Sep 22, 2013

नेताओं की चालें और हथकंडे

राजनीति में सत्ता में बने रहने के लिये राजनीतिज्ञ प्राचीन काल से ही तरह तरह की चालें व हथकंडे अपनाते आये है, आजकल के राजनेता भी अपने पूर्वर्ती राजनेताओं की तरह हथकंडे अपनाने में लगे है, विरोधियों को निपटाने या अपने पक्ष में करने के लिए विभिन्न हथकंडे अपनाते है तरह तरह की चालें चलते है, इन हथकंडों में राजनेता न अपनी पार्टी का फायदा देखते ना अपने उन समर्थकों के हितों का ख्याल रखते जिनके वोटों रूपी कंधे पर चढ़ वे सत्ता के शिखर पर पहुंचे होते है| वे सिर्फ और सिर्फ अपना हित साधते है और हम मतदाता फालतू ही उनके समर्थन में या किसी पार्टी की विचारधारा के मानसिक गुलाम बन उनके हित साधन के औजार बन जातें है|

ऐसा ही एक उदाहरण निम्न है जिसमें एक वर्तमान नेता जी की चालों व हथकंडों पर विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर प्रकाश डाला गया है-

राजस्थान में एक विधानसभा क्षेत्र है डीडवाना, जहाँ के एक विधायक वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार में मंत्री थे, डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में जाट मतदाता पारम्परिक रूप से कांग्रेस को वोट देते है तो राजपूत मतदाता भाजपा के पारम्परिक वोट है, इस क्षेत्र में कायमखानी मुसलमान भी अच्छी खासी संख्या में है जिनके पूर्वज कभी राजपूत थे अत: इनका अब भी राजपूत समाज के पारस्परिक संबंध अच्छे है, इन्हीं सम्बन्धों को देखते हुए भाजपा उक्त विधानसभा क्षेत्र से मुस्लिम प्रत्याशी उतारती है ताकि राजपूत, कायमखानी वोटों के सहयोग से सीट जीती जा सके| और उसका यह प्रयोग तत्कालीन चुनावों में सफल भी रहा, जब भाजपा ने युनुस खान को डीडवाना विधानसभा से चुनाव मैदान में उतरा|

युनुस खान के चुनाव प्रचार में राजपूत युवाओं ने दिलोजान से अपनी भागीदारी निभाई और उन जाट बहुल क्षेत्रों में जहाँ युनुस खान को घुसने के लिए संघर्ष करना पड़ता था वहां सभाएं तक करवाई| श्यामप्रताप सिंह रुवां जैसे कार्यकर्ताओं ने अपनी गाड़ियाँ यूनस खान के प्रचार में झौंक साम्प्रदायिक सदभाव की मिसाल तक कायम की| ज्ञात हो उक्त चुनाव में श्यामप्रताप सिंह की एक गाड़ी कांग्रेसियों के पथराव में पूरी तरह टूट कर ख़त्म हो गयी थी| आखिर चुनाव में युनुस खान जीते और वसुंधरा सरकार में मंत्री बनाये गये|

उनके कार्यकाल में ही जून २००६ में डीडवाना में शराब व भूमाफिया के दो गुटों के गैंगवार में एक जीवणराम नाम के जाट की मृत्यु हो गयी जिसे इन माफिया गैंगों व राजनेताओं ने अपने बचाव, सहयोग प्राप्त करने व राजनैतिक फायदे हेतु जातिय झगड़े का रूप दे कर प्रचारित कर दिया| और जातिय झगड़ा दिखाने हेतु कई निर्दोष राजपूत युवकों को हत्याकांड में फंसा दिया|

चूँकि चुनावों में राजपूत मतदाताओं ने तत्कालीन मंत्री युनुस खान को वोट व समर्थन दिया था अत: निर्दोष राजपूत युवकों को झूंठे मुकदमें से बचाने हेतु समाज का एक प्रतिनिधि मंडल जयपुर मंत्री युनुस खान के बंगले पर मिलने गया| लेकिन युनुस खान ने इस मामले में अपने विरोधियों से मिलकर उन्हें अपना बनाने का षड्यंत्र रचा और जो राजपूत युवा उस कांड से पहले उनके बेडरूम तक में बिना किसी रूकावट के चले जाया करते थे, मंत्री जी ने उन्हें भी मिलने के लिए तीन तीन घंटे इन्तजार करवाना शुरू कर दिया| और गैंगवार में घायल जो कभी मंत्री जी के कट्टर विरोधी थे और अस्पताल में भर्ती थे से चुपचाप तत्कालीन मंत्री मिलने गए और समझौता कर लिया| हालाँकि मिलने की बात पर तत्कालीन मंत्रीजी इंकार करते है पर उनके उस गोलीकांड के घायलों से मिलने के वक्त उनकी सुरक्षा में लगी पुलिस की ड्यूटी जो पुलिस थाने की “आम रोजनामचा” रिपोर्ट में दर्ज है पढने के बाद साफ़ हो जाता है कि तत्कालीन मंत्री जी सवाई मानसिंह अस्पताल में डीडवाना गोली कांड के घायलों से मिलने गए थे| (प्रमाण के लिए आप यहाँ क्लिक पुलिस के “रोजनामचा आम” की आरटीआई से प्राप्त प्रमाणित प्रति यहाँ देख सकते है जिसमें स्पष्ट लिखा कि उस रोज तत्कालीन मंत्री जी की सुरक्षा में कौन कौन पुलिसकर्मी तैनात किये गए और मंत्रीजी अस्पताल किससे मिलने आये थे)

