Oct 26, 2013

राष्ट्र के दिल ओ दिमाग में लहू बनकर दौड़ने वाला राजपूत वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे लेने की तरफ अग्रसर ..........


मुझे आज 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि का विस्मरण हो आया जब वतन "आजादी" की फिजाओं में खुलकर साँस लेने के लिए फेफड़े फुला रहा था, तब वतन परस्ती और हिंदुत्व को विश्व में बचाने के लिए एवं वतन की एक एक इंच जमीन के लिए अपना शीष और सर्वस्व न्योछावर कर राष्ट्र के दिल ओ दिमाग में लहू बनकर दौड़ने वाला राजपूत वेंटिलेटर पर अंतिम सांसे लेने की तरफ अग्रसर था ! इन छियासठ वर्षो में राजपूत समाज को जमींदौज करने वाले सारे फार्मूले सरकारों ने हम पर लगा डाले .... पर हम तब भी नही मिट पाए .........!

मित्रो लाला लाजपत राय जब लाठी चार्ज में घायल हुए थे, तो उन्होंने सिंह गर्जना की थी की मेरे शरीर पर पड़ी एक एक लाठी अंग्रेजी हुकूमत के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी ! और इसे सरदार भगत सिंह ने अपने प्राणों की आहुति देकर वैश्विक सत्य के रूप में चरितार्थ करके दिखा दिया, पर विडम्बना देखिये समाज बंधुओं आपकी कौम की अस्मत को मिट्टी में मिला, हर कहीं गिरवी रख देने वाले लोगो को आगे बढाने वालो को एक करारा थप्पड़ मारने का साहस हममे नही, तो हम कहाँ सर काटने और कटाने जैसी थोथी लफ्फाजी (गाल बजाने वाली गन्दी मानसिकता) में अपने फर्जी स्वाभिमान को शांत करने वाला बकवास अति आत्म विश्वास लेकर घूम रहे है, जो न हमारी कौम का भला कर सकता है .....और न ही आपके उज्जवल भविष्य की गारंटी दे सकता है !

Oct 25, 2013

श्याम प्रताप सिंह राठौड़ : एक उभरता राजपूत युवा नेता (परिचय)

राजस्थान के नागौर जिले में डीडवाना विधासभा क्षेत्र के रुवां नामक गांव में २९ नवम्बर १९८० को पुलिस अधिकारी श्री नरपत सिंह जी (केशव दासोत मेड़तिया) राठौड़ जो लंबे समय तक पूर्व राष्ट्रपति शेरे राजस्थान स्व.भैरोंसिंह जी शेखावत के सुरक्षा इंचार्ज रहेके घर जन्में और कला संकाय से स्नातक शिक्षा ग्रहण किये श्याप्रताप सिंह राठौड़ अभी राजस्थान विधानसभा के होने जा रहे चुनावों में बहुजन समाज पार्टी की और से चुनावी दंगल में ताल ठोक रहे है| ज्ञात हो पूर्व में एक समर्पित भाजपा कार्यकर्त्ता होने के बावजूद पिछले चुनावों में डीडवाना विधानसभा में राजपूत मतों से जीत मंत्री बने तत्कालीन मंत्री युनुसखां द्वारा राजपूत युवकों के साथ पक्षपाती रवैया अपनाने उन्हें विरोधियों से मिल झूंठे मुकदमों में फंसाने से नाराज राजपूत समाज के कुछ जागरूक सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा युनुस खान की जगह श्यामप्रताप को भाजपा से टिकट दिलवाने की भाजपा से मांग ना माने जाने की स्थिति में भाजपा को डीडवाना क्षेत्र में राजपूत समाज की राजनैतिक ताकत दिखाने के उद्देश्य से निर्दलीय चुनाव में उतारा था|

पिछले चुनाव में छात्र राजनीति व सामाजिक गतिविधियों में सक्रीय श्यामप्रताप को समाज द्वारा चुनाव मैदान में उतारे श्याम प्रताप को १७००० वोट प्राप्त हुए, नतीजा – भाजपा वोटों के बंटने के कारण युनुसखान हार गए| इस तरह भाजपा द्वारा राजपूत समाज की अवहेलना की कीमत भाजपा को एक सीट गँवा कर चुकानी पड़ी|

