Nov 14, 2013

राजस्थान चुनाव : कई सीटों पर लामबंद हुए राजपूत मतदाता

राजस्थान में चुनाव प्रचार अपनी गति पकड़ चुका है, चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के साथ ही अलग अलग जातियों के सामाजिक संगठन भी पार्टी लाइन से ऊपर उठ अपनी अपनी जातियों के ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार विधानसभा में भेजने को सक्रीय है तो कुछ सामाजिक संगठन पार्टी विशेष से सांठ-गाँठ कर अपने जातीय वोटों का सौदा कर अपने निजी हित साधन में लगे है|


विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही ख़बरों के अनुसार शिव विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के बागी उम्मीदवार जालम सिंह को राजपूत समाज ने मनाकर भाजपा के मानवेन्द्र सिंह की जीत का रास्ता खोल दिया तो ओसियां विधानसभा से कांग्रेस के नेता स्व. नरेंद्र सिंह भाटी के पुत्र को टिकट नहीं मिलने से नाराज राजपूत समाज ने लामबंद होकर चुनाव मैदान में स्व. भाटी के पुत्र मृगेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतार दिया है|

ज्ञात हो राजस्थान के राजपूत परम्परागत तौर पर भाजपा के समर्थक रहे है पर इन चुनावों में भाजपा द्वारा कई क्षेत्रों में समाज को तरजीह न देने के चलते राजपूत समाज ने दबाव की नीति अपनाई और अजमेर जिले की एक सीट सहित कई सीटों पर पार्टी आलाकमान के ना चाहते हुए राजपूत प्रत्याशियों को ऐन वक्त पर टिकट देना पड़ा|

अलवर के बानसूर व अलवर शहर से राजपूत समाज द्वारा चुनाव मैदान में उतारे प्रत्याशियों के साथ भी समाज के मतदाता लामबंद हो रहे है, समाज के आदेश से अलवर जिले की बानसूर सीट से चुनाव लड़ रहे रमेश सिंह शेखावत ने दोनों राष्ट्रीय पार्टियों की नींद उड़ा रखी है पर उनकी मजबूत स्थिति से सबसे ज्यादा नुकसान मौजूदा भाजपा विधायक रोहताश शर्मा को उठाना पड़ रहा है, बानसूर में अब तक अजय समझे जाने वाले रोहताश शर्मा अब चुनावी मुकाबले में तीसरे नंबर पर चल रहे है| बानसूर में राष्ट्रीय दलों के बहकावे में आकर एक अन्य निर्दलीय राजपूत उम्मीदवार सूबेसिंह चौहान ने समाज के अनुरोध व दबाव के चलते चुनाव लड़ने पर पुनर्विचार करने का समाज को आश्वासन दिया है, वहीँ खीमसर व सार्दुलपुर विधानसभा में राजपूत समाज बसपा से चुनाव लड़ रहे राजपूत प्रत्याशियों के पक्ष में लामबंद है|

Nov 13, 2013

उत्थान और पतन


आज से पाँच हज़ार वर्ष पहले इस सारे संसार पर क्षत्रियों का शासक था। केवल पाँच हज़ार वर्ष मे हमारा इतना पतन हुआ की आज संसार मे सुई की नोक रखने बराबर हमारा शासन नहीं। शासन आते हैं और चले जाते हैं। ये कोई बड़े पतन का सूचक नहीं है, लेकिन आज से पाँच हज़ार बरस पहले तक इस संसार के सर्वश्रेष्ठ ज्ञानी,तपस्वी और योद्धा वीर-शूरवीर क्षत्रिय समाज मे थे। आज ना हमारे पास शोर्य है ना पराकर्म है ना ज्ञान है और ना तपस्या। आज पंद्रह मिनिट खड़े रहने से ही पांच सात शूरवीर धरासाई हो जाते हैं , ये हमारी शारीरिक स्थिति है। मानसिक स्थिति ये है की हमे कोई कितना ही अच्छा कहता रहे हमारे भेज्जे मे वो बात घूसेगी ही नहीं। हमे इन पतन और पराभव के कारणों को ढूँढना पड़ेगा। हम चाहें जैसा जीवन जीना चाहे जिये और क्षत्रिय बने रहें ये संभव नहीं। भगवान राम के काल मे बाल्मीकी जी के आश्रम में राम लक्ष्मण और सीता बनवास काल मे दस वर्ष तक रहे। वो वरुण के वंशज बाल्मीकी ,उनके वंशज भील आज किस स्थिति मे जीवन जी रहे हैं ? ना उन्हे खाने का सलीका ना पीने का  और ना बोलने और उठने-बैठने का। उनके इस आचरण का पतन कैसे हुआ ?

जब किसी भी समाज का पतन होता है तो सबसे पहले वो समाज अपने धर्म को भूल जाता है। स्वधर्म क्या है उसको पहचानने की कोशिश नहीं करता और पाखंडी धर्मों को अपनाकर अपने धर्म को तिलांजलि दे देता है और तब उसके पास उत्थान का जो पहला साधन स्वधर्म होता है वो उसके हाथ से निकल जाता है। धर्म के नाम पर पाखंड में वो ठगा जाता है जिससे उसको ना सांसरिक और ना आध्यात्मिक  क्षेत्र किसी प्रकार का लाभ मिलता है। इस तरह वो अपने स्वधर्म को बिलकुल भूल जाता है और फिर उसका पूरा समाज अपने इतिहास तक को भूल जाता है। संसार मे सायद ही कोई ऐसा समाज हो जिसके इतिहास मे हमारे जीतने महापुरुष पैदा हुये हों, और विभिन्न क्षेत्रों मे , ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जिसके अंदर हमारा महापुरुष पैदा नहीं हुआ और जिसने पूरे संसार मे अपनी ख्याति प्राप्त नहीं की हो।

रोज दस हज़ार सैनिकों को मौत के घाट उतारने वाला भीष्म  पितामह क्षत्रिय समाज मे पैदा हुआ और चींटी को भी मत मारो ये अहिंसा का उपदेश देना वाला भी क्षत्रिय समाज मे ही पैदा हुआ था। ज्ञान,तपस्या,वीरता तक की हमने प्रकाष्ठाएं  तोड़ दी। संसार मे आज तक विश्वामित्र से लंबी तपस्या करने वाला तपस्वी पैदा नहीं हुआ। ज्ञान के क्षेत्र मे उपनिषद कहते हैं की क्षत्रियों ने सबसे पहले अपने स्वधर्म  का ज्ञान पैदा किया और अपनी तपस्या से उस ज्ञान का विकास किया और उसके बाद तीनों वर्णो को उनके धर्म का ज्ञान करवाया।

--श्री देवी सिंह महार (उपदेश)



 



 

श्यामप्रताप सिंह राठौड़ की रैली से बौखलाई भाजपा


डीडवाना: राजस्थान के डीडवाना विधानसभा क्षेत्र की सीट से ११ नवंबर को श्यामप्रताप सिंह राठौड़ के नामांकन के समय उनके समर्थन में उमड़ी स्वर्ण जातियों,दलितों व मुस्लिम समुदाय के लोगों की भीड़ देखकर भाजपा बौखला गई और १२ नवम्बर को भाजपा उम्मीदवार का नामांकन दाखिल करते समय पार्टी की ताकत दिखाने हेतु भीड़ जुटाने खुद वसुंधरा राजे को खुद डीडवाना आना पड़ा।
ज्ञात हो डीडवाना से भाजपा चुनाव लड़ रहे युनुसखान वसंधरा राजे सरकार में मंत्री थे और पिछले चुनावों में हार गए थे साथ ही इस बार भी श्यामप्रताप सिंह राठौड़ की मजबूत स्थिति से भाजपा मुकाबले से ही बाहर है यहाँ मुख्य मुकाबला कांग्रेस व बसपा के बीच होगा। जबकि वसुंधरा राजे ने डीडवाना विधानसभा सीट को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रखा है इसीलिए अपने प्रत्याशी का नामांकन तक भरवाने खुद डीडवाना पहुंची।
११ नवंबर को श्यामप्रताप सिंह के नामांकन भरने हेतु साथ गई भीड़ का उत्साह देखने लायक था, एक किलोमीटर से ज्यादा रैली मार्ग को युवाओं ने ढोल नगाड़े बजाते, नाचते हुए पार किया| रैली में एक ही नारा गूंज रहा था- श्यामप्रताप म्हारो भायलो,

Nov 8, 2013

चुनाव हराने की क्षमता विकसित करे राजपूत समाज


राजस्थान में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में भाजपा द्वारा १७६ सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा से प्रदेश के शेखावाटी आँचल सहित कई क्षेत्रों में राजपूत युवाओं में भाजपा के खिलाफ रोष है| राजपूत युवाओं का मानना है कि राजपूत भाजपा के पारम्परिक वोट बैंक होने के नाते अब पार्टी की यह सोच बन गई है कि – “राजपूत मतदाता तो उसके है ही सो अपना जनाधार बढाने हेतु अन्य जातियों खासकर भाजपा की अब तक धुर विरोधी रही जाट जाति को जोड़ा जाय|” और इसी सोच के तहत भाजपा द्वारा जारी सूची में जाट उम्मीदवारों की संख्या अपेक्षा के विपरीत ज्यादा है| साथ ही राजपूत जाति का पारम्परिक रूप से कांग्रेसी विरोधी होने व आम राजपूत के मन में कांग्रेस के प्रति घृणा के चलते भाजपा की सोच बन गयी है कि राजपूत समाज को महत्त्व दिया जाय या नहीं उसका उनके मतदान पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि राजपूतों की कांग्रेस से घृणा के चलते भाजपा को वोट देने की मज़बूरी है|

और पार्टी की यह सोच उसके द्वारा जारी उम्मीदवारों की सूची देखकर आसानी से देखी समझी जा सकती| साथ ही भाजपा के खिलाफ इसको लेकर राजपूत युवाओं द्वारा व्यक्त रोष भी सोशियल साइट्स पर प्रत्यक्ष देखा सकता है, यही नहीं समाज को उचित प्रतिनिधित्त्व ना मिलने से नाराज कई राजपूत बागी होकर भाजपा को हराने हेतु निर्दलीय या बसपा जैसे अन्य दलों की टिकट पर चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे है जो निश्चित ही भाजपा के

Nov 5, 2013

क्या अब यही रास्ते रास्ते बचें है इस देश में ?


२० अक्टूबर २०१३ को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भायंदर में राजस्थान राजपूत परिषद्, मुंबई द्वारा आयोजित दशहरा स्नेह मिलन के कार्यक्रम में विभिन्न राजपूत सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया| कार्यक्रम में मुंबई के आस-पास रहने वाले राजपूतों ने हजारों की संख्या में भाग लिया| कार्यक्रम को श्री राजपूत करणी सेना के संस्थापक व संरक्षक श्री लोकेन्द्र सिंह कालवी, महाराणा प्रताप बटालियन के कमांडर ठाकुर अजय सिंह सेंगर के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों के राजपूत नेताओं ने संबोधित किया|

इसी कार्यक्रम में जोधा-अकबर सीरियल के मामले में बालाजी टेलीफिल्मस की एकता कपूर द्वारा सीरियल बंद करने को लेकर करणी सेना व राजपूत समाज से मीडिया के सामने माफ़ी मांगते हुए सीरियल बंद करने के वायदे से मुकर जाने पर रोष व्यक्त करते हुए महाराणा प्रताप बटालियन के ठाकुर अजयसिंह सेंगर ने राजपूत युवाओं से एकता कपूर द्वारा समाज को धोखा दिए जाने व सीरियल में समाज की भावनाएं आहत करने का बदला लेने का आव्हान करते हुए घोषणा की कि- जो भी युवा एकता कपूर की हत्या कर देगा उसे महाराणा प्रताप बटालियन पांच रूपये का ईनाम देगी| कार्यक्रम में शामिल होने वाले उत्तरप्रदेश के मंत्री रघुराज प्रताप उर्फ़ राजा भैया के एनवक्त पर कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की नाराजगी जताते हुए सेंगर ने उनकी आलोचना करते हुए कहा कि राजा भैया जबान देकर समारोह में नहीं आये अत: उन्हें इसकी सजा मिलनी चाहिये और इसके लिए सेंगर ने राजा भैया को आगामी समाज के किसी प्रोग्राम में सिख धर्म द्वारा दी जानी वाली सामाजिक सजा का अनुसरण करते चार जूते साफ करने की सजा सुनाई|

Oct 26, 2013

राष्ट्र के दिल ओ दिमाग में लहू बनकर दौड़ने वाला राजपूत वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे लेने की तरफ अग्रसर ..........


मुझे आज 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि का विस्मरण हो आया जब वतन "आजादी" की फिजाओं में खुलकर साँस लेने के लिए फेफड़े फुला रहा था, तब वतन परस्ती और हिंदुत्व को विश्व में बचाने के लिए एवं वतन की एक एक इंच जमीन के लिए अपना शीष और सर्वस्व न्योछावर कर राष्ट्र के दिल ओ दिमाग में लहू बनकर दौड़ने वाला राजपूत वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे लेने की तरफ अग्रसर था ! इन छियासठ वर्षो में राजपूत समाज को जमींदौज करने वाले सारे फार्मूले सरकारों ने हम पर लगा डाले .... पर हम तब भी नही मिट पाए .........!

