प्रणाम कर .....प्रात:स्मरणीय महाराणा प्रताप सिंहजी के तृतीय बंधू वीर श्री विरमदेव जी को कृतज्ञता की भावना से याद कर.....उन्ही के वंशजो की इस धरती को वंदन करने हम और हमारे साथी जा रहे थे.....मन में विलक्षण उल्हास और हर्ष की भावना पनप रही थी ......जैसे ही गाड़ी रफ़्तार से दौड़ रही थी हमारा मन इतिहास की गलियों में ;गौरवशाली विरासत की वादियों में खो रहा था! मध्ययुगीन काल का "भाखरौल'' ठिकाना जो महाराणा हमीर जी की याद में आज हमीरगढ़ नाम से जाना जाता है! हमीरगढ़ मेवाड़ के १६ उमराव और ३२ ठिकानों में से एक है! विरमदेव के वंशज होने से वे विरमदेवोत कहलाते है! वीर श्री विरमदेव जिन्होंने मुग़ल बादशाह अकबर के खिलाफ चल रहे स्वतंत्रता रणसंग्राम के कठिन समय में महाराणा के परिवार और वंशजो की रक्षा की थी! श्री विरमदेव जी के कंधोंपर यह जिम्मेदारी रख महाराणा शत्रु से दो हाथ कर रहे थे! विरमदेव जी के वही वंशज कई पीढ़ियों तक चित्तोड़ की किलेदारी भी निभाते रहे! सन १७६६ में भाखरौल की स्थापना हुई थी! सन १८२३ में इस कसबे का महाराणा हमीरसिंह ( द्वितीय ) के नाम से हमीरगढ़ रखा गया था ! राव धीरत सिंहजी हमीरगढ़ के संस्थापक थे! जिन्हें मेवाड़ राज्य में फासी की सजा देने का अधिकार; ८४ गावों की जागीरी(जो आखरी दौर में १२ गाव तक सिमित हो गयी थी) ; गढ़ चित्तोड़ की किलेदारी एवं क्षेत्र में सैनिकी तथा न्यायिक अधिकार बहाल किया गया था! हमीरगढ़ की जागीर में सेंकडो एकड़ जमीं अस्पताल;स्कुल;धर्मशाला,मकान;कचहरी बनाने .....खेती करने हेतु श्री राव सा ने दान में दी है! आज भी उनकी हवेलियों में दो स्कुल चल रही है! अपने निजी खर्चे से वे एक भव्य गोशाल भी बनवा रहे है! विद्वान्, गो-ब्राह्मन का सन्मान वहा नित्य होता आया है! इलाखे के कई मंदिरों को उन्होंने आश्रय भी दिया है!  वर्तमान में भी २५० प्लाट गरीब लोगों को मकान बनवाने दान में दिए गए है! आधा गाव तो उन्ही का ही है! उनके पिताश्री स्वर्गीय राव श्री मानसिंह जी ने किसी किसान को डेढ़ एकड़ जमीं दान में दे दी थी......आज राव सा को वही जमीं औद्योगिक कार्य के लिए जरुरी थी! वह किसान विनम्रता से अपनी ज़मीन लौटने को तैयार था....लेकिन अपने वचन पर अडिग रहते हुए राव साहब ने आज के बाजार भाव के अनुसार उचित मूल्य देकर वह ज़मीन फिर से स्वीकृत की! राव साहब के इस आचरण से फिर से एकबार वह महान क्षत्रिय परंपरा पुनरुज्जीवित हुई!