उपरोक्त हार से सबक मिलने के बाद भी भाजपा की अड़ियल नेता वसुंधरा राजे ने कोई सबक नहीं सीखा और समाज की मांग को फिर अनदेखा करते हुए इन चुनावों में भी युनुस खान को टिकट थमा दी| उधर श्यामप्रताप की झुझारू छवि, राजपूत समाज का एकजुट होकर साथ देना और क्षेत्र में दलितों की सहायतार्थ उसके द्वारा किये कामों की वजह से दलित मतों का उसके प्रति झुकाव भांप बहुजन समाज पार्टी ने श्यामप्रताप सिंह को टिकट दे दिया| श्यामप्रताप सिंह के साथ राजपूत और दलित मतों के ध्रुवीकरण को देखते हुए जिस सीट पर भाजपा का कब्ज़ा होता था उस सीट पर आज भाजपा कहीं दूर दूर तक मुकाबले में ही नहीं वह तीसरे नंबर पर जा पहुंची| अब मुख्य टक्कर श्यामप्रताप व कांग्रेस के मध्य ही रह गयी है|

भाजपा द्वारा राजपूत समाज की अवहेलना से आक्रोशित होने के अलावा ऐसे कौनसे कारण है कि आज डीडवाना क्षेत्र का नहीं बल्कि पुरे राजस्थान व सोशियल मीडिया से जुड़ा देशभर का राजपूत युवा श्यामप्रताप के साथ खड़ा है; दलित समुदाय अपनी परंपरागत कांग्रेस पार्टी को छोड़ श्यामप्रताप के पक्ष में मजबूती से खुलेआम खड़ा है| आईये इन्हीं प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए एक सरसरी नजर डालते है श्यामप्रताप सिंह राठौड़ द्वारा किये गए सामाजिक व राजनैतिक संघर्षों पर:-

वर्ष १९९८ में श्यामप्रताप ने अग्रवाल कालेज जयपुर के छात्र संघ में उपाध्यक्ष पद हेतु चुनाव लड़ छात्र राजनीति में सक्रीय कदम रखा, हालाँकि वे इस चुनाव में जीत नहीं पाये| इस चुनाव के बाद राजनीति में कदम रखते हुए श्यामप्रताप ने जयपुर के वार्ड संख्या चार से पार्षद का निर्दलीय चुनाव लड़ा और राजस्थान में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकार्ड बनाया| २८ मार्च २००४ को ही श्यामप्रताप को राजपूत युवा परिषद् के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, इस दौरान उनके प्रयासों से राजस्थान की विभिन्न कालेजों में पांच राजपूत युवा छात्र संघ अध्यक्ष चुनाव जीते| राजपूत युवा परिषद् के झंडे तले श्यामप्रताप सिंह ने राजस्थान में राजनैतिक पार्टियों द्वारा राजपूतों की उपेक्षा व आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ भवानी निकेतन स्कुल से मुख्यमंत्री आवास तक “अधिकार रैली” के नाम से एक बड़ी रैली का सफल आयोजन किया| इस रैली में आक्रोशित भीड़ व पुलिस के बीच के जमकर लाठी-भाटा जंग भी हुई|

राजपूत युवा परिषद् के अध्यक्ष के नाते इन्होने समाज के विभिन्न महापुरुषों की जयंतियों पर कार्यक्रम कर युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश पहुंचाने की पुरजोर कोशिश की व प्रदेश स्तर पर राजपूत युवाओं को संगठित करने का भरपूर प्रयास किया|

आप वर्ष २००९ व २०१० में राजस्थान के प्रसिद्ध व चर्चित राजपूत नेता लोकेन्द्रसिंह जी कालवी के संरक्षण में स्थापित श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे| इस दौरान ने करणी सेना ने अरुण-गोवारिकर की चर्चित फिल्म जोधा-अकबर का राजस्थान के किसी भी सिनेमा घर में प्रदर्शन रोककर देश में करणी सेना की ताकत की धाक जमाई|

वर्ष २००९ में ही भाजपा को डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में राजपूत मतों की ताकत का अहसास कराने के लिए समाज के आदेश पर आपने विधान सभा चुनाव लड़ा| जिसमें आपको १७००० वोट मिले| ज्ञात हो डीडवाना क्षेत्र में दो लाख के आस-पास कुल मत है और वहां ६०% मतदान होता है|

चुनाव में भाजपा केतत्कालीन मंत्री युनुसखान को हरा अपनी राजनैतिक ताकत दिखाने के बाद श्याप्रताप सिंह डीडवाना विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न जन-समस्याओं को लेकर समय समय पर आन्दोलन करते रहे, रामसा पीर परिषद् के झंडे तले दलित कल्याण कार्यक्रम चलाने के साथ डीडवाना को जिला बनाने के लिए कई बार प्रदर्शन व आन्दोलन किया|

पंचायत चुनावों में भी नागौर जिले में राजपूत पंच, सरपंचों की संख्या बढाने हेतु आपने अथक प्रयास किये और काफी सफल रहे यही कारण है डीडवाना विधानसभा क्षेत्र के सभी दस में से नौ राजपूत सरपंच इस चुनाव में आपके साथ खड़े है|