मित्रो लाला लाजपत राय जब लाठी चार्ज में घायल हुए थे, तो उन्होंने सिंह गर्जना की थी की मेरे शरीर पर पड़ी एक एक लाठी अंग्रेजी हुकूमत के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी ! और इसे सरदार भगत सिंह ने अपने प्राणों की आहुति देकर वैश्विक सत्य के रूप में चरितार्थ करके दिखा दिया, पर विडम्बना देखिये समाज बंधुओं आपकी कौम की अस्मत को मिट्टी में मिला, हर कहीं गिरवी रख देने वाले लोगो को आगे बढाने वालो को एक करारा थप्पड़ मारने का साहस हममे नही, तो हम कहाँ सर काटने और कटाने जैसी थोथी लफ्फाजी (गाल बजाने वाली गन्दी मानसिकता) में अपने फर्जी स्वाभिमान को शांत करने वाला बकवास अति आत्म विश्वास लेकर घूम रहे है, जो न हमारी कौम का भला कर सकता है .....और न ही आपके उज्जवल भविष्य की गारंटी दे सकता है !

Oct 25, 2013

श्याम प्रताप सिंह राठौड़ : एक उभरता राजपूत युवा नेता (परिचय)

राजस्थान के नागौर जिले में डीडवाना विधासभा क्षेत्र के रुवां नामक गांव में २९ नवम्बर १९८० को पुलिस अधिकारी श्री नरपत सिंह जी (केशव दासोत मेड़तिया) राठौड़ जो लंबे समय तक पूर्व राष्ट्रपति शेरे राजस्थान स्व.भैरोंसिंह जी शेखावत के सुरक्षा इंचार्ज रहेके घर जन्में और कला संकाय से स्नातक शिक्षा ग्रहण किये श्याप्रताप सिंह राठौड़ अभी राजस्थान विधानसभा के होने जा रहे चुनावों में बहुजन समाज पार्टी की और से चुनावी दंगल में ताल ठोक रहे है| ज्ञात हो पूर्व में एक समर्पित भाजपा कार्यकर्त्ता होने के बावजूद पिछले चुनावों में डीडवाना विधानसभा में राजपूत मतों से जीत मंत्री बने तत्कालीन मंत्री युनुसखां द्वारा राजपूत युवकों के साथ पक्षपाती रवैया अपनाने उन्हें विरोधियों से मिल झूंठे मुकदमों में फंसाने से नाराज राजपूत समाज के कुछ जागरूक सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा युनुस खान की जगह श्यामप्रताप को भाजपा से टिकट दिलवाने की भाजपा से मांग ना माने जाने की स्थिति में भाजपा को डीडवाना क्षेत्र में राजपूत समाज की राजनैतिक ताकत दिखाने के उद्देश्य से निर्दलीय चुनाव में उतारा था|

पिछले चुनाव में छात्र राजनीति व सामाजिक गतिविधियों में सक्रीय श्यामप्रताप को समाज द्वारा चुनाव मैदान में उतारे श्याम प्रताप को १७००० वोट प्राप्त हुए, नतीजा – भाजपा वोटों के बंटने के कारण युनुसखान हार गए| इस तरह भाजपा द्वारा राजपूत समाज की अवहेलना की कीमत भाजपा को एक सीट गँवा कर चुकानी पड़ी|

उपरोक्त हार से सबक मिलने के बाद भी भाजपा की अड़ियल नेता वसुंधरा राजे ने कोई सबक नहीं सीखा और समाज की मांग को फिर अनदेखा करते हुए इन चुनावों में भी युनुस खान को टिकट थमा दी| उधर श्यामप्रताप की झुझारू छवि, राजपूत समाज का एकजुट होकर साथ देना और क्षेत्र में दलितों की सहायतार्थ उसके द्वारा किये कामों की वजह से दलित मतों का उसके प्रति झुकाव भांप बहुजन समाज पार्टी ने श्यामप्रताप सिंह को टिकट दे दिया| श्यामप्रताप सिंह के साथ राजपूत और दलित मतों के ध्रुवीकरण को देखते हुए जिस सीट पर भाजपा का कब्ज़ा होता था उस सीट पर आज भाजपा कहीं दूर दूर तक मुकाबले में ही नहीं वह तीसरे नंबर पर जा पहुंची| अब मुख्य टक्कर श्यामप्रताप व कांग्रेस के मध्य ही रह गयी है|

भाजपा द्वारा राजपूत समाज की अवहेलना से आक्रोशित होने के अलावा ऐसे कौनसे कारण है कि आज डीडवाना क्षेत्र का नहीं बल्कि पुरे राजस्थान व सोशियल मीडिया से जुड़ा देशभर का राजपूत युवा श्यामप्रताप के साथ खड़ा है; दलित समुदाय अपनी परंपरागत कांग्रेस पार्टी को छोड़ श्यामप्रताप के पक्ष में मजबूती से खुलेआम खड़ा है| आईये इन्हीं प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए एक सरसरी नजर डालते है श्यामप्रताप सिंह राठौड़ द्वारा किये गए सामाजिक व राजनैतिक संघर्षों पर:-

वर्ष १९९८ में श्यामप्रताप ने अग्रवाल कालेज जयपुर के छात्र संघ में उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव लड़ छात्र राजनीति में सक्रीय कदम रखा, हालाँकि वे इस चुनाव में जीत नहीं पाये| इस चुनाव के बाद राजनीति में कदम रखते हुए श्यामप्रताप ने जयपुर के वार्ड संख्या चार से पार्षद का निर्दलीय चुनाव लड़ा और राजस्थान में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकार्ड बनाया| २८ मार्च २००४ को ही श्यामप्रताप को राजपूत युवा परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, इस दौरान उनके प्रयासों से राजस्थान की विभिन्न कालेजों में पांच राजपूत युवा छात्र संघ अध्यक्ष चुनाव जीते| राजपूत युवा परिषद् के झंडे तले श्यामप्रताप सिंह ने राजस्थान में राजनैतिक पार्टियों द्वारा राजपूतों की उपेक्षा व आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ भवानी निकेतन स्कुल से मुख्यमंत्री आवास तक “अधिकार रैली” के नाम से एक बड़ी रैली का सफल आयोजन किया| इस रैली में आक्रोशित भीड़ व पुलिस के बीच के जमकर लाठी-भाटा जंग भी हुई|

राजपूत युवा परिषद् के अध्यक्ष के नाते इन्होने समाज के विभिन्न महापुरुषों की जयंतियों पर कार्यक्रम कर युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश पहुंचाने की पुरजोर कोशिश की व प्रदेश स्तर पर राजपूत युवाओं को संगठित करने का भरपूर प्रयास किया|

आप वर्ष २००९ व २०१० में राजस्थान के प्रसिद्ध व चर्चित राजपूत नेता लोकेन्द्रसिंह जी कालवी के संरक्षण में स्थापित श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे| इस दौरान ने करणी सेना ने अरुण-गोवारिकर की चर्चित फिल्म जोधा-अकबर का राजस्थान के किसी भी सिनेमा घर में प्रदर्शन रोककर देश में करणी सेना की ताकत की धाक जमाई|

वर्ष २००९ में ही भाजपा को डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में राजपूत मतों की ताकत का अहसास कराने के लिए समाज के आदेश पर आपने विधान सभा चुनाव लड़ा| जिसमें आपको १७००० वोट मिले| ज्ञात हो डीडवाना क्षेत्र में दो लाख के आस-पास कुल मत है और वहां ६०% मतदान होता है|

चुनाव में भाजपा केतत्कालीन मंत्री युनुसखान को हरा अपनी राजनैतिक ताकत दिखाने के बाद श्याप्रताप सिंह डीडवाना विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न जन-समस्याओं को लेकर समय समय पर आन्दोलन करते रहे, रामसा पीर परिषद् के झंडे तले दलित कल्याण कार्यक्रम चलाने के साथ डीडवाना को जिला बनाने के लिए कई बार प्रदर्शन व आन्दोलन किया|

पंचायत चुनावों में भी नागौर जिले में राजपूत पंच, सरपंचों की संख्या बढाने हेतु आपने अथक प्रयास किये और काफी सफल रहे यही कारण है डीडवाना विधानसभा क्षेत्र के सभी दस में से नौ राजपूत सरपंच इस चुनाव में आपके साथ खड़े है|

करड़, पटोदा, गोटन, न्यांगली राजपूत युवाओं के हत्याकांड के खिलाफ हुए सभी आन्दोलनों व संघर्षों में भी आपने बढ़ चढ़कर भाग लिया|

यही कुछ कारण है कि आज डीडवाना ही नहीं देशभर का राजपूत युवा आपसे जुड़ा है, आपको उनका पूर्ण समर्थन प्राप्त है जिसकी झलक सोशियल मीडिया पर आसानी से प्रत्यक्ष देखी जा सकती है|

Oct 24, 2013

राजस्थान इकाई गठित करने को भारतीय शक्ति दल की मंथन बैठक संपन्न

जयपुर : 24 अक्टूबर ! भारतीय शक्ति दल की केन्द्रीय कार्यकारणी व पार्टी की वैचारिक क्रांति दल के वरिष्ठ सदस्यों की राजस्थान में पार्टी इकाई गठित कर राज्य में पार्टी की राजनैतिक गतिविधियों को बढ़ा पार्टी को सशक्त बनाने हेतु होटल मधुबन पैलेस में एक वैचारिक मंथन बैठक संपन्न हुई|

बैठक में पार्टी के केन्द्रीय वरिष्ठ सदस्यों, जयपुर में पार्टी के विचारधारा से जुड़े वरिष्ठ सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने इस सम्बन्ध में पाटन के राव दिग्विजय सिंह जी तंवर को पार्टी की विचार धारा के बारे में विस्तार से अवगत कराया व बेदाग छवि के मालिक व वैचारिक रूप से सुलझे राव साहब को राज्य में पार्टी अध्यक्ष बन मार्गदर्शन करने का आग्रह किया| पार्टी की विचारधारा को अपनी सोच के अनुरूप मानते हुए व प्रभावित हो राव साहब पाटन ने कुछ चिंतन मनन कर निर्णय लेने के लिये कुछ समय माँगा| ज्ञात हो भारतीय शक्ति की केन्द्रीय कार्यकारणी के वरिष्ठ सदस्यों का एक दल २३ अक्टूबर को देश के पूर्व उप-राष्ट्रपति स्व.श्री भैरोंसिंह जी शेखावत की जयन्ती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने जयपुर आया था| साथ ही भारतीय शक्ति दल राजस्थान विधान सभा चुनावों में २० से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रहा है|

Oct 21, 2013

डीडवाना में राजपूत राजनैतिक जनजागृति सम्मेलन सम्पन्न

डीडवाना : १९ अक्तूबर २०१३ - राजनीति के साथ समाज का भविष्य तय करना है। राजनीति से पहले समाज है, अगर समाज में एकजुटता होगी तो भविष्य भी उज्जवल होगा। यह विचार हिम्मत राजपूत छात्रावास में खींवसर के प्रत्याशी दुर्गसिंह चौहान ने राजनैतिक जनजागृति सम्मेलन में व्यक्त किए। चौहान ने मंच पर बैठे राजपूत सरपंचों की बढ़ती संख्या पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह समाज की एकजुटता का परिचय है कि इतने राजपूत सरपंच बन सके है। उन्होंने कहा कि समाज का व्यक्ति गत 9 वर्षो से डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में समाज के उत्थान के लिए दिन-रात प्रयासरत है, अगर इसका आर्थिक सहयोग, यातायात सहयोग कर सकते हो तो जरूर करे, फिर भी आपके बीच में श्यामप्रताप सिंह राठौड़ समाज में एकजुटता लाने एवं गरीबों की भलाई करने के लिए दिन-रात जुटे हुए है।

समाज के सरदारों से चौहान ने अपील करते हुए कहा कि राजनीति का सफर करने के लिए समाज में जागृति लाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाजपा एवं कांग्रेस से मुझे कोई नाराजगी नहीं है, आज समय चोट करने का हैं एवं समाज को फायदा एवं दिशा देकर दिशा बदलनी है। आज पार्टीयों में वरिष्ठ नेता बनकर बैठे कुछ नेता समाज का हिस्सा खा रहे है, इन नेताओं से बचकर चलना है। राजघराने की चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन में राजघराने का व्यक्ति आकर कभी भी समाज के साथ खड़ा नहीं हुआ है, परन्तु समाज की ठेकेदारी एवं टिकटों में सबसे आगे रहते है। राजपूत 60 वर्षो से दोहरी मार झेलता आया है परन्तु आज समय करवट ले रहा है और मात्र अपनी सोच को बदलना है ताकि आने वाले समय में समाज का व्यक्ति विधानसभा पंहुच सके।