    आज वही गौरवशाली विरासत के रखवाले परिवार को ......श्री विरमदेव जी के वंशजो से मिलने हम जा रहे थे! जैसे ही गाव को प्रारंभ हुवा , हमारा ध्यान समाप्त हुवा और हम वास्तव में पहुंचे.....श्री विनोद जी हमें हमीरगढ़ गाव के बारे में बताते जा रहे थे.....हमारे साथी सुनते जा रहे थे....उनके हर एक शब्द को अपनी स्मृति में संरक्षित करते जा रहे थे! अब हमीरगढ़ के महलों के पास गाड़ी पहुच गयी .....प्राचीन ऐतिहासिक द्वार से हम ने अन्दर की और प्रवेश किया....महल के बाहर ही छोटे बन्ना श्री हर्षप्रदिप सिंहजी(राव श्री हमीरगढ़ जी के छोटे भाई) अपने साथियों के साथ हमारी प्रतीक्षा कर रहे थे! सुहास्य-वदन से फूलमालाए पहनाकर उन्होंने हम सबका स्वागत किया.....हमीरगढ़ ठिकाने की आतिथ्यशिलता का एक सुन्दर और शानदार दर्शन हुवा! दरिखाने में हमारी पहली बैठक हुयी.....जहा यात्रा के बारे में चर्चा हुई.....बाद में राव श्री युगप्रदिप सिंहजी का दरिखाने में आगमन हुवा..... राव श्री युग प्रदीप सिंहजी एक विलक्षण प्रभावशाली व्यक्तित्व है! पहली नजर में ही उन्हें देखकर हर कोई प्रभावित हो जाता है! ऊँचा कद, रोबदार मुछे, और किसी मल्ल की तरह शरीर...! जन्म नाम भरतसिंह था...लेकिन पिताश्री स्व.रावत मानसिंह जी के कहने पर उनका शुभ नाम युग प्रदीप सिंह रखा गया था!

    उनके साथ वार्तालाप एवं अल्पाहार का सौभाग्य प्राप्त हुवा! शिरपुर शहर एवं अन्य जगहों पर हुए विभिन्न समारोह/आन्दोलन/सामाजिक उपक्रम के बारे में उन्होंने बड़े रूचि के साथ चर्चा की! राष्ट्रीय आन्दोलन एवं संघटन की रुपरेखा के बारे में भी चर्चा हुई! राव साहब के साथ कई विषयों पर चर्चा हुई!

    राजपरिवार में जन्म लेकर.....इतनी बड़ी विरासत पाकर भी एक विलक्षण सादगी,विनयशीलता,विनम्रता की झलक हमें उनके व्यक्तित्व में मिल रही थी! इसी दौरान हमीरगढ़ ठिकानो में सम्मिलित विभिन्न गावों से वहा के ग्रामीण विवाह के निमंत्रण देने दरिखाने रहे थे ...स्वयं राव साहब उन ग्रामिनोंका विनय के साथ स्वागत कर रहे थे...उनका मुजरा ,नजराना और विवाह के निमंत्रण का स्वीकार कर रहे थे.....उन सबको नाश्ता और चाय का आग्रह भी कर रहे थे!