करड़, पटोदा, गोटन, न्यांगली राजपूत युवाओं के हत्याकांड के खिलाफ हुए सभी आन्दोलनों व संघर्षों में भी आपने बढ़ चढ़कर भाग लिया|

यही कुछ कारण है कि आज डीडवाना ही नहीं देशभर का राजपूत युवा आपसे जुड़ा है, आपको उनका पूर्ण समर्थन प्राप्त है जिसकी झलक सोशियल मीडिया पर आसानी से प्रत्यक्ष देखी जा सकती है|

Oct 24, 2013

राजस्थान इकाई गठित करने को भारतीय शक्ति दल की मंथन बैठक संपन्न

जयपुर : 24 अक्टूबर ! भारतीय शक्ति दल की केन्द्रीय कार्यकारणी व पार्टी की वैचारिक क्रांति दल के वरिष्ठ सदस्यों की राजस्थान में पार्टी इकाई गठित कर राज्य में पार्टी की राजनैतिक गतिविधियों को बढ़ा पार्टी को सशक्त बनाने हेतु होटल मधुबन पैलेस में एक वैचारिक मंथन बैठक संपन्न हुई|

बैठक में पार्टी के केन्द्रीय वरिष्ठ सदस्यों, जयपुर में पार्टी के विचारधारा से जुड़े वरिष्ठ सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने इस सम्बन्ध में पाटन के राव दिग्विजय सिंह जी तंवर को पार्टी की विचार धारा के बारे में विस्तार से अवगत कराया व बेदाग छवि के मालिक व वैचारिक रूप से सुलझे राव साहब को राज्य में पार्टी अध्यक्ष बन मार्गदर्शन करने का आग्रह किया| पार्टी की विचारधारा को अपनी सोच के अनुरूप मानते हुए व प्रभावित हो राव साहब पाटन ने कुछ चिंतन मनन कर निर्णय लेने के लिये कुछ समय माँगा| ज्ञात हो भारतीय शक्ति की केन्द्रीय कार्यकारणी के वरिष्ठ सदस्यों का एक दल २३ अक्टूबर को देश के पूर्व उप-राष्ट्रपति स्व.श्री भैरोंसिंह जी शेखावत की जयन्ती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करने जयपुर आया था| साथ ही भारतीय शक्ति दल राजस्थान विधान सभा चुनावों में २० से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रहा है|

Oct 21, 2013

डीडवाना में राजपूत राजनैतिक जनजागृति सम्मेलन सम्पन्न

डीडवाना : १९ अक्तूबर २०१३ - राजनीति के साथ समाज का भविष्य तय करना है। राजनीति से पहले समाज है, अगर समाज में एकजुटता होगी तो भविष्य भी उज्जवल होगा। यह विचार हिम्मत राजपूत छात्रावास में खींवसर के प्रत्याशी दुर्गसिंह चौहान ने राजनैतिक जनजागृति सम्मेलन में व्यक्त किए। चौहान ने मंच पर बैठे राजपूत सरपंचों की बढ़ती संख्या पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह समाज की एकजुटता का परिचय है कि इतने राजपूत सरपंच बन सके है। उन्होंने कहा कि समाज का व्यक्ति गत 9 वर्षो से डीडवाना विधानसभा क्षेत्र में समाज के उत्थान के लिए दिन-रात प्रयासरत है, अगर इसका आर्थिक सहयोग, यातायात सहयोग कर सकते हो तो जरूर करे, फिर भी आपके बीच में श्यामप्रताप सिंह राठौड़ समाज में एकजुटता लाने एवं गरीबों की भलाई करने के लिए दिन-रात जुटे हुए है।

समाज के सरदारों से चौहान ने अपील करते हुए कहा कि राजनीति का सफर करने के लिए समाज में जागृति लाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि भाजपा एवं कांग्रेस से मुझे कोई नाराजगी नहीं है, आज समय चोट करने का हैं एवं समाज को फायदा एवं दिशा देकर दिशा बदलनी है। आज पार्टीयों में वरिष्ठ नेता बनकर बैठे कुछ नेता समाज का हिस्सा खा रहे है, इन नेताओं से बचकर चलना है। राजघराने की चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन में राजघराने का व्यक्ति आकर कभी भी समाज के साथ खड़ा नहीं हुआ है, परन्तु समाज की ठेकेदारी एवं टिकटों में सबसे आगे रहते है। राजपूत 60 वर्षो से दोहरी मार झेलता आया है परन्तु आज समय करवट ले रहा है और मात्र अपनी सोच को बदलना है ताकि आने वाले समय में समाज का व्यक्ति विधानसभा पंहुच सके।