चौहान ने कहा कि श्यामप्रताप सिंह राठौड़ आज 56 कौम को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहा है। गरीबो को गले लगा रहा है परन्तु जरूरत है कि हमें भी सोचना एवं हिम्मत दिखानी चाहिए और गरीब को गले लगाकर उसका भला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई पार्टी खराब नहीं है परन्तु हमें अपने ही समाज के लोगों को आगे लाना है ताकि हमारे समाज की समस्याओं को दूर कर सके। उन्होंने राठौड़ की तारीफ करते हुए कहा कि गत चुनाव में राठौड़ ने 17 हजार करीब वोट लिए और मैं दावा करते हुं कि इस चुनाव में कांग्रेस एवं भाजपा दोनो पार्टीयों को हराकर विधानसभा पंहुचेगे। उन्होंने समाज के बैठे हुए लोगों से कहा कि भाजपा एवं कांग्रेस द्वारा दिए जा रहे झूठे स्वाभिमान को गले से उतारकर फेंक दो और समाज की एकजुटता बनाकर भाई राठौड़ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प ले।

डीडवाना विधानसभा क्षेत्र के बसपा प्रत्याशी श्यामप्रताप सिंह राठौड़ ने उपस्थित महिलाओं एवं पुरूषों को सम्बोधित करते हुए कहा कि गत चुनाव में मैने डीडवाना आने पर जो वातावरण देखा, उससे मेरी भावना प्रकट हुई और मैंने महसूस करते हुए डीडवाना क्षेत्र को चुना और गांव-गांव, ढ़ाणी-ढ़ाणी पंहुचकर लोगों की समस्याओं से अवगत होकर प्रशासन के समक्ष रखी। गत चुनावों में मैनें 17 हजार वोट लेकर हारने के पश्चात भी लगातार पांच वर्षो तक डीडवाना विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया और विश्वास कायम करते हुए हर परिस्थिति में मैंने लोगों का विश्वास हासिल किया। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में परिवर्तन लाकर रहेगें परन्तु आप सब का सहयोग भी आवश्यक है।

जनजागृति लाने के लिए महिलाओं को भी आगे आना होगा। महिलाएं ही घर-घर सम्पर्क करके आज के सम्मेलन की चर्चा करे ताकि लोगों के सामने सच्चाई आ सके। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग मेरे बारे में भ्रामक प्रचार कर रहे है कि मैं पैसा लेकर चुनाव लड़ रहा हूं और मात्र भाजपा को हराना चाहता हूं, परन्तु मेरे बारे में जो लोग भ्रामक प्रचार कर रहे है वे समाज के हितैषी नहीं हो सकते, मैनें कभी भी किसे से भी कोई सहायता या पैसा नहीं मांगा है परन्तु यह सच है कि मैं कांग्रेस एवं भाजपा दोनो को हराकर इस बार विधानसभा जरूर पंहुचुगा, परन्तु आज उपस्थित जनसमूह में राजनैतिक जनजागृति लाना अति आवश्यक है। चारण एवं मेघवाल समाज के लोग भी समर्थन दे रहे है, समाज के लोग एकजुट होकर परिवर्तन लाने में सहयोग करें। मैं दोनो पार्टीयों के विरोध में खड़ा हुआ हूं और मुझे पूरा भरोसा हैं कि मैं विजय हासिल करूंगा। राठौड़ ने भ्रामक प्रचार करने वाले को संदेश देते हुए कहा कि जो हमारे अग्रज है भगवान उन्हें सदबुद्धि दे कि वे समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य करें, चाहे किसी भी पार्टी में क्यो नहीं हो।

इससे पूर्व सभी अतिथियों का मारवाड़ी परम्परानुसार साफा एवं महिलाओं को शॉल ओढक़र सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र सिंह थेबड़ी ने किया।

ये थे उपस्थित

सरपंच दशरथसिंह झाड़ौद, मांगू सिंह बेगसर, भोमसिंह आकोदा, कमल कंवर खोजाश, रतन कंवर लोरोली, इन्द्र कंवर भवाद, कैलाश कंवर मण्डूकरा सरपंच, भंवर कंवर सानिया सरपंच, नन्दु कंवर दुदौली, सुरेन्द्र सिंह ढिग़ाल, श्रवण सिंह उपसरपंच डसाणा, मदनसिंह पूर्व सरपंच गावड़ी, पूर्णसिंह बावड़ी, नरपतसिंह रूवां, नरपत सिंह उपसरपंच पालोट, ईचरज कंवर आजड़ोली पूर्व सरपंच, भगवान सिंह डसाणा पूर्व उपसरपंच, रघुवीर सिंह बड़ी छापरी, रामचन्द्र सिंह गावड़ी, भंवर सिंह पूर्व कमाण्डेड भी उपस्थित थे।

इन्होंने भी किया सम्बोधित

इस अवसर पर मारवाड़ राजपूत सभा के अध्यक्ष हनुमानसिंह खांगटा ने भी सम्बोधित करते हुए कहा कि आज राठौड़ गत नौ वर्षो से लगातार आप लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए संघर्षरत है। उन्होंने राठौड़ का साथ देने एवं समाज में एकजुटता लाने का भी आव्हान किया और आने वाले चुनावों में समाज को एकजुट होकर ज्यादा से ज्यादा वोट पक्ष में डलवाना है। कैप्टन नन्दसिंह रसीदपुरा, देवी सिंह बड़ाबरा ने भी सम्बोधित करते हुए समाज को जागृत होने की अपील की।

नागौर लाइव डॉट इन से साभार
चित्र : जोधा रणसीसर की फेसबुक वाल से

Oct 19, 2013

करणी सेना "राजनैतिक जागरूकता सन्देश" प्रदेश दौरे पर

राजस्थान में राजपूत समाज का अग्रणी सामाजिक संगठन श्री राजपूत करणी सेना विधानसभा चुनाव को मध्यनजर समाज को वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में ढालने हेतु राजनैतिक जागरूकता हेतु प्रदेश के दौरे पर है इस तीन दिवसीय प्रथम चरण में शेखावाटी की सीटों पर करणी सेनिको से ली स्थानीय समीकरणों की जानकारी . दूसरा चरण अक्टूबर की शुरुआत देशनोक की पवन धरा से होगी , जो की बीकानेर , फलोदी , बाड़मेर , बालोतरा , जोधपुर , पाली , जालौर , माउन्ट आबू , उदयपुर , भीलवाडा , अजमेर , होते हुए जयपुर में समाप्त होगा . शेष राजस्थान तक तीसरे व् चौथे चरण में पंहुचा जायेग

Oct 18, 2013

राजस्थान की २० से 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगा भारतीय शक्ति दल

स्व. आयुवान सिंह जी शेखावत और क्षत्रिय वीर ज्योति की राजनैतिक विचारधारा को धरातल पर लाने हेतु हाल ही में घटित भारतीय शक्ति दल की कल दिल्ली के मालवीय नगर में एक उच्च स्तरीय मंथन बैठक हुई| बैठक में शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.वी.पी. सिंह, कैप्टेन राय और क्षत्रिय वीर ज्योति के वरिष्ठ सदस्य शामिल थे|

बैठक में पार्टी को मजबूत करने, पार्टी सदस्यों के आकंडे कंप्यूटरीकृत करने, राज्य में जिला, विधानसभा व पंचायत स्तर पर कमेटियां गठित करने, पार्टी की विचारधारा से जुड़े अन्य दलों से चुनाव लड़ने वाले आर्थिक दृष्टि से कमजोर प्रत्याशियों की आर्थिक मदद करने, प्रभावी मीडिया सैल गठित करने के साथ ही राजस्थान में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में २० से 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया| जिनमें क्षत्रियों की पारम्परिक सहयोगी दलित जातियों को भी प्रतिनिधित्त्व देने का निर्णय लेते हुए दलितों को भी टिकट देने पर सहमती बनी|

शक्ति दल ने राजस्थान में अपने चुनाव लड़ने की रणनीति स्पष्ट करते हुए साफ़ किया कि जिस किसी विधान सभा क्षेत्र से क्षत्रिय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है भले ही वह किसी पार्टी से हो शक्ति दल उनके खिलाफ किसी को टिकट नहीं देगा और क्षत्रिय उम्मीदवार का समर्थन करेगा|

ज्ञात हो क्षत्रिय वीर ज्योति राजस्थान विधानसभा में सभी दलों के मिलाकर ४० क्षत्रिय विधायक विधानसभा में पहुंचाने की रणनीति पर कार्य कर रहा है| और क्षत्रिय वीर ज्योति की इस मुहीम में राजस्थान के कई क्षत्रिय सामाजिक संगठन साथ दे रहे है| अभी भारतीय शक्ति दल की और से अलवर की दो सीटों बानसूर व अलवर विधानसभा क्षेत्र से क्रमश: रमेश सिंह शेखावत व बच्चू सिंह बसेठ का नाम घोषित किया गया है|

Oct 17, 2013

जेता-कुम्पा के बलिदान से प्रेरणा ले राजपूत युवा : उम्मेद सिंह करीरी

जोधपुर के सेनापति जेता और कुम्पा से "सुमेल गिरी" युद्ध के पश्चात् शेरशाह सूरी का ये कथन कि - "मैं मुठ्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत गँवा बैठता|" शायद हर राजपूत को गौरवान्वित कर देने के लिए प्रयाप्त होता है| लेकिन मित्रों क्या जेता कुम्पा के इस बलिदानी निर्णय पर कभी विचार मंथन किया है ??

ऐसी क्या परिस्तिथियाँ रही होंगी उनके सामने की नौ कुंटी मारवाड़धीश (जोधपुर नरेश मालदेव) के मैदान छोड़ने के निर्णय के बावजूद उन्होंने शेरशाह सूरी का सामना कर उसके दांत खट्टे कर डाले| क्योंकि उन्हें अपनी मातृभूमि, अपनी कौम के सम्मान, अपने देश की जनता से मोहब्बत थी| वो अपनी कौम का अस्तित्व बचाने के लिए लड़े, और हिंदुस्तान के सुल्तान शेरशाह सूरी को ये कहने के लिए विवश कर डाला "मैं मुठ्ठी भर बाजरे के की लिए हिंदुस्तान की सल्तनत गँवा बैठता" जिस पर हम सब का सीना गर्व से फूल उठता है|

मित्रों क्या हम अपनी कौम का अस्तित्व बचाने के लिए इस चुनावी समर में एक दिन के लिए जेता और कुम्पा जैसा निस्वार्थ समर्पण अपनी कोम के लिए नहीं दिखा सकते ?? क्या हम अपने क्षणिक लाभ हित की चिंता छोड़ समाज के हित की परवाह नही कर सकते ?? आपको अपना मत राजपूत को कमजोर करने वाली राजपूत विरोधी पार्टियों को देना है ? या सिर्फ राजपूत उम्मीद्वार को भले वो किसी भी पार्टी से हो ! जितनी ज्यादा संख्यां में हमारे लोग विधायिका में पहुंचेंगे उतनी ही मजबूती इस कौम के अस्तित्व को मिलने वाली है|

आपको जानकारी दे दू वर्तमान विधानसभा में 25 राजपूत विधायक है, इनमे राजपूत नहीं आम राजपूत कितने है आप जानते ?? 15 राजपरिवारो से जिन्हें आम राजपूत की न तकलीफ से मतलब है न हमारे गिरते हुए ग्राफ से ...आम राजपूत सिर्फ दस है| समाज बंधुओं जो हमारे हित में कार्य करने के लिए हम सब ने मिल कर जिताए ....... उनमे से पाँच पार्टियों के जरखरीद बन बैठे.....बाकि बचे पाँच को ये सरकारी भय दिखा चुप करा देते है|

विचार कीजिये ऐसे कौन लोग होंगे ? जो आम राजपूत की बात को अपने अस्तित्व से जोड़ जेपा और कुम्पा की भांति अपना सर्वस्व लुटा कौम के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रतिबद्ध होंगे .......? इस चुनाव में सिर्फ आम राजपूत को वोट कीजिये राज घराने का गोबर उठा अपने गुलाम होने वाली मानसिकता से छुटकारा पा लीजिये ...अपना समय और समर्थन आम राजपूत के लिए खर्च कीजिये .......... सोचो ..........समझो ........... समर्पण ............ और समर्थन .... तभी कीजियेगा ...... कई आयेंगे कौम बेंचने !!

सिर्फ कौम के लिए मतदान कीजियेगा मित्रो मेरी यही इल्तिजा ......प्राथर्ना अनुनय विनय ओर आराधना है ...........जय क्षात्र धर्म (उम्मेद सिंह करीरी : अध्यक्ष, राजपूत युवा परिषद् राजस्थान)

Oct 12, 2013

राजपूत युवा परिषद् अलवर ने किया वीरांगनाओं का सम्मान

श्री राजपूत युवा परिषद् की ओर से शुक्रवार को अलवर शहर के कोठी गंगा निवास में आयोजित कार्यक्रम में वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया और महापुरुषों के चित्रों की प्रदर्शनी के साथ राजपूत इतिहास से सम्बंधित पुस्तक मेले का आयोजन किया गया| इस अवसर पर वीरांगनाओं को कार्यक्रम के अतिथियों ने शाल ओढ़ाकर व प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया|

कार्यक्रम में आये वक्ताओं ने समाज को एकजुट रहने का आव्हान किया| वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज का व्यक्ति किसी भी राजनैतिक पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़े हमारा लक्ष्य उसे जीतना होना चाहिए| जिससे राजपूत समाज के अधिक से अधिक लोग चुनकर विधानसभा में जाये| कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगठन के संस्थापक सदस्य महावीर सिंह राठौड़ थे, जबकि विशेष अतिथि संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उम्मेदसिंह करीरी थे|

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नल राजेन्द्र सिंह नरुका व अलवर विधानसभा से भारतीय शक्ति दल के उम्मीदवार बच्चू सिंह बसेठ ने की| मंच संचालन संगठन के अलवर जिलाध्यक्ष राहुल सिंह शेखावत ने किया|

Oct 8, 2013

      !!"राजपूत है हम"!!