     आज उन्हें देर रात तक कई जगहों पर जाकर विभिन्न विवाह समारोह में सम्मिलित भी होना था! अपने खास आदमियों को निर्देश देकर हमसे विदा होकर वे चल दिए.......बाद में मनोनीत नियोजन एवं राज शिष्टाचार के अनुसार श्री विनोद जी साथ ठिकाना हमीरगढ़ की गाड़ी से माँ चामुंडा के दर्शन के लिए हम चल पड़े! गाव के बाहर जंगल में एक ऊँचे पर्वत पर बना हुवा यह ऐतिहासिक मन्दिर इस नगरी का खास आकर्षण है! श्री विनोद जी ने मंदिर के इतिहास के बारे में परिचय दिया! माँ चामुंडा के दर्शन से ह्रदय में एक पवित्र सी लहर दौड़ने का आभास हुवा! श्री विनोद ने मंदिर के पुजारी जी को हमारा परिचय दिया....उन्होंने भी मंदिर प्रशासन की और से हम सबका स्वागत किया और आशीर्वाद भी दिया! वहा से हमारा काफिला बोरडा ग्राम की और निकल पड़ा जहाँ महाराज श्री किर्तिवर्धन सिंहजी राणावत जी के विवाह के शुभ अवसर पर मनुहार की रस्म थी ! गाव के बाहर मैदान में एक विशाल पेंडोल लगा हुवा था! समारोह के यजमान एवं बोरडा का शेखावत परिवार आतिथ्य की वर्षा कर रहे थे.....! पेंडोल के एक कोने में बने मंच पर पारंपरिक एवं आधुनिक संगीत की धुन पर सुन्दर नर्तकियां अपने विलोभनीय पदन्यास से उपस्थित अतिथियोंका मनोरंजन कर रही थी.....मनुहार के प्यालो से भरे टेबल विशेष आतिथ्य कर रहे थे! जहाँ सुन्दर तरीके से रखे हुए मदिरसव के विभिन्न प्रकार इस वातावरण की गरिमा और भी बढ़ा रहे थे! रजवाड़ों के इस समारोह में भी विलक्षण विनम्रता एवं आतिथ्यशिलता हर एक चेहरे पर छाई हुई थी! जोधपुरी,जयपुरी,मेवाड़ी, मारवाड़ी पगड़िया और राजपूती पोशाख वातावरण की शोभा बढ़ा रहे थे ....चारो ओर इत्र और फूलों की खुशबु.......मधुर संगीत की धुन.... मंडरा रही थी! हमीरगढ़ राव श्री युगप्रदिप सिंहजी मंडप में उपस्थित अतिथियों से मिल रहे थे....सब से हमारा परिचय भी करवा रहे थे! जिनमे कई बड़े अफसर, राजनेता एवं विभिन्न ठिकानों के ठाकुर ,रजवाड़े थे ! उन्ही में से राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस नेता , भूतपूर्व कृषि मंत्री एवं राजस्थान विधान सभा के पूर्व उपाध्यक्ष श्री देवेन्द्रसिंह जी बद्लियास जी भी थे जिन्होंने विशेष आस्था से बातचीत कर हमें और भी प्रभावित कर दिया ! महाराष्ट्र के सामाजिक रीतिरिवाजों के प्रति , समाज के प्रति विशेष आस्था से वार्तालाप कर रहे थे! वहा से श्री राव साहब अन्य जगहों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करने हम से विदा लेकर चल दिए !उन्हें अपने जागीर के गावों में होनेवाली हर एक शादी में उपस्थिति दर्ज करना जरुरी होता है! भगवन गणेश जी के आशीर्वाद के बाद विरम देवोत राव का आशीर्वाद वहा मूल्यवान माना जाता है!मेवाड़ घराने का जनाना जब भी कभी बाहर जाता था तब विरम देवोत राव या उनके घराने से कोई भी व्यक्ति जब तक डोली के पास नहीं जाते थे तब-तक मेवाड़ की रानी या राजकुमारी डोली के बहार अपना कदम नहीं रखती थी! कितना अटूट है यह विश्वास....जो महाराणा प्रताप जी के समय से भाई विरम देवोत के वंशज निभाते आये है ! कैसा है यह अनोखा सन्मान....! वहा मनुहार का प्याला और खाना खाकर सबसे विदा होकर विश्राम के लिए निकले! फिर शुरू हुई चित्तोड़ की यात्रा..... जहाँ हमारी कुलस्वामिनी बाण माता जी का दर्शन जो करना था! ठिकाना हमीरगढ़ की गाड़ी को देख लोग विनय के साथ खम्मा घन्नी कर रहे थे! जनता के ह्रदय में हमीरगढ़ राव के प्रति विशेष आस्था और आदर है.....प्रेम और लगाव है....जो हम स्वयं अनुभव कर रहे थे......! किसी मंत्री को भी इतना सन्मान नहीं मिलता जो जनता हमीरगढ़ राव को देती है!