एक विधायक अपने क्षेत्र के किसी भी घायल व्यक्ति या गुट से मिलने आता तो किसी को कोई आपत्ति नहीं पर यदि यही कार्य वह चोरी छुपे करे और झूंठ बोले तब उसकी नियत पर शक होना लाजिमी है|

इतना नही नही इन तत्कालीन मंत्रीजी की दूसरी चाल या हथकंडा देखिये- उन्होंने राजपूत समाज के प्रतिनिधि मंडल जो निर्दोष युवकों के मुकदमें से बचाने की अपील करने गए थे से कहा कि – “इसके लिए मुझे मुख्यमंत्री जी बात करनी पड़ेगी और चूँकि आप नागौर जिले राजपूत है अत: नागौर जिले के एक मात्र मंत्री गजेन्द्र सिंह जी खिंमसर मेरे साथ जाये तो अच्छा रहेगा सो आप एक बार गंजेंद्र सिंह जी खिंमसर के पास जाकर उनसे बात करे|”

यह सून प्रतिनिधिमंडल गजेन्द्र सिंह जी खिंमसर के पास गया और उनसे निर्दोष युवकों को बचाने हेतु युनुस खान के साथ मुख्यमंत्री से मिलने की बात कही, पर गजेन्द्र सिंह जी खिंमसर ने प्रतिनिधि मंडल को किसी बहाने टरका कर वापस युनुस खान के पास भेज दिया| जब प्रतिनिधि मंडल के लोग वापस युनुस खान के बंगले पर आये और उनसे बातचीत करने लगे तभी युनुस खान के पास गजेन्द्र सिंह खिंमसर का फोन आया, सूत्रों के अनुसार युनुस खान ने गजेन्द्र सिंह जी से बात करते समय फोन का स्पीकर ऑन कर दिया ताकि वे जो कहे वहां उपस्थित राजपूत समुदाय के लोग सून सके|

गजेन्द्र सिंह जी फोन पर युनुस खान से कहने लगे कि – “अपने क्षेत्र के इन फफूंद राजपूतों के मेरे पास मत भेजा कर अपने आप इनसे जैसा चाहे निपट लिया कर|(कुछ ऐसे ही घटिया शब्द गजेंद्रसिंह खिंमसर ने प्रयोग किये, इसीलिए हम कहते है कि ये किले, महलों वाले आम राजपूत को राजपूत तब तक ही मानते है जब तक उसकी भावनाओं का दोहन करना होता है)”

इस तरह की बात कर युनुस खान ने एक तीर से दो शिकार कर लिये पहला- गंजेंद्र सिंह खिंमसर की सोच को राजपूत प्रतिनिधियों के आगे नंगा कर दिया और दूसरा राजपूतों को बिना कुछ कहे यह भी जता दिया कि- “देखा आपके अपने आपके लिए कुछ नहीं करते तो मुझसे उम्मीद क्यों ? जबकि मतदाता उसी से उम्मीद करेगा जिसे वह अपना प्रतिनिधि चुनता है| यदि डीडवाना क्षेत्र के मतदाताओं को किसी सहायता की आवश्यकता होती है तो उसी क्षेत्र के जन प्रतिनिधि को बिना जात-पांत देखे कानून सम्मत सहयोग कर चाहिये|

पर नहीं ! इस मामले में युनुस खान ने खेल खेला कि राजपूत वोट तो उसे मिलते ही है जाट वोटों पर भी कुछ कब्ज़ा करलो, भले उसके इस हथकंडे से उसके परम्परागत समर्थकों का अहित ही हो|

खैर.....युनुस खान को उसके द्वारा किये का फल पिछले चुनावों में मिल गया जब एक राजपूत युवा श्यामप्रताप सिंह ने उसके कृत्यों से नाराज हो उसके खिलाफ चुनाव लड़ा और युनुस खान को चुनाव हरा दिया| इस बार भी श्याम प्रताप सिंह बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में है और सूत्रों के अनुसार युनुस खान पिछली हार के अनुभव से सबक ले डीडवाना से चुनाव नहीं लड़ने के मूड में है पर लगता है भाजपा बिना सोचे समझे व सबक लिए फिर उसे चुनाव में उतारकर बलि का बकरा बनाने में जुटी है|

नोट : यहाँ यह सब लिखने का कारण सिर्फ और सिर्फ इन तथाकथित समाज के ठेकेदार नेताओं के हथकंडों व राजनैतिक चालों से आम लोगों को जागरूक करना है ताकि ये नेतागण आम लोगों की जातिय भावनाओं का अपने हित में दोहन ना कर सके|

आप किसको समर्थन कर रहें है ? किसको नहीं ! ये आपके विवेक पर है और ये आपका लोकतांत्रिक अधिकार भी है कि आप अपनी मर्जी से किसी को चुने !!

Sep 14, 2013

सामाजिक संगठन या समाज के ठेकेदार ??