कहते तो हम सब है की राजपूत है हम ,
मानवता की लाज बचाने वाले हिन्द के 
वो सपूत है हम ।

पर वो क्षत्रियोचित सँस्कार अब कँहा है ।
वो राणा और शिवाजी की तलवार अब कँहा है॥

बेटे तो हम उन मर्यादापुरुषोत्तम राम
के वँश के है ।
और राणा शिवाजी और दुर्गा दास जी के
अँश के है ॥

तो फिर राम का मर्यादित जीवन अब कँहा है ।
राणा और दुर्गादास जी के जैसी लगन अब कँहा हैँ ॥

दानी कर्ण और राजा शिवी का नाम हम लेते है ।
भागिरथ और सत्यवादी हरिश्चन्द्र की साख हम
दूनियाँ को देते है॥

तो फिर भागिरथ जैसा तप अब कँहा है ।
झुकाया था भगवान को सत्य के आगे वो
सत्य का अवलम्ब अब कँहा है ।

हमेँ गर्व है की हम शर कटने पे भी लङते थे ।
खेल खेल मेँ ही हमारे वीर जँगली शेरो से अङते थे।

जिस सत के सहारे धङ लङते थे वो सत
अब कँहा है ।
आज वो हजार हाथीयोँ का अथाह बल
अब कँहा है।

सतयुग, त्रेता और द्वापर तो क्षत्रियोँ के स्वर्ण युग रहै ।
कलयुग मे भी आज तक क्षत्रिय श्रेष्ठ रहे चाहै
उन्होने कठिन कष्ठ सहै ॥

पर सोचना तो हमे है जो क्षत्रिय धर्म
और सँस्कार भूल रहै ।
देख रहा हुँ आज शेर भी गीदङो की
गुलामी कबूल रहै है

अब तो ईस राख मे छुपे अँगारे
को जगा लो साथियोँ ।
जिस धर्म ने महान बनाया हमे
उसे अपनालो साथियोँ ।
जय क्षत्रिय ॥
जय क्षात्र धर्म ॥

Oct 2, 2013

क्या है जोधा बाई की एतिहासिक सच्चाई ??

आदि-काल से क्षत्रियो के राजनीतिक शत्रु उनके प्रभुत्वता को चुनौती देते आये है ! किन्तु क्षत्रिय अपने क्षात्र-धर्म के पालन से उन सभी षड्यंत्रों का मुकाबला सफलता पूर्वक करते रहे है ! कभी कश्यप ऋषि और दिति के वंशजो जिन्हें कालांतर के दैत्य या राक्षस नाम दिया गया था, क्षत्रियो से सत्ता हथियाने के लिए भिन्न भिन्न प्रकार से आडम्बर और कुचक्रो को रचते रहे ! और कुरुक्षेत्र के महाभारत में जबकि अधिकांश ज्ञानवान क्षत्रियों ने एक साथ वीरगति प्राप्त कर ली, उसके बाद से ही हमारे इतिहास को केवल कलम के बल पर दूषित कर दिया गया ! इतिहास में भरसक प्रयास किया गया की उसमे हमारे शत्रुओं को महिमामंडित किया जाये और क्षत्रिय गौरव को नष्ट किया जाये !

किन्तु जिस प्रकार किसे हीरे के ऊपर लाख धूल डालो उसकी चमक फीकी नहीं पड़ती ठीक वैसे ही ,क्षत्रिय गौरव उस दूषित किये गए इतिहास से भी अपनी चमक बिखेरता रहा ! फिर धार्मिक आडम्बरो के जरिये क्षत्रियो को प्रथम स्थान से दुसरे स्थान पर धकेलने का कुचक्र प्रारम्भ हुआ ,जिसमे आंशिक सफलता भी मिली,,,,किन्तु क्षत्रियों की राज्य शक्ति को कमजोर करने के लिए उनकी साधना पद्दति को भ्रष्ट करना जरुरी समझा गया इसिलिय्रे अधर्म को धर्म बनाकर पेश किया गया ! सात्विक यज्ञों के स्थान पर कर्म्-कांडो और ढोंग को प्रश्रय दिया गया ! इसके विरोध में क्षत्रिय राजकुमारों द्वारा धार्मिक आन्दोलन चलाये गए जिन्हें धर्मद्रोही पंडा-वाद ने धर्म-विरोधी घोषित कर दिया ,,इस कारण इन क्षत्रिय राजकुमारों के अनुयायियों ने नए पन्थो का जन्म दिया जो आज अनेक नामो से धर्म कहलाते है ,,,,,ये नए धर्म चूँकि केवल एक महान व्यक्ति की विचारधारा के समर्थक रह गए और मूल क्षात्र-धर्म से दूर होगये, इस कारण कालांतर में यह भी अपने लक्ष्य से भटक कर स्वयं ढोंग और आडम्बर से ग्रषित होगये ! इसके बाद इन्ही धर्मो में से इस्लाम ने बाकी धर्मो को नष्ट करने हेतु तलवार का सहारा लिया ,,,इस कारण क्षत्रियों ने इसका जम कर विरोध किया और इस्लाम के समर्थको ने राज्य सत्ता को धर्म विस्तार के लिए आसान तरीका समझ ,आदिकाल से स्थापित क्षत्रिय साम्राज्यों को ढहाना शुरू कर दिया ! क्षत्रियों ने शस्त्र तकनिकी को तत्कालीन वैज्ञानिक समुदाय यानि ब्राह्मणों के भरोसे छोड़ दिया तो, परिणाम हुआ क्षत्रिय तोप के आगे तलवारों से लड़ते रहे ,,,,,चंगेज खान से लेकर बाबर तक तो सिर्फ भारत को लूटते रहे किन्तु बाबर ने भारत में अपना स्थायी साम्राज्य स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर ली !

किन्तु भारत में पहले ही आ चुके अफगानों ने हुमायु से सत्ता छीन ली और हुमायूँ दर-दर की ठोकरे खाता हुआ हुआ शरण के लिए अमरकोट के राजपूत राजा के यहाँ पहुंचा !अपनी गर्भवती बेगम को राजपूतों की शरण में छोड़ ,अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने की तैयारियों में जुट गया !वहीँ जलालुद्धीनका जन्म हुआ और १३ वर्ष तक उसकी परवरिश राजपूत परिवार में हुयी ! हुमायूँ जब बादशाह बना तब पर्शिया से कुछ परिवारों को अपने साथ भारत लाया था ! जो की मूलरूप से मीनाकारी का कार्य किया करते थे ! उनके परिवारों में लड़कियों के विवाह का चलन नहीं था ,,इस कारण उनके कुछ परिवार अमरकोट और उसके आसपास कुछ पर्शियन लड़कियाँ दासियों का कार्य करती थी! इन्ही में से कुछ दासिया जोधपुर राजपरिवार में भी रहने लगी ! जोधपुर की राजकुमारी की एक निजी दासी जो पर्शियन थी ,जब उसके एक कन्या का जन्म हुआ तब वह रोने लगी कि इस बच्ची का कोई भविष्य नहीं है क्योंकि इसका विवाह नहीं होगा , तब राजकुमारी ने उसे वचन दिया कि मै इसका विवाह किसी राजपरिवार में करूंगी !

जब जोधपुर कि राजकुमारी जो कि आमेर के राजा भारमल की रानी बनी ,ने प्रथम मिलन की रात्रि को ही राजा भारमल से वचन ले लिया कि हरखू को मैंने अपनी धर्म बेटी बनाया हुआ है और मै चाहती हूँ कि उसका विवाह किसी राजपरिवार में हो ,,राजा भारमल ने जोधपुर की राजकुमारी को वचन दे दिया कि वह उसका विवाह किसी राजपरिवार में कर देंगे ! किन्तु यह आसान कार्य नहीं था क्योंकि किसी भी राजपूत परिवार ने हरखू से विवाह करना उचित नहीं समझा इस कारण उसकी उम्र काफी हो गई! किसी भी राजपरिवार तो दूर साधारण गैर राजपूत हिन्दू परिवार ने भी तत्कालीन परिस्थितियों में हरखू से विवाह करने से मना कर दिया ,,इस कारण रानी का राजा भारमल से अपना वचन नहीं निभाने का उलहना असहनीय होता जा रहा था ! इससे पूर्व जलालुद्धीन अकबर जब बादशाह बना तब ढूँढार (आमेर) में नरुकाओं का विद्रोह चल रहा था, इस कारण राजा भारमल ने बाध्य होकर अकबर से संधि करली थी, ताकि नरुकाओं एवं अन्य सरदारों के विद्रोह को दबाया जासके ! और अकबर से राजा भारमल की इस संधि में कोई वैवाहिक शर्त जैसा कि आज दिखाने का प्रयास किया जाता है, कुछ नहीं था !जब अकबर अजमेर शरीफ की यात्रा के लिए जा रहा था,तो रास्ते में राजा भारमल जी ने शिष्टाचार भेट कि तो वह कुछ चिंतित थे, अकबर ने भारमल जी से चिंता का कारण जाना तो उन्होंने हरखू के के विवाह से सम्बंधित बात सविस्तार बतायी ,,अकबर ने पूंछा कि "महाराज उसका विवाह हिन्दू रीती से होगा या मुश्लिम रीति से?" भारमल जी ने बताया कि हिन्दू रीति से तब अकबर ने पूंछा कि कन्यादान कौन करेगा ? भारमल जी ने कहा कि हरखू मेरी धर्म पुत्री है और इस नाते कन्यादान मै ही करूँगा ! तब बादशाह अकबर ने कहा कि "मै राजपूत नहीं हूँ, किन्तु मेरा जन्म और परवरिश राजपूत परिवार में हुयी थी ,,,ठीक उसी तरह जैसे हरखू राजपूत नहीं है , किन्तु उसका भी जन्म और परवरिश भी राजपूत परिवार में हुयी है " अतः यदि आपको उसके पिता बनाने में कोई ऐतराज नहीं तो मुझे उसके साथ विवाह करने में भी कोई ऐतराज नहीं है !

इसके बाद हरखू का विवाह अकबर के साथ किया गया ! यह कोई शर्मिंदगी या बदनामी की बात नहीं थी ,बल्कि राजा भारमल की बुद्धिमानी और धर्म और नारी जाति के प्रति सम्मान था,जिसकी सर्वत्र प्रशंसा की गयी,खासतोर पर पर्शिया के धर्म गुरुओं ने राजा भारमल को पत्र लिखकर एक पर्शिया लड़की के जीवन को संवारने के लिए प्रशंसा पत्र भेजा ! सिक्खों के गुरुओं ने भी इसकी प्रशंसा की और राजा भारमल की बुद्धिमानी के लिए साधुवाद दिया ! यह कहना गलत है कि यह हरखू जीवन भर हिन्दू रही,, ,वह कभी भी हिन्दू नहीं थी ,,,हां जब वह आमेर में रहती थी तब आमेर राजपरिवार के इष्ट देव श्री गोविन्देव जी की पूजा किया करती थी, इस कारण वह गोविन्द देव जी की पुजारी जरुर थी वरन तो वह फिर कभी भी जीवन में हरखू नहीं कहलाई उसका नाम मरियम बेगम पड़ गया और उसे बाकायदा इस्लाम रीति से ही कब्र में दफनाया गया था ! जहाँगीर उसी मरियम उज्जमानी का बेटा था ! जोधा नाम से जो प्रसिद्द थी वह जोधपुर की एक दासिपुत्री जगत गुसाईं (जो कि हरखू के ही भाई कि बेटी थी), जिसका निकाह जहाँगीर के साथ हुआ था और शाहजहाँ की माँ थी ,वह चूँकि जोधपुर से सम्बंधित थी और उसका कन्यादान मोटा राजा उदय सिंह जी ने किया था , इस कारण जोधा भी कहलाती थी !