         चित्तोड़ से हम हमीरगढ़  की और वापस आये ! वहां से खुली जिप में बैठकर रात्रि के विश्राम के लिए ऊँची चोटी पर स्थित हमीरगढ़ किले पर गए! वहा श्री राजमाता माईसा आनंद्कुंवर बा जी और महाराणी सौ. दिव्यकुंवर बाईसा जी का दर्शन हुवा! राजमाता जी सिरोही के झाला परिवार से है और महाराणी सा आगरिया के राठोड परिवार से ! आप के विनयशीलता ने हमें और भी प्रभावित कर दिया! राजकुमारी पयेश्वरी कुमारी और लावन्यप्रिया कुमारी अपनी मधुर मुस्कान लिए वहा खेल-कूद में व्यग्र थे! किले से राजपरिवार महलों की और चला गया! अब किले पर बाकि थे हम, हमारे साथी, श्री विनोद पंडित जी, श्री देवीलाल पुरोहित जी, श्री गोपालसिंह, श्री महेंद्रसिंह दरोगा, श्री रणजीतसिंह राठोड, श्री फिरोज मुह्हमद डायर, श्री भेरुलाल वैष्णव, श्री बाबूसिंह आदि ! यह सब साथी सभी कार्यों में एवं कृतियों में विशेष रूप से प्रवीण है और रात-दिन साये की तरह श्री राव हमीरगढ़ की सेवा में उपस्थित रहती है! जो हमेशा साथ रहते है तो उन्हें "साथी'' शब्द से पुकारना ही सार्थ और यथार्थ सिद्द होगा!

     रात के अँधेरे में हम किले का सफ़र कर रहे थे! श्री विनोद पंडित जी हमें किले के हर अंगों का परिचय दे रहे थे! किले के अन्दर राव साहब की एक घोड़ी है! जो किले के भीतर मुक्त रूप से घुमती है! अगर कोई उसके सामने गया तो उसकी खैर नहीं! विलक्षण तेज है यह घोड़ी! पुरोहित बनना के इशारों को बखूबी समझती है! वहा श्री राव साहब की एक कुत्तिया भी मौजूद रहती है जिसका नाम है ''सूजी'' जो ग्रेट दें प्रजाति की क्रोस -ब्रीड है! किले के अंतर्द्वार से हम सबसे पहले पुरोहित देवीलाल जी अन्दर गए और उन्होंने उस अबलख घोड़ी का लगाम अपने हाथों में ले लिया! उसे बांध दिया गया फिर हम अन्दर की और टहलने लगे! इतिहास के झरोखे के बाहर जाकर भी कई चर्चाये हुई! किले पर रोमांचक सफ़र का अनुभव कर हम किलेपर बने रहे नविन महलों की और गए जहा हमारा रात का खाना एवं विश्राम तय था! हम सबने रात का खाना खाया! फिर एक बुर्ज पर कुर्सिय राखी गयी जहाँ देर रात तक हमारी चर्चाये जारी रही! देर रात श्री राव हमीरगढ़ जी किसी देहात से वापस लौट आये ....वे अपने महलों में जाकर सीधे किले पर गए.....वहा हम फिर बातचीत करने बैठ गए! हम सुबह जल्दी लौटने वाले है तो चर्चा करने के लिए वे थके होने के बावजूद भी किले पर गए थे! वे भी हमारे साथ किले पर बने महल में ही सो गए!