राजस्थान में विधानसभा के लिए चुनावों के लिए विभिन्न दलों व उम्मीदवारों में अपनी अपनी जीत के लिए मतदाताओं को लुभाने हेतु चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है| साथ ही विभिन्न जातियों के जातिय सामाजिक संगठन भी अपनी अपनी जाति का विधानसभा में प्रतिनिधित्व बढाने हेतु अपनी जाति के ज्यादा से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव में जिताने हेतु अपने जातिय मतों की लामबंधी अपने जाति के उम्मीदवार के पक्ष में करने में लगे है|

वहीँ कई जातिय संगठनों के कर्ताधर्ता अपने व्यक्तिगत फायदे या राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए अपने सामाजिक संगठन के प्रभाव का इस्तेमाल अपने समाज की जातिय भावनाओं का दोहन करने में कार्यरत है| ऐसे तत्व राजनैतिक दलों से अपने जातिय वोटों की सौदेबाजी कर फायदा उठाने में लगे है|

इस तरह का कार्य में हमारे समाज के भी एक अग्रणी प्रतिष्ठित संगठन के कुछ लोग लगे है, जो अपने राजनैतिक आकाओं को खुश करने के लिए चुनाव लड़ रहे अपने स्वजातिय बंधुओं के खिलाफ अभियान चलायें हुए है| ऐसे ही एक संगठन के कर्ताधर्ताओं के रूप में विख्यात या कुख्यात एक तथाकथित सामाजिक नेता समाज के चुनाव लड़ रहे बंधुओं के खिलाफ समाज को बरगलाने व उन्हें हराने के कुकृत्य में लगे है|

सूत्रों के अनुसार कल इस व्यक्ति ने डीडवाना शहर में भाजपा के मुस्लिम उम्मीदवार के पक्ष में समाज के लोगों की सभा कर भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की| ज्ञात हो इस विधानसभा क्षेत्र से समाज के एक बंधू श्यामप्रताप सिंह रूवां चुनाव लड़ रहे है और वे इस बार जीतने की पूरी स्थिति में भी है,श्यामप्रताप ने पिछली बार भी डीडवाना से चुनाव लड़ा था और इसी व्यक्ति ने भाजपा के मुस्लिम प्रत्याशी के समर्थन में समाज के वोट दिलवा श्यामप्रताप की हार सुनिश्चित करवाई थी|

सूत्रों के अनुसार खिमसर विधानसभा में एक और समाज बंधू दुर्गसिंह चौहान इस बार भी जीतने की स्थिति में है उसके खिलाफ भी यह शख्स कल सामाजिक संगठन के नाम पर सभा कर एक ऐसे भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट देने की अपील करने वाला है जिस उम्मीदवार पर १९७१ में दिलीप सिंह नामक एक राजपूत युवा के खून से हाथ रंगे होने का आरोप है, पिछली बार भी इस विधानसभा क्षेत्र से ऐसे ही समाजद्रोही व्यक्तियों व नेताओं द्वारा हनुमान बेनीवाल को भाजपा से टिकट दिलवा कर जिताया था जो बाद में भाजपा सहित इन नेताओं के लिए भस्मासुर साबित हुआ| और अभी हाल ही के विश्व विद्यालय चुनाव में इसी विधायक ने जोधपुर में हमारे समाज के खिलाफ जातिय भावनाएं भड़काते हुए समाज के कुछ युवकों पर कातिलाना हमला करवाया था| जिसके बाद जोधपुर शहर में जातिय संघर्ष छिड़ा|

भारतीय लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी मनमर्जी से मत देने व किसी दल का प्रचार आदि करने का मौलिक अधिकार है अत: उपरोक्त व्यक्ति भी अपने इस मौलिक अधिकार का प्रयोग करते हुए यदि किसी राजनैतिक दल की सदस्यता ग्रहण कर उसका प्रचार व समर्थन करता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिये पर यदि कोई व्यक्ति समाज के नाम पर राजनीति करे, सामाजिक संगठन के नाम पर राजनीति करे, समाज के वोटों का सौदा किसी दल से अपने निजी फायदे या राजनैतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए प्रयोग करे, ऐसा कुकृत्य किसी भी समाज को कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता| यह संगठन जिसके नाम का यह शख्स फायदा उठा रहा है उसकी स्थापना समाज को राजनीति सहित हर क्षेत्र में आगे बढाने के लिए हमारे महापुरुषों ने की थी पर लगता है इस संगठन के लोग अपने मूल उद्देश्य से भटक गए और इनका विरोध करने वालों को ये समाज विरोधी कह प्रचारित करते है ठीक वैसे ही जैसे धर्म के नाम पर दुकानदारी करने वाले पंडे आजतक हिन्दू धर्म की आड़ में अपने खेल खेलते आये है|

बंधुओं उपरोक्त प्रतिष्ठित संगठन में आज भी बहुत से अच्छे समाज सेवी लोग बिना किसी निजी लाभ के कार्यरत है पर उनके अच्छे कार्यों का दोहन यह एक व्यक्ति अपनी निजी राजनैतिक महत्वाकांक्षा की पूर्ति करने में लगा है और संगठन के शीर्ष नेतृत्व का भी इस व्यक्ति को मौन समर्थन है| जिस तरह एक मछली पुरे तालाब को गन्दा कर देती है ठीक उसी तरह यह एक व्यक्ति इस प्रतिष्ठित संगठन को अपने कृत्यों से बदनाम कर समाज की नजरों में गिराने का कार्य कर रहा है| आज समाज के जागरूक लोग सिर्फ इस व्यक्ति द्वारा संगठन के नाम का गलत इस्तेमाल पर आलोचना कर विरोध कर रहे है यदि संगठन के शीर्ष नेतृत्व ने इसका समर्थन जारी रखा तो वो दिन दूर नहीं जब समाज के जागरूक लोगों की आलोचना व विरोध का शिकार सीधा यह संगठन बनेगा|

