May 30, 2013

हम आप सभी से निवेदन करते ही कि आप सभी जोधा-अकबर नामक कथित धारावाहिक का विरोध करे …। यह इतिहास कि तोड-मरोड कर मन-गढत रची -रचाई झुटी कहानी है जो हमारा राष्ट्रप्रेमी समाज बर्दाश्त नही कर सकता है.…. जोधा नाम के पात्र को इतिहास मे पुष्टी नही है ! वह जयपूर के राजा कि दासी कि पुत्री थी जिसका नाम हरका था……जिस तथ्य को इतिहास में प्रमाण न हो .... जो कहानी आधारहीन तथा विवादस्पद हो उसका समर्थन क्यों किया जा रहा है? किवदंतियों को प्रमाणित इतिहास मत बनाओ .......आप राजपूताने के धधकते जौहर की ज्वालाओं को क्यों नजर-अंदाज कर रहे हो .......? स्वयं प्रिंस तुसी जी (हैदराबाद) ने भी इस बात का विरोध जताया था ! यह कोई जात-धर्म के सांप्रदायिक आधार पर संकीर्ण विचार-धारा फ़ैलाने का प्रयास बिलकुल नहीं है ....लेकिन मन-गढ़त कल्पनाओं का और झूटी कहानियों का स्वीकार क्यों करे???? चाटुकार लोगो ने ही ऐसी काल्पनिक किवदंतियों को जन्म देकर लोगों में भ्रम पैदा करने की कोशिश की है जो आज की बुद्धि को प्रमाण माननेवाली पीढ़ी कदापि स्वीकार नहीं करेगी। ऐसी कई धारावाहिक तथा फिल्मे भी अक्सर आती-जाती रहती है जिसमे ठाकुरों को खलनायक की भूमिका में दिखाया जाता है हम सबको इस बात का भी कड़ा विरोध करना चाहिए ..........हजारो साल तक इस राष्ट्र- संस्कृति की रक्षा के लिए अपने सर्वस्व को न्योछावर कर .....प्राणों का बलिदान देनेवाले नायकों की कौम को खलनायक बतानेवाली तमाम साजिशे हम सबको रोकनी चाहिए .....! उन तमाम निर्माता-दिग्दर्शकों को हमारा गौरवशाली इतिहास तथा अनुपम त्याग का अध्ययन करने की सख्त जरुरत है .....पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति की चकाचौंध में रहनेवाले ये लोग क्या जाने उस महान विरासत का महत्त्व?
हम अभिव्यक्ति की आज़ादी का अत्यंत सन्मान करते है लेकिन कला और अभिव्यक्ति के नाम पर किसी समुदाय को आहत करने के प्रयास की कड़ी निंदा भी करते है ....!
हम सब लोकतान्त्रिक एवं शांतिपूर्ण मार्ग से इस प्रयास का विरोध करे .....यह हम सबका मुलभुत अधिकार है ....! ख्याल रहे ----उचित शब्दों का आधार लेकर ही अपनी राय दे .......गलत भाषा या तरीका इस मिशन को गलत राह्पर ले जाता है ......सावधानी जरुर बरते .....इस मिशन में सभी राष्ट्रप्रेमी नागरिक तथा संघटन अपनी यथार्थ भूमिका निभाए ..........

SOME FACTS:

1) अकबरनामा में जोधा बाई का उल्लेख नहीं है।

2) तजुक ए जहांगीरी जिसमें जहांगीर की आत्मकथा है उसमें जोधा बाई का उल्लेख नहीं है।

3) अरब की कई सारे किताबों में ऐसा वर्णित है "ونحن في شك حول أكبر أو جعل الزواج راجبوت الأميرة في هندوستان آرياس كذبة لمجلس" (हमें यकिन नहीं है इस निकाह पर)

4) ईरान के " Malik National Museum and Library" की किताबों में भारतीय मुगलों का दासी से निकाह का उल्लेख मिलता है।


5)अकबर ए महुरियत में स्पस्ट रूप से लिखा है,"ہم راجپوت شہزادی یا اکبر کے بارے میں شک میں ہیں" (हमें राजपुत विवाह पर संदेह है क्योंकि राजभवन में किसी की आँखों में आँसु नहीं था तथा ना ही हिन्दु गोद भराई की रस्म हुई थी )

6) सिख धर्म के गुरू अर्जुन देव जी तथा हरगोविन्द जी ने ये बात स्वीकार किया था कि छत्रियों ने आज अपने बुद्धि का सदुपयोग करना सिख लिया है, “ਰਾਜਪੁਤਾਨਾ ਆਬ ਤਲਵਾਰੋ ਓਰ ਦਿਮਾਗ ਦੋਨੋ ਸੇ ਕਾਮ ਲੇਨੇ ਲਾਗਹ ਗਯਾ ਹੈ “ ( राजपुताना अब तलवार तथा बुद्धि दोनों का प्रयोगकरने लग गया है। )

कृपया आप निम्नलिखित मेल कॉपी कर bccc@ibfindia.com , response@zeenetwork.com , ibf@ibfindia.com , media@zeenetwork.com , jairajputanasangh@gmail.com इन पते पर भेजे …….