रही बात आज लोग उस जगत गुसाईं उर्फ़ जोधा को अकबर से क्यों जोड़ बैठे ?? तो यह तो सिर्फ फ़िल्मी जगत की उपज है ,जब पहली बार हरखू को जोधा बाई बना दिया गया, वह थी मुगले-आजम फिल्म ,,उस समय फिल्मों को कोई गंभीरता से नहीं लेता था ! इस कारण फिल्म की प्रसिद्धि के बाद जोधा का नाम अकबर से जुड़ गया ! और इस फिल्म के बाद जो छोटे मोटे इतिहासकार हुए उन्होंने भी अकबर के साथ जोधा का नाम जोड़ने का ही दुष्कृत्य किया है ! और रही सही कसर पूरी कर दी आशुतोष गोवोरकर ने "जोधा-अकबर" नाम से फिल्म बनाकर !अब इसे आगे बढ़ा रही है ,नारी के नाम पर धब्बा ,एकता कपूर जो एक बदनाम सीरियल को जी टी वी पर प्रसारित लगातार प्रसारित किये जारही है ! अब हम बात करते है कि यह सब अनायास हुआ या किसी साजिश के जरिये ???? बहुत सी डीबेटों में हम से यह भी पूंछा गया गया कि आखिर फिल्म ,टी.वी.और मिडिया ,शासन-प्रशासन और तमाम प्रचार प्रसार के साधन राजपूत -क्षत्रिय संस्कृति के विरोधी क्यों होगये ?? इसका बिलकुल साफ-साफ उत्तर है कि देश के विभाजन से पूर्व तक लगभग सभी स्थानीय निकाय या शासन तंत्र पर क्षत्रियों का ही अधिकार था और यदि राजपूत-क्षत्रियों की छवि को धूमिल नहीं किया जाता तो, हमसे जिन लोगो ने सत्ता केवल झूंठ और लोगो को सब्जबाग दिखाकर प्राप्त की थी, उसे शीघ्र ही क्षत्रिय समाज पुनः वापिस लेलता !और हो सकता है कि राष्ट्र को आज तक के ये दुर्दिन देखने ही नहीं पड़ते !इसलिए राजनीतिक षड़यंत्र के तहत क्षत्रिय समाज की संस्कृति ,इतिहास और छवि को मटियामेट करने के लिए समस्त साधन एकजुट होकर हमला करने लगे ,,,,ताकि क्षत्रिय होना कोई गौरव की बात नहीं रहे बल्कि शर्म की बात होजाये,,,,,किन्तु क्षत्रिय समाज ने अपने पुरुषार्थ के बल पर न केवल अपनी प्रसान्सगिकता ही बनाये रखी बल्कि तमाम दुश्चक्रो को तोड़ने में सक्षमता दिखाई है ,,,,,,इस कारण यह समस्त विरोधी शक्ति एक साथ अब पुनः क्षत्रिय स्वाभिमान और गौरव को नष्ट करने में जुट गयी है !जहाँ तक इतिहास का सवाल है तो वर्तमान समय में उपलब्द्ध इतिहास दो तरह के लोगो के द्वारा लिखा गया है ,,,,एक तो चारणों ,भाटों और राजपुरोहितों द्वारा लिखा गया है, इसमें यह कमी रही है कि यह या तो अपने स्वामी की प्रशंसा में या अपने स्वामी के शत्रु की छवि को धूमिल करने के लिए लोखा गया था !

दूसरी तरफ लिखा गया इतिहास विदेशी आक्रान्ताओं और हमारे राजनितिक शत्रुओं ने अपने स्वामी मुगलों और आतातायियों के पक्ष में इतिहास लिखा और हमारे चारणों और भाटों ने हमारे लिए इतिहास लिखा किन्तु देश के विभाजन के बाद पंडित नेहरू जैसे लोगों ने हमारे राजनितिक शत्रुओं और विदेशी आक्रान्ताओं के लिखे इतिहास को मान्यता दी ताकि क्षत्रियो की छवि को धूमिल किया जासकें और हमारे परम्परागत इतिहासकारों के इतिहास को ख़ारिज कर दिया ताकि क्षत्रियो में स्वाभिमान के पुनर्जीवन का अवसर ही नहीं मिल पाए ! !,,,,,फिर भी लोकगीतों,भजनों,लोक-कथाओं,स्वतन्त्र कहानीकार और साहित्यकार मुंशी प्रेम चंद जैसे लोगों, मंदिर के शिलालेखो,के जरिये आमजनता के समक्ष क्षत्रिय गौरव पहुँच गया है !इसलिए शिक्षा के नाम पर जो इतिहास पढाया जाता है ,और मनोरंजन के नाम पर टी.वी. पर जो दिखाया जाता है वह असत्य के आलावा और कुछ नहीं है !!!! ऐसे में हम क्षत्रिय जो समस्त चर-अचर ब्रह्मांड के रक्षक है, क्या केवल अपने धर्म ,संस्कृति और गौरव की रक्षा के लिए भी नहीं जागेंगे ???? तब धिक्कार है ऐसे कायरता और नपुंसकता भरे जीवन को ,,,,,,,,,

"जय क्षात्र-धर्म"
कुँवरानी निशा कँवर चौहान

Sep 22, 2013

नेताओं की चालें और हथकंडे

राजनीति में सत्ता में बने रहने के लिये राजनीतिज्ञ प्राचीन काल से ही तरह तरह की चालें व हथकंडे अपनाते आये है, आजकल के राजनेता भी अपने पूर्वर्ती राजनेताओं की तरह हथकंडे अपनाने में लगे है, विरोधियों को निपटाने या अपने पक्ष में करने के लिए विभिन्न हथकंडे अपनाते है तरह तरह की चालें चलते है, इन हथकंडों में राजनेता न अपनी पार्टी का फायदा देखते ना अपने उन समर्थकों के हितों का ख्याल रखते जिनके वोटों रूपी कंधे पर चढ़ वे सत्ता के शिखर पर पहुंचे होते है| वे सिर्फ और सिर्फ अपना हित साधते है और हम मतदाता फालतू ही उनके समर्थन में या किसी पार्टी की विचारधारा के मानसिक गुलाम बन उनके हित साधन के औजार बन जातें है|

ऐसा ही एक उदाहरण निम्न है जिसमें एक वर्तमान नेता जी की चालों व हथकंडों पर विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर प्रकाश डाला गया है-

राजस्थान में एक विधानसभा क्षेत्र है डीडवाना, जहाँ के एक विधायक वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार में मंत्री थे, डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में जाट मतदाता पारम्परिक रूप से कांग्रेस को वोट देते है तो राजपूत मतदाता भाजपा के पारम्परिक वोट है, इस क्षेत्र में कायमखानी मुसलमान भी अच्छी खासी संख्या में है जिनके पूर्वज कभी राजपूत थे अत: इनका अब भी राजपूत समाज के पारस्परिक संबंध अच्छे है, इन्हीं सम्बन्धों को देखते हुए भाजपा उक्त विधानसभा क्षेत्र से मुस्लिम प्रत्याशी उतारती है ताकि राजपूत, कायमखानी वोटों के सहयोग से सीट जीती जा सके| और उसका यह प्रयोग तत्कालीन चुनावों में सफल भी रहा, जब भाजपा ने युनुस खान को डीडवाना विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरा|

युनुस खान के चुनाव प्रचार में राजपूत युवाओं ने दिलोजान से अपनी भागीदारी निभाई और उन जाट बहुल क्षेत्रों में जहाँ युनुस खान को घुसने के लिए संघर्ष करना पड़ता था वहां सभाएं तक करवाई| श्यामप्रताप सिंह रुवां जैसे कार्यकर्ताओं ने अपनी गाड़ियाँ यूनस खान के प्रचार में झौंक साम्प्रदायिक सदभाव की मिसाल तक कायम की| ज्ञात हो उक्त चुनाव में श्यामप्रताप सिंह की एक गाड़ी कांग्रेसियों के पथराव में पूरी तरह टूट कर ख़त्म हो गयी थी| आखिर चुनाव में युनुस खान जीते और वसुंधरा सरकार में मंत्री बनाये गये|

उनके कार्यकाल में ही जून २००६ में डीडवाना में शराब व भूमाफिया के दो गुटों के गैंगवार में एक जीवणराम नाम के जाट की मृत्यु हो गयी जिसे इन माफिया गैंगों व राजनेताओं ने अपने बचाव, सहयोग प्राप्त करने व राजनैतिक फायदे हेतु जातिय झगड़े का रूप दे कर प्रचारित कर दिया| और जातिय झगड़ा दिखाने हेतु कई निर्दोष राजपूत युवकों को हत्याकांड में फंसा दिया|

चूँकि चुनावों में राजपूत मतदाताओं ने तत्कालीन मंत्री युनुस खान को वोट व समर्थन दिया था अत: निर्दोष राजपूत युवकों को झूंठे मुकदमें से बचाने हेतु समाज का एक प्रतिनिधि मंडल जयपुर मंत्री युनुस खान के बंगले पर मिलने गया| लेकिन युनुस खान ने इस मामले में अपने विरोधियों से मिलकर उन्हें अपना बनाने का षड्यंत्र रचा और जो राजपूत युवा उस कांड से पहले उनके बेडरूम तक में बिना किसी रूकावट के चले जाया करते थे, मंत्री जी ने उन्हें भी मिलने के लिए तीन तीन घंटे इन्तजार करवाना शुरू कर दिया| और गैंगवार में घायल जो कभी मंत्री जी के कट्टर विरोधी थे और अस्पताल में भर्ती थे से चुपचाप तत्कालीन मंत्री मिलने गए और समझौता कर लिया| हालाँकि मिलने की बात पर तत्कालीन मंत्रीजी इंकार करते है पर उनके उस गोलीकांड के घायलों से मिलने के वक्त उनकी सुरक्षा में लगी पुलिस की ड्यूटी जो पुलिस थाने की “आम रोजनामचा” रिपोर्ट में दर्ज है पढने के बाद साफ़ हो जाता है कि तत्कालीन मंत्री जी सवाई मानसिंह अस्पताल में डीडवाना गोली कांड के घायलों से मिलने गए थे| (प्रमाण के लिए आप यहाँ क्लिक पुलिस के “रोजनामचा आम” की आरटीआई से प्राप्त प्रमाणित प्रति यहाँ देख सकते है जिसमें स्पष्ट लिखा कि उस रोज तत्कालीन मंत्री जी की सुरक्षा में कौन कौन पुलिसकर्मी तैनात किये गए और मंत्रीजी अस्पताल किससे मिलने आये थे)

एक विधायक अपने क्षेत्र के किसी भी घायल व्यक्ति या गुट से मिलने आता तो किसी को कोई आपत्ति नहीं पर यदि यही कार्य वह चोरी छुपे करे और झूंठ बोले तब उसकी नियत पर शक होना लाजिमी है|

इतना नही नही इन तत्कालीन मंत्रीजी की दूसरी चाल या हथकंडा देखिये- उन्होंने राजपूत समाज के प्रतिनिधि मंडल जो निर्दोष युवकों के मुकदमें से बचाने की अपील करने गए थे से कहा कि – “इसके लिए मुझे मुख्यमंत्री जी बात करनी पड़ेगी और चूँकि आप नागौर जिले राजपूत है अत: नागौर जिले के एक मात्र मंत्री गजेन्द्र सिंह जी खिंमसर मेरे साथ जाये तो अच्छा रहेगा सो आप एक बार गंजेंद्र सिंह जी खिंमसर के पास जाकर उनसे बात करे|”

यह सून प्रतिनिधिमंडल गजेन्द्र सिंह जी खिंमसर के पास गया और उनसे निर्दोष युवकों को बचाने हेतु युनुस खान के साथ मुख्यमंत्री से मिलने की बात कही, पर गजेन्द्र सिंह जी खिंमसर ने प्रतिनिधि मंडल को किसी बहाने टरका कर वापस युनुस खान के पास भेज दिया| जब प्रतिनिधि मंडल के लोग वापस युनुस खान के बंगले पर आये और उनसे बातचीत करने लगे तभी युनुस खान के पास गजेन्द्र सिंह खिंमसर का फोन आया, सूत्रों के अनुसार युनुस खान ने गजेन्द्र सिंह जी से बात करते समय फोन का स्पीकर ऑन कर दिया ताकि वे जो कहे वहां उपस्थित राजपूत समुदाय के लोग सून सके|

गजेन्द्र सिंह जी फोन पर युनुस खान से कहने लगे कि – “अपने क्षेत्र के इन फफूंद राजपूतों के मेरे पास मत भेजा कर अपने आप इनसे जैसा चाहे निपट लिया कर|(कुछ ऐसे ही घटिया शब्द गजेंद्रसिंह खिंमसर ने प्रयोग किये, इसीलिए हम कहते है कि ये किले, महलों वाले आम राजपूत को राजपूत तब तक ही मानते है जब तक उसकी भावनाओं का दोहन करना होता है)”

इस तरह की बात कर युनुस खान ने एक तीर से दो शिकार कर लिये पहला- गंजेंद्र सिंह खिंमसर की सोच को राजपूत प्रतिनिधियों के आगे नंगा कर दिया और दूसरा राजपूतों को बिना कुछ कहे यह भी जता दिया कि- “देखा आपके अपने आपके लिए कुछ नहीं करते तो मुझसे उम्मीद क्यों ? जबकि मतदाता उसी से उम्मीद करेगा जिसे वह अपना प्रतिनिधि चुनता है| यदि डीडवाना क्षेत्र के मतदाताओं को किसी सहायता की आवश्यकता होती है तो उसी क्षेत्र के जन प्रतिनिधि को बिना जात-पांत देखे कानून सम्मत सहयोग कर चाहिये|

पर नहीं ! इस मामले में युनुस खान ने खेल खेला कि राजपूत वोट तो उसे मिलते ही है जाट वोटों पर भी कुछ कब्ज़ा करलो, भले उसके इस हथकंडे से उसके परम्परागत समर्थकों का अहित ही हो|

खैर.....युनुस खान को उसके द्वारा किये का फल पिछले चुनावों में मिल गया जब एक राजपूत युवा श्यामप्रताप सिंह ने उसके कृत्यों से नाराज हो उसके खिलाफ चुनाव लड़ा और युनुस खान को चुनाव हरा दिया| इस बार भी श्याम प्रताप सिंह बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में है और सूत्रों के अनुसार युनुस खान पिछली हार के अनुभव से सबक ले डीडवाना से चुनाव नहीं लड़ने के मूड में है पर लगता है भाजपा बिना सोचे समझे व सबक लिए फिर उसे चुनाव में उतारकर बलि का बकरा बनाने में जुटी है|

नोट : यहाँ यह सब लिखने का कारण सिर्फ और सिर्फ इन तथाकथित समाज के ठेकेदार नेताओं के हथकंडों व राजनैतिक चालों से आम लोगों को जागरूक करना है ताकि ये नेतागण आम लोगों की जातिय भावनाओं का अपने हित में दोहन ना कर सके|

आप किसको समर्थन कर रहें है ? किसको नहीं ! ये आपके विवेक पर है और ये आपका लोकतांत्रिक अधिकार भी है कि आप अपनी मर्जी से किसी को चुने !!