जिस तरह से इस संगठन के लोगों ने राजस्थान के दो सौ विधानसभा क्षेत्रों में सभाएं कर एक दल विशेष को समाज के वोट दिलवाने का कार्य शुरू किया है उससे साफ जाहिर होता है कि ये तथाकथित समाज सेवी लोग समाज हित की बात करने की आड़ में समाज के ठेकेदार बन गए है जो समाज के वोटों का किसी दल से अपने निजी हित के सौदेबाजी कर रहे है|

श्री क्षत्रिय वीर ज्योति, राजपूत युवा परिषद् व जय राजपुताना संघ के कार्यकर्ताओं ने इस संगठन के इस कृत्य पर भारी नाराजगी जताते हुए समाज के बंधुओं से अपील की है कि – जहाँ समाज का कोई बंधू चुनाव लड़ रहा है और ऐसे तत्व उसके खिलाफ समाज को गुमराह करने आते है तो उनकी बातों में ना आयें और उनका बहिष्कार करें|

यदि यह व्यक्ति अपने समाज बंधू उम्मीदवारों के खिलाफ अपना अभियान बंद नहीं करता है तो फिर इनके व संगठन के नाम सहित इनके कुकृत्यों को उजागर किया जायेगा|

Sep 11, 2013

हम राजपूत इसी लायक तो नहीं ?

बंधुओं पिछले दिनों जोधपुर यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव संपन्न हुए और हम वहां बहुसंख्यक होने के बावजूद हारे, इसमें जीतने वाले की कोई प्रतिभा का कमाल या उसकी रणनीति नहीं थी बल्कि हमारी बेवकूफी व समाज के स्वाभिमान को ताक पर रखकर अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा जिम्मेदारी थी| हमें दोनों राष्ट्रीय दलों से समर्थित छात्र संगठनों से टिकट मिलने पर जीतने की संभावना वाले उम्मीदवार के पक्ष में वोट कर उसकी जीत सुनिश्चित करनी चाहिये थी पर यह बात हमारी समझ में नहीं आई और हम लड़ते रहे|

नतीजा आपके सामने रहा, हमारे दोनों लोग चुनाव हारे और नगण्य संख्या वाले समुदाय का उम्मीदवार चुनाव जीता, यही नहीं इस जीत से उत्साहित उसके समर्थकों ने आप पर हमला करने की धृष्टता भी की, और उनके हमले में जब हमारे लोगों के पिछवाड़े पर चाकुओं के वार हुए तब आपको अक्ल आई और आपने आपसी लड़ाई भूल एकता कर विरोधियों का मुकाबला भी किया और उन्हें सबक भी सिखाया| पर आप जब चेते तब तक आप सब कुछ खो चुके थे| और आपको पता है कि आपकी पीठ पर वार करने का षड्यंत्र रचने वाला वही भस्मासुर था जिसे आपके दो प्रिय नेताओं ने जो पूर्व मंत्री है, पैदा किया था|

पिछले चुनावों में पैदा किये इस भस्मासुर के कारनामों से कोई सीख नहीं लेते हुए आपके वे दोनों आदरणीय फिर एक भस्मासुर को जीवित कर आपके सामने खड़ा करने जा रहे है जबकि वह राक्षस वर्ष १९७१ में ही आपके एक स्वजातिय का बंधू के खून से अपने हाथ रंग चूका है|

सोशियल साइट्स पर मैं हर रोज बना लोगों की हरकतें देख भविष्यवाणी कर सकता हूँ कि - आपकी यह फितरत है कि आप एक जगह मार खाने के बाद भी संभलेंगे नहीं, और शायद आप संभालना भी नहीं चाहते|

अब सोशियल साईट फेसबुक पर कल देखे एक उदाहरण का जिक्र करता हूँ, जहाँ फिर हम जोधपुर यूनिवर्सिटी वाला खेल खेलने को लालायित है-
“कल एक बना ने फेसबुक पर नरपत सिंह जी राजवी के विद्याधरनगर से प्रचार अभियान छड़ने की फोटो लगाई, उस फोटो पर अन्य समुदाय से कोई विरोध करने नहीं आया, यदि कोई आया तो समर्थन करने ही आया भले ही वो वोट दे या न दे, पर समर्थन देकर तो गया ही|

पर उसी फोटो पर बना लोगों को राजवी साहब की आलोचना करते हुए आपस में बहस करते देखा, राजवी साहब के पुत्र अभिमन्यु बना ने वहां असंतुष्ट बनाओं की नाराजगी दूर करने की भी कोशिश की पर उनकी उपस्थिति देख बना लोगों ने संस्कारहीन भाषा तक का प्रयोग कर लिया| देख कर दुःख के साथ अफ़सोस भी हुआ कि जिन्हें कुछ पता नहीं वे महज अपनी हैकड़ी दिखाने को कुछ भी बकवास कर जाते है| ऐसे तत्वों को रतन सिंह भगतपुरा व कुछ अन्य लोगों द्वारा समझाते हुए भी देखा गया पर अपने उम्रदराज लोगों की बात भी इन तत्वों को समझ नहीं आई| जिस तरह बना लोगों को वहां रतनसिंह भगतपुरा ने बताया कि- वे जब भी राजवी साहब के घर गए है, राजवी साहब लोगों से बातचीत करते ही मिले है, भगतपुरा लिखते कि- उन्होंने कई बार तो राजवी साहब को घर के बाहर बैंच पर ही बैठे देखा है, साथ ही उनके घर पर प्रवेश के समय पुलिस होने के बावजूद कोई पूछताछ नहीं करता, ना कोई रोकता है,| अब बताईये भला एक पूर्व उपराष्ट्रपति के घर इतनी आसानी प्रवेश किया जा सकता है ? मेरी नजर में तो कोई सांसद भी अपने घर में प्रवेश को इतना आसान नहीं रहने देता, पर कोई जाये ही नहीं तो राजवी साहब अब हर घर, हर व्यक्ति से मिलने तो आने से रहे, राजवी साहब ही क्यों कोई एम.एल.ए तो क्या पार्षद व वार्डपंच भी एक एक व्यक्ति से मिलने घर नहीं आता|