चौहान ने कहा कि श्यामप्रताप सिंह राठौड़ आज 56 कौम को साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहा है। गरीबो को गले लगा रहा है परन्तु जरूरत है कि हमें भी सोचना एवं हिम्मत दिखानी चाहिए और गरीब को गले लगाकर उसका भला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई पार्टी खराब नहीं है परन्तु हमें अपने ही समाज के लोगों को आगे लाना है ताकि हमारे समाज की समस्याओं को दूर कर सके। उन्होंने राठौड़ की तारीफ करते हुए कहा कि गत चुनाव में राठौड़ ने 17 हजार करीब वोट लिए और मैं दावा करते हुं कि इस चुनाव में कांग्रेस एवं भाजपा दोनो पार्टीयों को हराकर विधानसभा पंहुचेगे। उन्होंने समाज के बैठे हुए लोगों से कहा कि भाजपा एवं कांग्रेस द्वारा दिए जा रहे झूठे स्वाभिमान को गले से उतारकर फेंक दो और समाज की एकजुटता बनाकर भाई राठौड़ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प ले।

डीडवाना विधानसभा क्षेत्र के बसपा प्रत्याशी श्यामप्रताप सिंह राठौड़ ने उपस्थित महिलाओं एवं पुरूषों को सम्बोधित करते हुए कहा कि गत चुनाव में मैने डीडवाना आने पर जो वातावरण देखा, उससे मेरी भावना प्रकट हुई और मैंने महसूस करते हुए डीडवाना क्षेत्र को चुना और गांव-गांव, ढ़ाणी-ढ़ाणी पंहुचकर लोगों की समस्याओं से अवगत होकर प्रशासन के समक्ष रखी। गत चुनावों में मैनें 17 हजार वोट लेकर हारने के पश्चात भी लगातार पांच वर्षो तक डीडवाना विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया और विश्वास कायम करते हुए हर परिस्थिति में मैंने लोगों का विश्वास हासिल किया। उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में परिवर्तन लाकर रहेगें परन्तु आप सब का सहयोग भी आवश्यक है।

जनजागृति लाने के लिए महिलाओं को भी आगे आना होगा। महिलाएं ही घर-घर सम्पर्क करके आज के सम्मेलन की चर्चा करे ताकि लोगों के सामने सच्चाई आ सके। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग मेरे बारे में भ्रामक प्रचार कर रहे है कि मैं पैसा लेकर चुनाव लड़ रहा हूं और मात्र भाजपा को हराना चाहता हूं, परन्तु मेरे बारे में जो लोग भ्रामक प्रचार कर रहे है वे समाज के हितैषी नहीं हो सकते, मैनें कभी भी किसे से भी कोई सहायता या पैसा नहीं मांगा है परन्तु यह सच है कि मैं कांग्रेस एवं भाजपा दोनो को हराकर इस बार विधानसभा जरूर पंहुचुगा, परन्तु आज उपस्थित जनसमूह में राजनैतिक जनजागृति लाना अति आवश्यक है। चारण एवं मेघवाल समाज के लोग भी समर्थन दे रहे है, समाज के लोग एकजुट होकर परिवर्तन लाने में सहयोग करें। मैं दोनो पार्टीयों के विरोध में खड़ा हुआ हूं और मुझे पूरा भरोसा हैं कि मैं विजय हासिल करूंगा। राठौड़ ने भ्रामक प्रचार करने वाले को संदेश देते हुए कहा कि जो हमारे अग्रज है भगवान उन्हें सदबुद्धि दे कि वे समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्य करें, चाहे किसी भी पार्टी में क्यो नहीं हो।

इससे पूर्व सभी अतिथियों का मारवाड़ी परम्परानुसार साफा एवं महिलाओं को शॉल ओढक़र सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन सुरेन्द्र सिंह थेबड़ी ने किया।

ये थे उपस्थित

सरपंच दशरथसिंह झाड़ौद, मांगू सिंह बेगसर, भोमसिंह आकोदा, कमल कंवर खोजाश, रतन कंवर लोरोली, इन्द्र कंवर भवाद, कैलाश कंवर मण्डूकरा सरपंच, भंवर कंवर सानिया सरपंच, नन्दु कंवर दुदौली, सुरेन्द्र सिंह ढिग़ाल, श्रवण सिंह उपसरपंच डसाणा, मदनसिंह पूर्व सरपंच गावड़ी, पूर्णसिंह बावड़ी, नरपतसिंह रूवां, नरपत सिंह उपसरपंच पालोट, ईचरज कंवर आजड़ोली पूर्व सरपंच, भगवान सिंह डसाणा पूर्व उपसरपंच, रघुवीर सिंह बड़ी छापरी, रामचन्द्र सिंह गावड़ी, भंवर सिंह पूर्व कमाण्डेड भी उपस्थित थे।