     प्रात: दूर के मंदिर की घंटी बज रही थी! महाशिवरात्रि का दिन था! भगवन एकलिंग जी का नामस्मरण कर हम तैयार हो गए! एक बार फिर श्री राव हमीरगढ़ के साथ विशेष वार्तालाप को प्रारंभ हुवा....जिस वार्तालाप में श्री राव साहब जी ने हमें हमीरगढ़ के भुत, वर्तमान तथा भविष्यत् के बारे में जानकारी दी! हमारे विभिन्न कार्यक्रमों के अल्बम देखकर वे प्रभावित हो गए! शिरपुर आकर हमारे कार्यक्रम में जरुर उपस्थित रहने की इच्छा भी उन्होंने प्रकट की! भविष्य में सामाजिक संघटन के माध्यम से रचनात्मक समाज के नवनिर्माण के लिए अपने अनमोल विचारों के साथ हमें मार्गदर्शन भी किया तथा इस नेक कार्य के लिए अपने आशीर्वाद के साथ सहयोग का भी वादा किया! श्री राव साहब हमीरगढ़ वन सुरक्षा समिती के अध्यक्ष भी है! उन्ही की पहल से १०० हिरन हमीरगढ़ संक्चुरी में छोड़े गए है! आगे चल कर यह संक्चुरी विकसित हो और देश-विदेश के यात्री वहा की सफ़र का आनंद प्राप्त करे यह उनका सपना है! जिसे पूरा करने के लिए वे निरंतर कोशिश भी कर रहे है! उन्होंने हमें वहा के जंगल की भी सफ़र करवाई ! बाद में हमीरगढ़ संस्थान के विभिन्न हथियार भी हम ने देखे...! छोटे बन्ना सा जी ने हमें विभिन्न हथियारों का परिचय भी दिया! सामंती राजपरिवार में जन्म लेकर भी किसी आम नागरिक की तरह वे अपने कम में व्यग्र रहते है! निरंतर दूर-दूर के गावों की यात्राओं के, समारोह की व्यस्तता के बावजूद भी अपने कारोबार---खेती के लिए भी वक्त निकाल लेते है! पुरखों से प्राप्त विरासत में मिले महल और किले पर हेरिटेज पार्क बनाकर वहा देश-विदेश के टूरिस्ट को आकर्षित करने की भी उनकी योजना है! एन.जी. संस्था के द्वारा वे अपने जागीर के गावों के गरीब परिवार, बालक एवं महिलाओं के लिए विभिन्न रूप से कार्य आरम्भ करने वे चाहते है! अपने महल;गाडिया, घोड़े शाही शान के बावजूद भी विनयशीलता और सेवाभाव से उनके व्यक्तित्व का और भी गौरव बढ़ता है! हर रोज प्रात: समय में जागकर महल में स्थित कुलदेवी बाण माता जी की शाही तरीके से पूजा अर्चना नित्य होती है! पूजा के बाद घुड़सवारी, १००० डिप्स, रनिंग आदि कसरत कर अपने स्वास्थ्य को मजबूत रखते है! बाद में दरिखाने में उपस्थिति देकर लोगों से मिलना होता है! उनकी हर सुबह ऐसे ही प्रारंभ होती है!

         दोपहर में श्री राव साहब के साथ शिवरात्रि का पवित्र भोज का लाभ लेकर हम शिरपुर के लिए चल दिए! हमें विदाई देने के लिए स्वयं श्री राव साहब , छोटे बन्ना श्री हर्षप्रदीप सिंहजी ,श्री विनोद जी और सारे साथी मौजूद थे! हमीरगढ़ के महलों से बाहर निकलते वक्त वहा की अविस्मरनीय यादे अपने ह्रदय में साथ लिए हम शिरपुर की और चल पड़े.....! गाड़ी के शीशे में महलों के पास खड़े श्री रावसाहब का अलविदा कहता हाथ दिखाई दे रहा था! वह दो दिन मानो दस साल जैसे लग रहे थे! आँखे उनकी प्रतिमा को आश्वस्त कर रहे थे....हम फिर एकबार आयेंगे.....! अलविदा....हमीरगढ़....!!!

                                                                      (c) लेखक: श्री. ठा.जयपालसिंह विक्रमसिंह गिरासे (सिसोदिया)

                                              ५०, विद्याविहार कोलोनी, शिरपुर ,महाराष्ट्र

                                            मो. ०९४२२७८८७४०