फिर किसी भी विधायक से हमें अपने छोटे छोटे व्यक्तिगत काम करवाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिये, पर आजकल लोग चाहते है कि उनके घर बच्चे के नामकरण पर भी विधायक जी आयें और उनके बाद वे अपने पड़ौसियों पर रॉब झाड सके कि देखो- विधायक जी हमारे खास है| यह प्रवृति आजकल ज्यादा ही घर कर गयी खासकर हमारी नई पीढ़ी में|

मान लिया किसी राजपूत विधायक ने हमारा काम नहीं किया, और उसे हम हरा देंगे तो क्या गारंटी है कि दूसरी जाति वाला हमारे हर काम आयेगा| फिर जैसा कि उस बहस में रतन सिंह भगतपुरा ने लिखा- “स्व.बाबोसा ने समाज हित में जितने कार्य किये है उसके लिए समाज उनका सदियों तक ऋणी रहेगा, ऐसे में हमें उनके परिवार के किसी सदस्य का विरोध किसी हालत में नहीं करना चाहिये|” भगतपुरा जी की बात से मैं एकदम सहमत हूँ बल्कि मैं तो कहूँगा आज स्व.बाबोसा के दामाद जी के आगे किसी राजपूत को चुनाव ही नहीं लड़ना चाहिये| यदि कोई ऐसा करता है तो उसे समाजद्रोही घोषित समाज से निष्कासित कर देना चाहिये| क्योंकि स्व.बाबोसा की अनुपस्थिति में यदि हम उनके परिवार को हारने का कुकृत्य करते है(वो भी उस परिस्थिति में जब भाजपा का एक खास वर्ग इस परिवार को राजनीति से बाहर के करने के षड्यंत्र में लगा है) तो वह स्व.बाबोसा के प्रति गद्दारी होगी, एक ऐसे व्यक्ति के किये कार्यों के प्रति गद्दारी होगी जिन समाज हित के कार्यों को उन्होंने बिना ढिंढोरा पीटे, बिना कोई क्रेडिट लिए चुपचाप कर डाला, आज स्व.भैरोंसिंह जी १९५२ की विधानसभा में जाटीस्तान की मांग की हवा नहीं निकाली होती तो आपका राजस्थान ऐसा नहीं होता, उसमें जातिय आधार पर कब का जाटीस्तान बन चूका होता और आप उस जाटीस्तान में उसी तरह के खौफ में रहते जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश में हिन्दू रहते है| स्व.भैरोंसिंह जी नहीं होते तो आज आपको जितने राजपूत अधिकारी नजर आते है उनकी जगह कोई और नजर आते, स्व.बाबोसा नहीं होते तो आज जिन किलों व हवेलियों की फोटो आप फेसबुक पर चिपका कर गर्व से डायलोग लिखते फिरते है वे कब की ढूंढ़ों में तब्दील हो जाती या जमीन पर छितराई पड़ी अपनी मौत पर बेबसी के आंसू बहा रही होती|

स्व.बाबोसा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री बन, देश के उपराष्ट्रपति बन आपके समाज के स्वाभिमान को बढाया ही है, स्व. बाबोसा राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ते तो एक राजपूत महिला राष्ट्रपति के स्थान पर कोई शिंदे,फिंदे राष्ट्रपति होते| प्रतिभा जी को महामहिम बनाने का श्रेय भी स्व.बाबोसा भैरोंसिंह जी को ही जाता| और हम ! हम उनके ही परिवार की खिलाफत महज यह तर्क देते हुए करते है कि राजवी साहब मिलते नहीं| अरे करम फूटो वो मिले नहीं नहीं मिले उस परिवार ने तुम्हारे लिए बिना बोले, बिना मिले कितना कुछ कर दिया उसका तो ख्याल रखो, उसका ऋण चुकाने को तो तत्पर रहो|

खैर....मेरे इस लेख पर भी मुझे पता है कई बना लोग प्रतिकूल टिप्पणियाँ करेंगे और कहेंगे कि विक्रम सिंह भी तो राजपूत है उन्हें क्यों हराया जाय ? इसका मेरे पास एक ही जबाब है कि स्व.बाबोसा के परिवार के सामने किसी क्षत्रिय को चुनाव लड़ना ही नहीं चाहिये, फिर भी लड़ता है तो आप उसे समर्थन ना दें, और देते है तो फिर महाराणा प्रताप की जगह राजा मानसिंह को अपना आदर्श पुरुष मानने लग जायें|