Respected Sir;
The Rajput Community is strongly opposing the serial named JODHA-AKBAR. This serial is based on the fake story which had no strong evidence. It is based on some baseless and imaginary literature. The eminent historians hadn't proved it. Rajputs had shaded their blood to protect the motherland from the foreign invaders. This serial dishonours our pride so it is our birth right to oppose it. We request you on the behalf of Rajput community and the Rajput organzations to stop making and broadcasting this serial. Rajput community is one of the major community in this Nation and so their feelings should be regarded and respected. The warrior race couldn't bear the distorting with their history.
We hope that the concerned authorities should understand our feelings and stop this effort.
THANKING YOU.......

May 23, 2013

कुछ रार अभी बाकी है....


अब कर द्वंद ,ना हुई कुंद ,कुछ धार अभी बाकी है
दिन या रैन, मिले न चैन ,कुछ रार अभी बाकी है
 
नही चढ़े रंग , बिना किए जंग , फन उठा भुजंग
तेरे जहर की मार अभी बाकी है ...... कुछ रार अभी बाकी है


 
 
तेरा यही धर्म, कर नेक कर्म ,नहीं कोई भ्रम
करना कुछ विस्तार अभी बाकी है ..... कुछ रार अभी बाकी है

कर घोर विरोध, और दिखा क्रोध, है नहीं अबोध
शेरों से तुझमे  ललकार अभी बाकी है ... कुछ रार अभी बाकी है
 
 
जब बहेगा रक्त, बदलेगा वक़्त , तू बनेगा सख्त  
करना ये इकरार अभी बाकी है ... कुछ रार अभी बाकी है
 

(रार - लड़ाई)

 -  विक्रम  ( भावभिव्यक्ति )

May 12, 2013

क्या गजब तमाशा है,,,?

तथाकथित आजाद भारत के इतिहासकारों,साहित्यकारों व व बुद्धिजीवियों के आलेखों में अक्सर हम पढ़ते आये है की राजपूतो की आपसी फुट के परिणाम स्वरुप ही भारत मुगलों व अंग्रेजो का गुलाम हुआ था. मेरे जैसा अल्पबुद्धि वाला व्यक्ति तो स्वयंभू विद्वानों के कथनो को अक्षरशः मानेगा ही. पर कोई जो जरा बहुत ज्ञान रखता होगा व तथ्यों को वास्तविकता की कसौटी पर परखता होगा,वह अवश्य विश्लेषण करेगा की  सच क्या रहा होगा. इतिहास गवाह है की जब समस्त यूरोप व मध्य एशिया इस्लामिक सत्ता के सामने जब नत मस्तक था. तब एक मात्र देश भारत ही था जहाँ के हठीले  शूरवीर राजपूत शासको ने अपने सर कटवा कर भी अपने धर्म व देश की रक्षा की थी. इसी का परिणाम है की आज भी भारत में हिन्दुओं का अस्तित्व शेष  है वरना कभी के सबके ख़तने हो चुके  होते. सामन्तवाद को गलिया दे कर जनता से तालिया बजवा कर व उन्हें बेवकूफ बना कर आपने शासन करने की भूख मिटने वाले धवल वस्त्र धारी नेताओ  के देश प्रेम व आत्म बल को देखता हूँ तो तरस आता है की जिन्हें तुम गलिया दे कर राज का आनंद ले रहे हो वे यदि कारगिल युद्ध,संसद पर आक्रमण,अनेक आतंकवादी हमलो, जवानो के सर कलम करने की घटना व चीन द्वारा कई किलोमीटर अन्दर घुस कर हमारी सम्प्रभुता को ललकारने की घटना के समय होते तो अवश्य ही इनका मुंह तोड़ जबाब देते,,चाहे स्वयं मर जाते पर कायर कभी नहीं कहलाते. शर्म आती है जब आज चाईना ने हमारे कई किलो मीटर अन्दर के बंकर को तुड़वा कर ही अपने टेंट हटाये और हम चुप है,,,जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो. हमें कम से कम मेजर शैतान सिंह जैसे सूरवीरो की शहादत का तो ख्याल तो रखना ही पड़ेगा.