Sep 14, 2013

सामाजिक संगठन या समाज के ठेकेदार ??

राजस्थान में विधानसभा के लिए चुनावों के लिए विभिन्न दलों व उम्मीदवारों में अपनी अपनी जीत के लिए मतदाताओं को लुभाने हेतु चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है| साथ ही विभिन्न जातियों के जातिय सामाजिक संगठन भी अपनी अपनी जाति का विधानसभा में प्रतिनिधित्व बढाने हेतु अपनी जाति के ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव में जिताने हेतु अपने जातिय मतों की लामबंधी अपने जाति के उम्मीदवार के पक्ष में करने में लगे है|

वहीँ कई जातिय संगठनों के कर्ताधर्ता अपने व्यक्तिगत फायदे या राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए अपने सामाजिक संगठन के प्रभाव का इस्तेमाल अपने समाज की जातिय भावनाओं का दोहन करने में कार्यरत है| ऐसे तत्व राजनैतिक दलों से अपने जातिय वोटों की सौदेबाजी कर फायदा उठाने में लगे है|

इस तरह का कार्य में हमारे समाज के भी एक अग्रणी प्रतिष्ठित संगठन के कुछ लोग लगे है, जो अपने राजनैतिक आकाओं को खुश करने के लिए चुनाव लड़ रहे अपने स्वजातिय बंधुओं के खिलाफ अभियान चलायें हुए है| ऐसे ही एक संगठन के कर्ताधर्ताओं के रूप में विख्यात या कुख्यात एक तथाकथित सामाजिक नेता समाज के चुनाव लड़ रहे बंधुओं के खिलाफ समाज को बरगलाने व उन्हें हराने के कुकृत्य में लगे है|

सूत्रों के अनुसार कल इस व्यक्ति ने डीडवाना शहर में भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार के पक्ष में समाज के लोगों की सभा कर भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की| ज्ञात हो इस विधानसभा क्षेत्र से समाज के एक बंधू श्यामप्रताप सिंह रूवां चुनाव लड़ रहे है और वे इस बार जीतने की पूरी स्थिति में भी है,श्यामप्रताप ने पिछली बार भी डीडवाना से चुनाव लड़ा था और इसी व्यक्ति ने भाजपा के मुस्लिम प्रत्याशी के समर्थन में समाज के वोट दिलवा श्यामप्रताप की हार सुनिश्चित करवाई थी|

सूत्रों के अनुसार खिमसर विधानसभा में एक और समाज बंधू दुर्गसिंह चौहान इस बार भी जीतने की स्थिति में है उसके खिलाफ भी यह शख्स कल सामाजिक संगठन के नाम पर सभा कर एक ऐसे भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने की अपील करने वाला है जिस उम्मीदवार पर १९७१ में दिलीप सिंह नामक एक राजपूत युवा के खून से हाथ रंगे होने का आरोप है, पिछली बार भी इस विधानसभा क्षेत्र से ऐसे ही समाजद्रोही व्यक्तियों व नेताओं द्वारा हनुमान बेनीवाल को भाजपा से टिकट दिलवा कर जिताया था जो बाद में भाजपा सहित इन नेताओं के लिए भस्मासुर साबित हुआ| और अभी हाल ही के विश्व विद्यालय चुनाव में इसी विधायक ने जोधपुर में हमारे समाज के खिलाफ जातिय भावनाएं भड़काते हुए समाज के कुछ युवकों पर कातिलाना हमला करवाया था| जिसके बाद जोधपुर शहर में जातिय संघर्ष छिड़ा|

भारतीय लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी मनमर्जी से मत देने व किसी दल का प्रचार आदि करने का मौलिक अधिकार है अत: उपरोक्त व्यक्ति भी अपने इस मौलिक अधिकार का प्रयोग करते हुए यदि किसी राजनैतिक दल की सदस्यता ग्रहण कर उसका प्रचार व समर्थन करता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिये पर यदि कोई व्यक्ति समाज के नाम पर राजनीति करे, सामाजिक संगठन के नाम पर राजनीति करे, समाज के वोटों का सौदा किसी दल से अपने निजी फायदे या राजनैतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए प्रयोग करे, ऐसा कुकृत्य किसी भी समाज को कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता| यह संगठन जिसके नाम का यह शख्स फायदा उठा रहा है उसकी स्थापना समाज को राजनीति सहित हर क्षेत्र में आगे बढाने के लिए हमारे महापुरुषों ने की थी पर लगता है इस संगठन के लोग अपने मूल उद्देश्य से भटक गए और इनका विरोध करने वालों को ये समाज विरोधी कह प्रचारित करते है ठीक वैसे ही जैसे धर्म के नाम पर दुकानदारी करने वाले पंडे आजतक हिन्दू धर्म की आड़ में अपने खेल खेलते आये है|

बंधुओं उपरोक्त प्रतिष्ठित संगठन में आज भी बहुत से अच्छे समाज सेवी लोग बिना किसी निजी लाभ के कार्यरत है पर उनके अच्छे कार्यों का दोहन यह एक व्यक्ति अपनी निजी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति करने में लगा है और संगठन के शीर्ष नेतृत्व का भी इस व्यक्ति को मौन समर्थन है| जिस तरह एक मछली पुरे तालाब को गन्दा कर देती है ठीक उसी तरह यह एक व्यक्ति इस प्रतिष्ठित संगठन को अपने कृत्यों से बदनाम कर समाज की नजरों में गिराने का कार्य कर रहा है| आज समाज के जागरूक लोग सिर्फ इस व्यक्ति द्वारा संगठन के नाम का गलत इस्तेमाल पर आलोचना कर विरोध कर रहे है यदि संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने इसका समर्थन जारी रखा तो वो दिन दूर नहीं जब समाज के जागरूक लोगों की आलोचना व विरोध का शिकार सीधा यह संगठन बनेगा|

जिस तरह से इस संगठन के लोगों ने राजस्थान के दो सौ विधानसभा क्षेत्रों में सभाएं कर एक दल विशेष को समाज के वोट दिलवाने का कार्य शुरू किया है उससे साफ जाहिर होता है कि ये तथाकथित समाज सेवी लोग समाज हित की बात करने की आड़ में समाज के ठेकेदार बन गए है जो समाज के वोटों का किसी दल से अपने निजी हित के सौदेबाजी कर रहे है|

श्री क्षत्रिय वीर ज्योति, राजपूत युवा परिषद् व जय राजपुताना संघ के कार्यकर्ताओं ने इस संगठन के इस कृत्य पर भारी नाराजगी जताते हुए समाज के बंधुओं से अपील की है कि – जहाँ समाज का कोई बंधू चुनाव लड़ रहा है और ऐसे तत्व उसके खिलाफ समाज को गुमराह करने आते है तो उनकी बातों में ना आयें और उनका बहिष्कार करें|

यदि यह व्यक्ति अपने समाज बंधू उम्मीदवारों के खिलाफ अपना अभियान बंद नहीं करता है तो फिर इनके व संगठन के नाम सहित इनके कुकृत्यों को उजागर किया जायेगा|

Sep 11, 2013

हम राजपूत इसी लायक तो नहीं ?

बंधुओं पिछले दिनों जोधपुर यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव संपन्न हुए और हम वहां बहुसंख्यक होने के बावजूद हारे, इसमें जीतने वाले की कोई प्रतिभा का कमाल या उसकी रणनीति नहीं थी बल्कि हमारी बेवकूफी व समाज के स्वाभिमान को ताक पर रखकर अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा जिम्मेदारी थी| हमें दोनों राष्ट्रीय दलों से समर्थित छात्र संगठनों से टिकट मिलने पर जीतने की संभावना वाले उम्मीदवार के पक्ष में वोट कर उसकी जीत सुनिश्चित करनी चाहिये थी पर यह बात हमारी समझ में नहीं आई और हम लड़ते रहे|

नतीजा आपके सामने रहा, हमारे दोनों लोग चुनाव हारे और नगण्य संख्या वाले समुदाय का उम्मीदवार चुनाव जीता, यही नहीं इस जीत से उत्साहित उसके समर्थकों ने आप पर हमला करने की धृष्टता भी की, और उनके हमले में जब हमारे लोगों के पिछवाड़े पर चाकुओं के वार हुए तब आपको अक्ल आई और आपने आपसी लड़ाई भूल एकता कर विरोधियों का मुकाबला भी किया और उन्हें सबक भी सिखाया| पर आप जब चेते तब तक आप सब कुछ खो चुके थे| और आपको पता है कि आपकी पीठ पर वार करने का षड्यंत्र रचने वाला वही भस्मासुर था जिसे आपके दो प्रिय नेताओं ने जो पूर्व मंत्री है, पैदा किया था|

पिछले चुनावों में पैदा किये इस भस्मासुर के कारनामों से कोई सीख नहीं लेते हुए आपके वे दोनों आदरणीय फिर एक भस्मासुर को जीवित कर आपके सामने खड़ा करने जा रहे है जबकि वह राक्षस वर्ष १९७१ में ही आपके एक स्वजातिय का बंधू के खून से अपने हाथ रंग चूका है|

सोशियल साइट्स पर मैं हर रोज बना लोगों की हरकतें देख भविष्यवाणी कर सकता हूँ कि - आपकी यह फितरत है कि आप एक जगह मार खाने के बाद भी संभलेंगे नहीं, और शायद आप संभालना भी नहीं चाहते|

अब सोशियल साईट फेसबुक पर कल देखे एक उदाहरण का जिक्र करता हूँ, जहाँ फिर हम जोधपुर यूनिवर्सिटी वाला खेल खेलने को लालायित है-
“कल एक बना ने फेसबुक पर नरपत सिंह जी राजवी के विद्याधरनगर से प्रचार अभियान छड़ने की फोटो लगाई, उस फोटो पर अन्य समुदाय से कोई विरोध करने नहीं आया, यदि कोई आया तो समर्थन करने ही आया भले ही वो वोट दे या न दे, पर समर्थन देकर तो गया ही|

पर उसी फोटो पर बना लोगों को राजवी साहब की आलोचना करते हुए आपस में बहस करते देखा, राजवी साहब के पुत्र अभिमन्यु बना ने वहां असंतुष्ट बनाओं की नाराजगी दूर करने की भी कोशिश की पर उनकी उपस्थिति देख बना लोगों ने संस्कारहीन भाषा तक का प्रयोग कर लिया| देख कर दुःख के साथ अफ़सोस भी हुआ कि जिन्हें कुछ पता नहीं वे महज अपनी हैकड़ी दिखाने को कुछ भी बकवास कर जाते है| ऐसे तत्वों को रतन सिंह भगतपुरा व कुछ अन्य लोगों द्वारा समझाते हुए भी देखा गया पर अपने उम्रदराज लोगों की बात भी इन तत्वों को समझ नहीं आई| जिस तरह बना लोगों को वहां रतनसिंह भगतपुरा ने बताया कि- वे जब भी राजवी साहब के घर गए है, राजवी साहब लोगों से बातचीत करते ही मिले है, भगतपुरा लिखते कि- उन्होंने कई बार तो राजवी साहब को घर के बाहर बैंच पर ही बैठे देखा है, साथ ही उनके घर पर प्रवेश के समय पुलिस होने के बावजूद कोई पूछताछ नहीं करता, ना कोई रोकता है,| अब बताईये भला एक पूर्व उपराष्ट्रपति के घर इतनी आसानी प्रवेश किया जा सकता है ? मेरी नजर में तो कोई सांसद भी अपने घर में प्रवेश को इतना आसान नहीं रहने देता, पर कोई जाये ही नहीं तो राजवी साहब अब हर घर, हर व्यक्ति से मिलने तो आने से रहे, राजवी साहब ही क्यों कोई एम.एल.ए तो क्या पार्षद व वार्डपंच भी एक एक व्यक्ति से मिलने घर नहीं आता|