Sep 5, 2013

राजपूत उम्मीदवार के खिलाफ किसी भी नेता के झांसे में ना आये राजपूत मतदाता

पिछले राजस्थान विधानसभा चुनावों में खींवसर विधानसभा क्षेत्र से दुर्गसिंह चौहान ने बिना किसी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी की टिकट के चुनाव लड़ा और विजेता भाजपा के हनुमान बेनीवाल को कड़ी टक्कर दी| उस चुनाव में भाजपा को 57500 के लगभग मिले तो दुर्गसिंह चौहान को 34300 मत मिले वहीँ कांग्रेस सिर्फ 17000 मतों पर सिमट गयी थी|

पिछले चुनाव में उक्त विधानसभा क्षेत्र से हनुमान बेनीवाल को भाजपा की और से टिकट दिलाने व उसे जिताने के लिए भाजपा के दो राजपूत नेताओं ने सहायता की लेकिन हनुमान बेनीवाल भाजपा सहित इन दोनों राजपूत नेताओं के लिए भस्मासुर साबित हुआ| इस बार वही दोनों राजपूत नेता जो भाजपा की पूर्व सरकारों में मंत्री भी रह चुके है ने जीतने की संभावना वाले दुर्गसिंह चौहान को टिकट ना दिला कांग्रेसी मूल के विजय पुनिया को इस क्षेत्र से चुनाव में उतारने की लोबिंग कर रहे है व एक ऐसे व्यक्ति को चुनाव जीताने के लिए राजपूत मतदाताओं को बरगलाने में लगे है जिस पर 1971 में एक राजपूत दिलीप सिंह राठौड़ की हत्या में शामिल होने का आरोप है|

भाजपा के इन दोनों राजपूत नेताओं द्वारा एक राजपूत के हत्यारे व्यक्ति का समर्थन करने पर राजपूत युवाओं व सामाजिक संगठनों में भारी रोष है जो फेसबुक सहित सोशियल साइट्स पर अभिव्यक्त किया जा रहा राजपूत युवाओं का उग्र रोष साफ़ देखा जा सकता है|

यही नहीं पिछले दिनों नागौर जिले में भाजपा की सभा में मंच से इन्हीं दोनों राजपूत नेताओं में से एक ने कहा कि – “राजपूत समाज ने विजय पुनिया को माफ़ कर दिया है|” मंच से इस बयान के बाद से ही राजपूत युवा सोशियल साइट्स पर उस कथित नेता से सवाल पुछ रहे है कि – “समाज के एक व्यक्ति के हत्यारोपी को पुरे समाज की और से माफ़ करने वाले वे नेता क्या समाज के ठेकेदार है ? जो पुरे समाज की और से उस हत्यारोपी को पाक साफ़ होने का सर्टिफिकेट बांटते घूम रहे है|”

क्षत्रिय वीर ज्योति व अन्य राजपूत समाज के सामाजिक संगठनों ने इन दोनों नेताओं को उक्त विधानसभा क्षेत्र से दुर्गसिंह के खिलाफ किसी भी तरह का प्रचार न करने व दुर्गसिंह जीत में रोड़ा न बनने की अपील के साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उपरोक्त कथित नेता समाज द्रोही कार्यों से बाज नहीं आये तो समाज को मजबूर होकर उनके खिलाफ भी मतदान कर उन्हें सबक सिखाने को मजबूर होना पड़ेगा|

ज्ञात हो उक्त क्षेत्र से पिछला चुनाव हारने के बावजूद दुर्गसिंह आम जनता के बीच उनके सुख दर्द में भागीदार बने रह कर डटे रहे और पुरे पांच वर्षो तक वे आम जनता का कार्य करते रहे, बल्कि चुनाव जीतने वाले विधायक से भी कहीं ज्यादा दुर्गसिंह ने क्षेत्र में समय दिया व लोगों के कार्य करवाये| यही कारण है कि उक्त विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ 25000 राजपूत मत होने के बावजूद दुर्गसिंह 34300 मत लेने में कामयाब हुए थे| यह उनकी आम जनता व अन्य जातियों में स्वीकार्यता का प्रमाण है|

ठीक इसी तरह डीडवाना विधानसभा को लेकर भी राजपूत युवाओं में भाजपा व राजपूत समाज के एक प्रभावी सामाजिक संगठन को लेकर राजपूत युवाओं में भारी नाराजगी है| डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में राजपूत मतदाता निर्णायक स्थिति में है और इसका उदाहरण उम्मेदसिंह खोजास पूर्व में निर्दलीय चुनाव जीत कर पेश कर चुके है, राजस्थान में राजपूत भाजपा के परम्परागत मतदाता रहे है अत: भारतीय जनता पार्टी राजपूतों को बेचारा समझ टिकट नहीं देती और अधिक मत होने के बावजूद यह सोचकर कि बेचारे राजपूत हमें वोट देने के अलावा जायेंगे कहाँ ? किसी और जाति के उम्मीदवार को टिकट देकर थोप देती है| ज्ञात हो राजस्थान में राजपूत परम्परागत तौर पर कांग्रेस विरोधी है और उनकी इसी कमजोरी को भाजपा अपने फायदे में भूनाती रही है|

और भाजपा की इस सोच को पिछले दिनों राजस्थान में भाजपा की एक सभा में पूर्व आरपीएससी अध्यक्ष और वर्तमान भाजपा नेता सी.आर.चौधरी ने अपने भाषण में यह कर जाहिर भी कर दिया कि- ब्राह्मण, बनिये, राजपूत भाजपा के मानसिक गुलाम है इन्हें भाजपा को वोट देने के अलावा कोई चारा नहीं अत: इनके वोटों से इन पर ही राज करों|


डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में भी पिछली बार राजपूत समाज के श्यामप्रताप सिंह को भाजपा द्वारा टिकट नहीं दिए जाने पर समाज ने उन्हें निर्दलीय चुनाव मैदान में उतार भाजपा के पूर्व मंत्री युनुस खान को चुनाव में हरा अपनी ताकत दिखा दी, इस बार भी श्यामप्रताप सिंह बसपा की टिकट पर चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे है जिसके चलते भाजपा उम्मीदवार पूर्व मंत्री डीडवाना से चुनाव लड़ने में कतराते नजर आ रहे है|

पर राजपूत समाज का अग्रिणी व प्रतिष्ठित सामाजिक संगठन के कर्ता धर्ताओं द्वारा अपने निजी फायदे के लिए पिछले चुनाव में भी भाजपा का समर्थन करना व इस बार भी उनके द्वारा एक राजपूत उम्मीदवार के खिलाफ भाजपा का समर्थन करना राजपूत युवाओं व सामाजिक संगठनों को रास नहीं आ रहा है और वे सोशियल साइट्स पर इस संगठन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाल रहे है|

क्षत्रिय वीर ज्योति ने राजपूत युवाओं का आव्हान किया है कि वे किसी भी राष्ट्रीय पार्टियों के जर खरीद मानसिक गुलाम राजनेताओं के झांसे में ना आये और अपनी जातिय भावनाओं का दोहन ऐसे समाजद्रोही संगठनों को ना करने दे|


ज्ञात हो “क्षत्रिय वीर ज्योति” संगठन राजपूत करणी सेना, राजपूत युवा परिषद्, जय राजपुताना संघ आदि विभिन्न दर्जनों राजपूत सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राजनैतिक चिंतन कर इन चुनावों में राजस्थान विधानसभा में ज्यादा से ज्यादा राजपूत विधायक भेजने को क्रियाशील है| और इस हेतु विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में राजपूत राजनैतिक चिंतन शिविर का आयोजन कर समाज को राजनैतिक तौर से जागृत करने में लगा है

Sep 3, 2013

क्षत्रिय वीर ज्योति का बानसूर में राजनैतिक चिंतन शिविर संपन्न

31 अगस्त 2013 शनिवार शायं 6 बजे से अलवर बानसूर के पास भर्तहरी की तपोभूमि, अरावली की हरियाली से आच्छादित वादियों के बीच रमेश सिंह शेखावत के कृषिफार्म पर क्षत्रिय वीर ज्योति की और से आयोजित समाज के विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ राजनैतिक चिंतन शिविर संपन्न हुआ|

शिविर में आठ घंटे से लम्बी चली चिंतन बैठक में क्षत्रिय वीर ज्योति के साथ राजपूत युवा परिषद्, करणी सेना, जय राजपुताना संघ व विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों व प्रतिनिधियों के साथ बानसूर विधानसभा क्षेत्र के सैंकड़ों राजपूत युवाओं व बुजुर्गों ने वर्तमान समय में राजपूत समाज की राजनैतिक स्थिति पर गहन मंथन करते हुए माना कि धीरे धीरे विभिन्न पार्टियों द्वारा राजपूत समाज को एक सुनियोजित षड्यंत्र के अंतर्गत देश के राजनैतिक परिद्रश्य से दूर किया जा रहा है| आजादी के बाद राजस्थान की पहली 180 सीटों वाली विधानसभा में 66 राजपूत विधायक थे जो वर्तमान विधानसभा की 200 सीटों में सिर्फ 25 पर राजपूत विधायकों की संख्या पर सिमट गये| इस तरह धीरे धीरे विधानसभा में राजपूत विधायक की कम उपस्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए आने वाले चुनाव में राजस्थान विधानसभा में 40 राजपूत विधायकों को पहुंचाने का संकल्प लिया गया व इस संकल्प को पूरा करने हेतु एक रणनीति बनाई गयी जिस पर सभी सामाजिक संगठन एक मत से सहमत हुए|

क्षत्रिय वीर ज्योति के राजेंद्र सिंह बसेठ ने इस रणनीति का खुलासा करते हुए इस पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि राजपूत समाज ने चिंतन के बाद तय किया है कि जिस विधानसभा क्षेत्र में राजपूत मतों की संख्या अधिक है उस क्षेत्र से सर्वप्रथम राष्ट्रीय राजनैतिक दलों से राजपूत उम्मीदवार को टिकट देने की मांग की जायेगी| किसी भी राष्ट्रीय दल द्वारा राजपूत उम्मीदवार को टिकट दिए जाने के स्थिति में उसका समाज द्वारा हर प्रकार से सहयोग व समर्थन किया जायेगा, यदि दो राष्ट्रीय दल एक साथ राजपूत उम्मीदवार खड़ा करते है तो जीतने की अधिक संभावना वाले उमीदवार के पक्ष में समर्थन दिया जायेगा| दोनों राष्ट्रीय दलों द्वारा राजपूत को टिकट नहीं दिए जाने की स्थिति में किसी भी दल से चुनाव लड़ने वाले राजपूत उम्मीदवार को समर्थन देकर उसकी जीत सुनिश्चित की जायेगी| राजपूत मतों की अधिकता वाले स्थानों पर किसी भी दल से राजपूत उम्मीदवार को टिकट नहीं देने की स्थिति में समाज अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा और क्षत्रिय वीर ज्योति अन्य सभी सामाजिक संगठनों को साथ लेकर समाज की और से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार के लिए धन व साधनों की व्यवस्था करेगी|

इसके लिए क्षत्रिय वीर ज्योति के गणपत सिंह राठौड़ ने जो गुडगांवा में व्यवासायी है ने दस उम्मीदवारों को चुनाव सहायता के लिए एक एक लाख रूपये और चुनाव प्रचार तक एक एक गाड़ी की व्यवस्था का खर्च उठाने की घोषणा की|

इस चिंतन बैठक में बानसूर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस टिकट के प्रबल दावेदार धर्मेन्द्र राठौड़ के लिए टिकट पक्की करने की मांग की गयी और कांग्रेस द्वारा मांग नहीं मानने की दशा में रमेश सिंह शेखावत को राजपूत समाज की और से बानसूर से चुनाव में उतारने की घोषणा की|

ज्ञात हो अलवर की 5 विधानसभा सीटों से राजपूत उम्मीदवार चुनाव जीत सकतें है पर चूँकि कांग्रेस नेता व मंत्री भंवर जीतेन्द्र सिंह अपनी सांसद सीट पक्की रखने के लिए राजपूत उम्मीदवार की जगह अन्य जातियों के लोगों को टिकट दिलवाते है ताकि लोकसभा चुनाव में वे लोग अपनी जाति के वोट उन्हें दिला सके| इस तरह एक व्यक्ति के लिए जिससे आमजन का किसी कार्य हेतु मिलना भी दूभर होता है, चार राजपूतों का राजनैतिक कैरियर दाँव पर लगा दिया जाता है| ज्ञात हो बानसूर से कांग्रेस टिकट के दावेदार धर्मेन्द्र राठौड़ जो भवंर जितेन्द्र के खास है फिर भी पिछले चुनावों में उन्हें टिकट छोड़नी पड़ी और इस त्याग के बदले उन्हें राज्यमंत्री का दर्जा वाला कोई पद मिला को समाज की बैठक में राजनैतिक रणनीति का पता चलने पर बैठक में दौड़े दौड़े आये जबकि आजतक वे भी समाज की बैठकों में आमंत्रण देने के बावजूद दुरी बनाये रखते है| यही नहीं उनके द्वारा इस रणनीति व भंवर जीतेन्द्र के खिलाफ समाज में रोष की सूचना देने पर भंवर जीतेन्द्र जो दोपहर अलवर पहुँचने वाले थे रात को अलवर आ धमके और सुबह होते ही समाज के लोगों को बुला कई कार्य नहीं करने के कारणों की मजबूरियां गिनाते हुए सफाई देने लगे उन द्वारा दी जा रही सफाइयों के वक्त उनके चेहरे पर समाज के रोष से पैदा खौफ साफ झलक रहा था, उनके झलकते डर को महसूस कर उपस्थित समाज के लोगों को पहली बार महसूस हुआ कि बिना डर के कोई नेता सीधे नहीं चलते|

चिंतन बैठक में साफ किया गया कि लोकसभा चुनाव में समाज भंवर जितेन्द्र सिंह के साथ है पर विधानसभा चुनाव में उन्हें अपनी मनमर्जी नहीं करने दी जाएगी|

इस चिंतन बैठक में भाजपा नेता देवीसिंह नरुका, क्षत्रिय वीर ज्योति के राजेन्द्र सिंह बसेठ, राजपूत युवा परिषद् के उम्मेद सिंह करीरी, कांग्रेस के राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त धर्मेन्द्र राठौड़, अजीत मामडोली, राजवीर चौहान के अलावा स्थानीय लोगों ने अपने अपने विचार व सुझाव रखे|

राजेंद्र सिंह बसेठ व उम्मेद सिंह करीरी ने खींवसर विधानसभा क्षेत्र में बसपा से चुनाव लड़ रहे दुर्गसिंह चौहान के खिलाफ एक भाजपा राजपूत नेता नेता द्वारा राजपूत वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश को समाज की भावनाओं के विपरीत कुकृत्य बताते हुए राजनैतिक दलों के जर खरीद मानसिक गुलाम बन चुके राजपूत नेताओं को इस तरह के हथकंडों से दूर रहने की चेतावनी व सलाह दी| साथ ही ऐसे नेताओं के बहकावे में न आने की समाज से अपील की|

क्षत्रिय वीर ज्योति ने तय किया है कि आगामी चुनावों में प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों को साथ लेकर बसपा, लोजपा सहित विभिन्न पार्टियों से चुनाव लड़ रहे राजपूत उम्मीदवारों का समर्थन व सहयोग करने के अलावा अलवर जिले की पांच सीटों पर राष्ट्रीय दलों द्वारा राजपूत उम्मीदवार नहीं उतारे जाने की स्थिति में समाज अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगा और अपनी राजनैतिक ताकत का अहसास करायेगा| बानसूर से रमेश सिंह के अलावा अलवर विधानसभा से बच्चू सिंह जी को चुनाव लड़वाने की सहमती भी बनी|

इसी रणनीति के तहत उम्मेदसिंह करीरी व राजेंद्रसिंह बसेठ ने खींवसर विधानसभा क्षेत्र में कुछ बैठकें आयोजित करने का निर्णय लिया ताकि समाज के लोगों में राजनैतिक चेतना जाग्रत कर लोकतंत्र में सिर गिनवाने की महत्ता समझाई जा सके|