फिर किसी भी विधायक से हमें अपने छोटे छोटे व्यक्तिगत काम करवाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिये, पर आजकल लोग चाहते है कि उनके घर बच्चे के नामकरण पर भी विधायक जी आयें और उनके बाद वे अपने पड़ौसियों पर रॉब झाड सके कि देखो- विधायक जी हमारे खास है| यह प्रवृति आजकल ज्यादा ही घर कर गयी खासकर हमारी नई पीढ़ी में|

मान लिया किसी राजपूत विधायक ने हमारा काम नहीं किया, और उसे हम हरा देंगे तो क्या गारंटी है कि दूसरी जाति वाला हमारे हर काम आयेगा| फिर जैसा कि उस बहस में रतन सिंह भगतपुरा ने लिखा- “स्व.बाबोसा ने समाज हित में जितने कार्य किये है उसके लिए समाज उनका सदियों तक ऋणी रहेगा, ऐसे में हमें उनके परिवार के किसी सदस्य का विरोध किसी हालत में नहीं करना चाहिये|” भगतपुरा जी की बात से मैं एकदम सहमत हूँ बल्कि मैं तो कहूँगा आज स्व.बाबोसा के दामाद जी के आगे किसी राजपूत को चुनाव ही नहीं लड़ना चाहिये| यदि कोई ऐसा करता है तो उसे समाजद्रोही घोषित समाज से निष्कासित कर देना चाहिये| क्योंकि स्व.बाबोसा की अनुपस्थिति में यदि हम उनके परिवार को हारने का कुकृत्य करते है(वो भी उस परिस्थिति में जब भाजपा का एक खास वर्ग इस परिवार को राजनीति से बाहर के करने के षड्यंत्र में लगा है) तो वह स्व.बाबोसा के प्रति गद्दारी होगी, एक ऐसे व्यक्ति के किये कार्यों के प्रति गद्दारी होगी जिन समाज हित के कार्यों को उन्होंने बिना ढिंढोरा पीटे, बिना कोई क्रेडिट लिए चुपचाप कर डाला, आज स्व.भैरोंसिंह जी १९५२ की विधानसभा में जाटीस्तान की मांग की हवा नहीं निकाली होती तो आपका राजस्थान ऐसा नहीं होता, उसमें जातिय आधार पर कब का जाटीस्तान बन चूका होता और आप उस जाटीस्तान में उसी तरह के खौफ में रहते जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश में हिन्दू रहते है| स्व.भैरोंसिंह जी नहीं होते तो आज आपको जितने राजपूत अधिकारी नजर आते है उनकी जगह कोई और नजर आते, स्व.बाबोसा नहीं होते तो आज जिन किलों व हवेलियों की फोटो आप फेसबुक पर चिपका कर गर्व से डायलोग लिखते फिरते है वे कब की ढूंढ़ों में तब्दील हो जाती या जमीन पर छितराई पड़ी अपनी मौत पर बेबसी के आंसू बहा रही होती|

स्व.बाबोसा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री बन, देश के उपराष्ट्रपति बन आपके समाज के स्वाभिमान को बढाया ही है, स्व. बाबोसा राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ते तो एक राजपूत महिला राष्ट्रपति के स्थान पर कोई शिंदे,फिंदे राष्ट्रपति होते| प्रतिभा जी को महामहिम बनाने का श्रेय भी स्व.बाबोसा भैरोंसिंह जी को ही जाता| और हम ! हम उनके ही परिवार की खिलाफत महज यह तर्क देते हुए करते है कि राजवी साहब मिलते नहीं| अरे करम फूटो वो मिले नहीं नहीं मिले उस परिवार ने तुम्हारे लिए बिना बोले, बिना मिले कितना कुछ कर दिया उसका तो ख्याल रखो, उसका ऋण चुकाने को तो तत्पर रहो|

खैर....मेरे इस लेख पर भी मुझे पता है कई बना लोग प्रतिकूल टिप्पणियाँ करेंगे और कहेंगे कि विक्रम सिंह भी तो राजपूत है उन्हें क्यों हराया जाय ? इसका मेरे पास एक ही जबाब है कि स्व.बाबोसा के परिवार के सामने किसी क्षत्रिय को चुनाव लड़ना ही नहीं चाहिये, फिर भी लड़ता है तो आप उसे समर्थन ना दें, और देते है तो फिर महाराणा प्रताप की जगह राजा मानसिंह को अपना आदर्श पुरुष मानने लग जायें|

Sep 5, 2013

राजपूत उम्मीदवार के खिलाफ किसी भी नेता के झांसे में ना आये राजपूत मतदाता

पिछले राजस्थान विधानसभा चुनावों में खींवसर विधानसभा क्षेत्र से दुर्गसिंह चौहान ने बिना किसी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी की टिकट के चुनाव लड़ा और विजेता भाजपा के हनुमान बेनीवाल को कड़ी टक्कर दी| उस चुनाव में भाजपा को 57500 के लगभग मिले तो दुर्गसिंह चौहान को 34300 मत मिले वहीँ कांग्रेस सिर्फ 17000 मतों पर सिमट गयी थी|

पिछले चुनाव में उक्त विधानसभा क्षेत्र से हनुमान बेनीवाल को भाजपा की और से टिकट दिलाने व उसे जिताने के लिए भाजपा के दो राजपूत नेताओं ने सहायता की लेकिन हनुमान बेनीवाल भाजपा सहित इन दोनों राजपूत नेताओं के लिए भस्मासुर साबित हुआ| इस बार वही दोनों राजपूत नेता जो भाजपा की पूर्व सरकारों में मंत्री भी रह चुके है ने जीतने की संभावना वाले दुर्गसिंह चौहान को टिकट ना दिला कांग्रेसी मूल के विजय पुनिया को इस क्षेत्र से चुनाव में उतारने की लोबिंग कर रहे है व एक ऐसे व्यक्ति को चुनाव जीताने के लिए राजपूत मतदाताओं को बरगलाने में लगे है जिस पर 1971 में एक राजपूत दिलीप सिंह राठौड़ की हत्या में शामिल होने का आरोप है|

भाजपा के इन दोनों राजपूत नेताओं द्वारा एक राजपूत के हत्यारे व्यक्ति का समर्थन करने पर राजपूत युवाओं व सामाजिक संगठनों में भारी रोष है जो फेसबुक सहित सोशियल साइट्स पर अभिव्यक्त किया जा रहा राजपूत युवाओं का उग्र रोष साफ़ देखा जा सकता है|

यही नहीं पिछले दिनों नागौर जिले में भाजपा की सभा में मंच से इन्हीं दोनों राजपूत नेताओं में से एक ने कहा कि – “राजपूत समाज ने विजय पुनिया को माफ़ कर दिया है|” मंच से इस बयान के बाद से ही राजपूत युवा सोशियल साइट्स पर उस कथित नेता से सवाल पुछ रहे है कि – “समाज के एक व्यक्ति के हत्यारोपी को पुरे समाज की और से माफ़ करने वाले वे नेता क्या समाज के ठेकेदार है ? जो पुरे समाज की और से उस हत्यारोपी को पाक साफ़ होने का सर्टिफिकेट बांटते घूम रहे है|”

क्षत्रिय वीर ज्योति व अन्य राजपूत समाज के सामाजिक संगठनों ने इन दोनों नेताओं को उक्त विधानसभा क्षेत्र से दुर्गसिंह के खिलाफ किसी भी तरह का प्रचार न करने व दुर्गसिंह जीत में रोड़ा न बनने की अपील के साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उपरोक्त कथित नेता समाज द्रोही कार्यों से बाज नहीं आये तो समाज को मजबूर होकर उनके खिलाफ भी मतदान कर उन्हें सबक सिखाने को मजबूर होना पड़ेगा|

ज्ञात हो उक्त क्षेत्र से पिछला चुनाव हारने के बावजूद दुर्गसिंह आम जनता के बीच उनके सुख दर्द में भागीदार बने रह कर डटे रहे और पुरे पांच वर्षो तक वे आम जनता का कार्य करते रहे, बल्कि चुनाव जीतने वाले विधायक से भी कहीं ज्यादा दुर्गसिंह ने क्षेत्र में समय दिया व लोगों के कार्य करवाये| यही कारण है कि उक्त विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ 25000 राजपूत मत होने के बावजूद दुर्गसिंह 34300 मत लेने में कामयाब हुए थे| यह उनकी आम जनता व अन्य जातियों में स्वीकार्यता का प्रमाण है|

ठीक इसी तरह डीडवाना विधानसभा को लेकर भी राजपूत युवाओं में भाजपा व राजपूत समाज के एक प्रभावी सामाजिक संगठन को लेकर राजपूत युवाओं में भारी नाराजगी है| डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में राजपूत मतदाता निर्णायक स्थिति में है और इसका उदाहरण उम्मेदसिंह खोजास पूर्व में निर्दलीय चुनाव जीत कर पेश कर चुके है, राजस्थान में राजपूत भाजपा के परम्परागत मतदाता रहे है अत: भारतीय जनता पार्टी राजपूतों को बेचारा समझ टिकट नहीं देती और अधिक मत होने के बावजूद यह सोचकर कि बेचारे राजपूत हमें वोट देने के अलावा जायेंगे कहाँ ? किसी और जाति के उम्मीदवार को टिकट देकर थोप देती है| ज्ञात हो राजस्थान में राजपूत परम्परागत तौर पर कांग्रेस विरोधी है और उनकी इसी कमजोरी को भाजपा अपने फायदे में भूनाती रही है|

और भाजपा की इस सोच को पिछले दिनों राजस्थान में भाजपा की एक सभा में पूर्व आरपीएससी अध्यक्ष और वर्तमान भाजपा नेता सी.आर.चौधरी ने अपने भाषण में यह कर जाहिर भी कर दिया कि- ब्राह्मण, बनिये, राजपूत भाजपा के मानसिक गुलाम है इन्हें भाजपा को वोट देने के अलावा कोई चारा नहीं अत: इनके वोटों से इन पर ही राज करों|


डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में भी पिछली बार राजपूत समाज के श्यामप्रताप सिंह को भाजपा द्वारा टिकट नहीं दिए जाने पर समाज ने उन्हें निर्दलीय चुनाव मैदान में उतार भाजपा के पूर्व मंत्री युनुस खान को चुनाव में हरा अपनी ताकत दिखा दी, इस बार भी श्यामप्रताप सिंह बसपा की टिकट पर चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे है जिसके चलते भाजपा उम्मीदवार पूर्व मंत्री डीडवाना से चुनाव लड़ने में कतराते नजर आ रहे है|

पर राजपूत समाज का अग्रिणी व प्रतिष्ठित सामाजिक संगठन के कर्ता धर्ताओं द्वारा अपने निजी फायदे के लिए पिछले चुनाव में भी भाजपा का समर्थन करना व इस बार भी उनके द्वारा एक राजपूत उम्मीदवार के खिलाफ भाजपा का समर्थन करना राजपूत युवाओं व सामाजिक संगठनों को रास नहीं आ रहा है और वे सोशियल साइट्स पर इस संगठन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाल रहे है|

क्षत्रिय वीर ज्योति ने राजपूत युवाओं का आव्हान किया है कि वे किसी भी राष्ट्रीय पार्टियों के जर खरीद मानसिक गुलाम राजनेताओं के झांसे में ना आये और अपनी जातिय भावनाओं का दोहन ऐसे समाजद्रोही संगठनों को ना करने दे|


ज्ञात हो “क्षत्रिय वीर ज्योति” संगठन राजपूत करणी सेना, राजपूत युवा परिषद्, जय राजपुताना संघ आदि विभिन्न दर्जनों राजपूत सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राजनैतिक चिंतन कर इन चुनावों में राजस्थान विधानसभा में ज्यादा से ज्यादा राजपूत विधायक भेजने को क्रियाशील है| और इस हेतु विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में राजपूत राजनैतिक चिंतन शिविर का आयोजन कर समाज को राजनैतिक तौर से जागृत करने में लगा है

Sep 3, 2013

क्षत्रिय वीर ज्योति का बानसूर में राजनैतिक चिंतन शिविर संपन्न

31 अगस्त 2013 शनिवार शायं 6 बजे से अलवर बानसूर के पास भर्तहरी की तपोभूमि, अरावली की हरियाली से आच्छादित वादियों के बीच रमेश सिंह शेखावत के कृषिफार्म पर क्षत्रिय वीर ज्योति की और से आयोजित समाज के विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ राजनैतिक चिंतन शिविर संपन्न हुआ|

शिविर में आठ घंटे से लम्बी चली चिंतन बैठक में क्षत्रिय वीर ज्योति के साथ राजपूत युवा परिषद्, करणी सेना, जय राजपुताना संघ व विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों व प्रतिनिधियों के साथ बानसूर विधानसभा क्षेत्र के सैंकड़ों राजपूत युवाओं व बुजुर्गों ने वर्तमान समय में राजपूत समाज की राजनैतिक स्थिति पर गहन मंथन करते हुए माना कि धीरे धीरे विभिन्न पार्टियों द्वारा राजपूत समाज को एक सुनियोजित षड्यंत्र के अंतर्गत देश के राजनैतिक परिद्रश्य से दूर किया जा रहा है| आजादी के बाद राजस्थान की पहली 180 सीटों वाली विधानसभा में 66 राजपूत विधायक थे जो वर्तमान विधानसभा की 200 सीटों में सिर्फ 25 पर राजपूत विधायकों की संख्या पर सिमट गये| इस तरह धीरे धीरे विधानसभा में राजपूत विधायक की कम उपस्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए आने वाले चुनाव में राजस्थान विधानसभा में 40 राजपूत विधायकों को पहुंचाने का संकल्प लिया गया व इस संकल्प को पूरा करने हेतु एक रणनीति बनाई गयी जिस पर सभी सामाजिक संगठन एक मत से सहमत हुए|

क्षत्रिय वीर ज्योति के राजेंद्र सिंह बसेठ ने इस रणनीति का खुलासा करते हुए इस पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि राजपूत समाज ने चिंतन के बाद तय किया है कि जिस विधानसभा क्षेत्र में राजपूत मतों की संख्या अधिक है उस क्षेत्र से सर्वप्रथम राष्ट्रीय राजनैतिक दलों से राजपूत उम्मीदवार को टिकट देने की मांग की जायेगी| किसी भी राष्ट्रीय दल द्वारा राजपूत उम्मीदवार को टिकट दिए जाने के स्थिति में उसका समाज द्वारा हर प्रकार से सहयोग व समर्थन किया जायेगा, यदि दो राष्ट्रीय दल एक साथ राजपूत उम्मीदवार खड़ा करते है तो जीतने की अधिक संभावना वाले उमीदवार के पक्ष में समर्थन दिया जायेगा| दोनों राष्ट्रीय दलों द्वारा राजपूत को टिकट नहीं दिए जाने की स्थिति में किसी भी दल से चुनाव लड़ने वाले राजपूत उम्मीदवार को समर्थन देकर उसकी जीत सुनिश्चित की जायेगी| राजपूत मतों की अधिकता वाले स्थानों पर किसी भी दल से राजपूत उम्मीदवार को टिकट नहीं देने की स्थिति में समाज अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा और क्षत्रिय वीर ज्योति अन्य सभी सामाजिक संगठनों को साथ लेकर समाज की और से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए धन व साधनों की व्यवस्था करेगी|

इसके लिए क्षत्रिय वीर ज्योति के गणपत सिंह राठौड़ ने जो गुडगांवा में व्यवासायी है ने दस उम्मीदवारों को चुनाव सहायता के लिए एक एक लाख रूपये और चुनाव प्रचार तक एक एक गाड़ी की व्यवस्था का खर्च उठाने की घोषणा की|

इस चिंतन बैठक में बानसूर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस टिकट के प्रबल दावेदार धर्मेन्द्र राठौड़ के लिए टिकट पक्की करने की मांग की गयी और कांग्रेस द्वारा मांग नहीं मानने की दशा में रमेश सिंह शेखावत को राजपूत समाज की और से बानसूर से चुनाव में उतारने की घोषणा की|

ज्ञात हो अलवर की 5 विधानसभा सीटों से राजपूत उम्मीदवार चुनाव जीत सकतें है पर चूँकि कांग्रेस नेता व मंत्री भंवर जीतेन्द्र सिंह अपनी सांसद सीट पक्की रखने के लिए राजपूत उम्मीदवार की जगह अन्य जातियों के लोगों को टिकट दिलवाते है ताकि लोकसभा चुनाव में वे लोग अपनी जाति के वोट उन्हें दिला सके| इस तरह एक व्यक्ति के लिए जिससे आमजन का किसी कार्य हेतु मिलना भी दूभर होता है, चार राजपूतों का राजनैतिक कैरियर दाँव पर लगा दिया जाता है| ज्ञात हो बानसूर से कांग्रेस टिकट के दावेदार धर्मेन्द्र राठौड़ जो भवंर जितेन्द्र के खास है फिर भी पिछले चुनावों में उन्हें टिकट छोड़नी पड़ी और इस त्याग के बदले उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा वाला कोई पद मिला को समाज की बैठक में राजनैतिक रणनीति का पता चलने पर बैठक में दौड़े दौड़े आये जबकि आजतक वे भी समाज की बैठकों में आमंत्रण देने के बावजूद दुरी बनाये रखते है| यही नहीं उनके द्वारा इस रणनीति व भंवर जीतेन्द्र के खिलाफ समाज में रोष की सूचना देने पर भंवर जीतेन्द्र जो दोपहर अलवर पहुँचने वाले थे रात को अलवर आ धमके और सुबह होते ही समाज के लोगों को बुला कई कार्य नहीं करने के कारणों की मजबूरियां गिनाते हुए सफाई देने लगे उन द्वारा दी जा रही सफाइयों के वक्त उनके चेहरे पर समाज के रोष से पैदा खौफ साफ झलक रहा था, उनके झलकते डर को महसूस कर उपस्थित समाज के लोगों को पहली बार महसूस हुआ कि बिना डर के कोई नेता सीधे नहीं चलते|

चिंतन बैठक में साफ किया गया कि लोकसभा चुनाव में समाज भंवर जितेन्द्र सिंह के साथ है पर विधानसभा चुनाव में उन्हें अपनी मनमर्जी नहीं करने दी जाएगी|

इस चिंतन बैठक में भाजपा नेता देवीसिंह नरुका, क्षत्रिय वीर ज्योति के राजेन्द्र सिंह बसेठ, राजपूत युवा परिषद् के उम्मेद सिंह करीरी, कांग्रेस के राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त धर्मेन्द्र राठौड़, अजीत मामडोली, राजवीर चौहान के अलावा स्थानीय लोगों ने अपने अपने विचार व सुझाव रखे|

राजेंद्र सिंह बसेठ व उम्मेद सिंह करीरी ने खींवसर विधानसभा क्षेत्र में बसपा से चुनाव लड़ रहे दुर्गसिंह चौहान के खिलाफ एक भाजपा राजपूत नेता नेता द्वारा राजपूत वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश को समाज की भावनाओं के विपरीत कुकृत्य बताते हुए राजनैतिक दलों के जर खरीद मानसिक गुलाम बन चुके राजपूत नेताओं को इस तरह के हथकंडों से दूर रहने की चेतावनी व सलाह दी| साथ ही ऐसे नेताओं के बहकावे में न आने की समाज से अपील की|

क्षत्रिय वीर ज्योति ने तय किया है कि आगामी चुनावों में प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों को साथ लेकर बसपा, लोजपा सहित विभिन्न पार्टियों से चुनाव लड़ रहे राजपूत उम्मीदवारों का समर्थन व सहयोग करने के अलावा अलवर जिले की पांच सीटों पर राष्ट्रीय दलों द्वारा राजपूत उम्मीदवार नहीं उतारे जाने की स्थिति में समाज अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगा और अपनी राजनैतिक ताकत का अहसास करायेगा| बानसूर से रमेश सिंह के अलावा अलवर विधानसभा से बच्चू सिंह जी को चुनाव लड़वाने की सहमती भी बनी|

इसी रणनीति के तहत उम्मेदसिंह करीरी व राजेंद्रसिंह बसेठ ने खींवसर विधानसभा क्षेत्र में कुछ बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया ताकि समाज के लोगों में राजनैतिक चेतना जाग्रत कर लोकतंत्र में सिर गिनवाने की महत्ता समझाई जा सके|

Aug 9, 2013

( ** राजपूतों के इतिहास की चोरी ** )


लेख थोड़ा लंबा हो सकता है लेकिन इस संदर्भ मे आपके विचार जानना जरूरी है । क्षत्रियों का इतिहास सदियों से स्वर्णिम रहा है इसमे दो राय नहीं , लेकिन क्या आप जानते हैं आज उसी इतिहास को जाटों ने अपना इतिहास बताना शुरू कर दिया है ? जी हाँ ! क्योंकि आपका इतिहास कुछ एक इतिहास की किताबों मे सिमटा धूल फांक रहा है और उसी की हूबहू नकल आज इंटरनेट पे धड़ले से जाटों का इतिहास बताकर परोसा जा रहा है। हम शुरू से किसी भी प्रकार के जातिवाद संबन्धित लांछन से बचना चाहते हैं मगर अब बात अपने अस्तित्व पे आकर टिक गई गई।
जिस अस्तित्व को बचाने की लड़ाई मे पुरखों ने जौहर और शाका को गले लगा लिया था ,आज कुछ लोग उसे मिटाने पे तुले हैं। ये कहने भर से अब काम नहीं चलता  की राजपूतों की नकल करने से कोई राजपूत नहीं बन जाता, क्योंकि लोग वो ही सच समझते और मानते हैं, जो उन्हे पढ़ने या सुनने को मिलता है, और आज के दौरे मे लोग जितना ज्यादा इंटरनेट पे पढ़ते है उतना सायद किताबों मे भी नहीं पढ़ते।

इंटरनेट पे हमारे इतिहास को दरकिनार करने की जोरदार कोशिश की जा रही है। इसका कुछ उदाहरण आप नीचे दिये गए वैबसाइट लिंक मे देख सकते हैं।


( इसमे एक जगह लिखा है ,” जाट संघ में भारत वर्ष के अधिकाधिक क्षत्रिय शामिल हो गए थे. जाट का अर्थ भी यही है कि जिस जाति में बहुत सी ताकतें एकजाई हों यानि शामिल हों, एक चित हों, ऐसे ही समूह को जाट कहते हैं. जाट संघ के पश्चात् अन्य अलग-अलग संगठन बने. जैसे अहीर, गूजर, मराठा तथा राजपूत. ये सभी इसी प्रकार के संघ थे जैसा जाट संघ था. राजपूत जाति का संगठन बौद्ध धर्म के प्रभाव को कम करने के लिए ही पौराणिक ब्राहमणों ने तैयार किया था. बौद्धधर्म से पहले राजपूत नामका कोई वर्ग या समाज न था. [17] पौराणिक ब्राहमणों ने जिन नये चार नवक्षत्रियों को तैयार किया उनमें थे: 1.सोलंकी, 2. प्रतिहार, 3. चौहान और 4. परमार. यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि ये चारों वर्ग जाट गोत्रों में पहले से भी थे और अब भी विद्यमान हैं”


( इसमे लिखा है , राजस्थान में बिश्नोई जाटों को मिलाकर जाटों की कुल संख्या राजपूतों से दोगुनी है। इसलिए राजस्थान को राजपूताना कहना अनुचित है। इसे जाटिस्तान या जटवाड़ा कहना चाहिए। इसी प्रकार झुंझनू को शेखावाटी क्षेत्र कहना अनुचित है इसे जटवाटी क्षेत्र कहना चाहिए।राजस्थान में बिश्नोई जाटों को मिलाकर जाटों की कुल संख्या राजपूतों से दोगुनी है। इसलिए राजस्थान को राजपूताना कहना अनुचित है। इसे जाटिस्तान या जटवाड़ा कहना चाहिए। इसी प्रकार झुंझनू को शेखावाटी क्षेत्र कहना अनुचित है इसे जटवाटी क्षेत्र कहना चाहिए।J

अब इस से ज्यादा  लिखने से फायदा भी नहीं और किसी के पास इतना समय भी नहीं रहता , इसलिए आखिर मे इस बारे मे आपसे विचार व्यक्त करने की आशा करता हूँ और चाहता हूँ की इसके समाधान हेतु कुछ सुझाव दें। उपरोक्त साइटों पे जाकर गाली-गलौज करने वाला समाधान न सुझाए बल्कि अपने इतिहास को सहेजने का कोई उपाय बताएं ताकि इस धरोहर को बचाया जा सके। हमें भी अपने इतिहास की अंतरजाल (इंटरनेट) मे मौजूदगी दर्ज करवानी होगी वरना आने वाली पीढ़ियाँ वही मानेंगी जो इंटरनेट पे पढ़ेंगी क्योंकि कुछ सालों बात किताबों का अस्तित्व वैसे ही खतम हो जाएगा, जो कुछ होगा वो e-Books मे ही होगा।

( समस्त क्षत्रिय समाज की तरफ से )

/AK Rajput

 

Aug 1, 2013

 क्षत्रिय धर्म

जब क्षत्रिय शाषन करता था।
तो पुरा जगत भारत से डरता था॥

धीरे धीरे क्षत्रिय धर्म का लोप हुआ।
तब से अधर्मीयोँ का यँहा प्रकोप हुआ।

क्षत्रियोँ ने अपने धर्म और सँस्कारो को जब से छोङा है।
राम की मर्यादा और सत्य के बन्धन को जब से हमने तोङा है॥

जब से दुनीयाँ हमारा अपमान खुलेआम करती है।
भुगत रही है जनता आतँक की टोलीया उनका कत्ल खुलेआम करती है॥

लाखो तारो से भी एक सूरज का तेज भारी है।
क्योकी पथ नहिँ बदला है सुर्य देव ने इसिलिये उनका तेज आजतक जारी है॥

आह्रवान करता हु अपनालो क्षत्रिय धर्म और सँस्कारो को।
उठालो हनुमान की तरह बीङा देश से बाहर कर दो देश के गद्दारो को॥

जिस दिन सोया हुआ क्षात्र धर्म जाग जायेगा।
पाप, अधर्म और अन्याय अपने आप देश छौङ के भाग जाएगा॥
जय क्षत्रिय धर्म॥
जय क्षत्रिय एकता॥
जय भारत माता॥
हरीनारायण सिँह राठौङ