इन्होंने भी किया सम्बोधित

इस अवसर पर मारवाड़ राजपूत सभा के अध्यक्ष हनुमानसिंह खांगटा ने भी सम्बोधित करते हुए कहा कि आज राठौड़ गत नौ वर्षो से लगातार आप लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए संघर्षरत है। उन्होंने राठौड़ का साथ देने एवं समाज में एकजुटता लाने का भी आव्हान किया और आने वाले चुनावों में समाज को एकजुट होकर ज्यादा से ज्यादा वोट पक्ष में डलवाना है। कैप्टन नन्दसिंह रसीदपुरा, देवी सिंह बड़ाबरा ने भी सम्बोधित करते हुए समाज को जागृत होने की अपील की।

नागौर लाइव डॉट इन से साभार
चित्र : जोधा रणसीसर की फेसबुक वाल से

Oct 19, 2013

करणी सेना "राजनैतिक जागरूकता सन्देश" प्रदेश दौरे पर

राजस्थान में राजपूत समाज का अग्रणी सामाजिक संगठन श्री राजपूत करणी सेना विधानसभा चुनाव को मध्यनजर समाज को वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में ढालने हेतु राजनैतिक जागरूकता हेतु प्रदेश के दौरे पर है इस तीन दिवसीय प्रथम चरण में शेखावाटी की सीटों पर करणी सेनिको से ली स्थानीय समीकरणों की जानकारी . दूसरा चरण अक्टूबर की शुरुआत देशनोक की पवन धरा से होगी , जो की बीकानेर , फलोदी , बाड़मेर , बालोतरा , जोधपुर , पाली , जालौर , माउन्ट आबू , उदयपुर , भीलवाडा , अजमेर , होते हुए जयपुर में समाप्त होगा . शेष राजस्थान तक तीसरे व् चौथे चरण में पंहुचा जायेग

Oct 18, 2013

राजस्थान की २० से 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगा भारतीय शक्ति दल

स्व. आयुवान सिंह जी शेखावत और क्षत्रिय वीर ज्योति की राजनैतिक विचारधारा को धरातल पर लाने हेतु हाल ही में घटित भारतीय शक्ति दल की कल दिल्ली के मालवीय नगर में एक उच्च स्तरीय मंथन बैठक हुई| बैठक में शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.वी.पी. सिंह, कैप्टेन राय और क्षत्रिय वीर ज्योति के वरिष्ठ सदस्य शामिल थे|

बैठक में पार्टी को मजबूत करने, पार्टी सदस्यों के आकंडे कंप्यूटरीकृत करने, राज्य में जिला, विधानसभा व पंचायत स्तर पर कमेटियां गठित करने, पार्टी की विचारधारा से जुड़े अन्य दलों से चुनाव लड़ने वाले आर्थिक दृष्टि से कमजोर प्रत्याशियों की आर्थिक मदद करने, प्रभावी मीडिया सैल गठित करने के साथ ही राजस्थान में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में २० से 25 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया| जिनमें क्षत्रियों की पारम्परिक सहयोगी दलित जातियों को भी प्रतिनिधित्त्व देने का निर्णय लेते हुए दलितों को भी टिकट देने पर सहमती बनी|

शक्ति दल ने राजस्थान में अपने चुनाव लड़ने की रणनीति स्पष्ट करते हुए साफ़ किया कि जिस किसी विधान सभा क्षेत्र से क्षत्रिय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है भले ही वह किसी पार्टी से हो शक्ति दल उनके खिलाफ किसी को टिकट नहीं देगा और क्षत्रिय उम्मीदवार का समर्थन करेगा|

ज्ञात हो क्षत्रिय वीर ज्योति राजस्थान विधानसभा में सभी दलों के मिलाकर ४० क्षत्रिय विधायक विधानसभा में पहुंचाने की रणनीति पर कार्य कर रहा है| और क्षत्रिय वीर ज्योति की इस मुहीम में राजस्थान के कई क्षत्रिय सामाजिक संगठन साथ दे रहे है| अभी भारतीय शक्ति दल की और से अलवर की दो सीटों बानसूर व अलवर विधानसभा क्षेत्र से क्रमश: रमेश सिंह शेखावत व बच्चू सिंह बसेठ का नाम घोषित किया गया है|

Oct 17, 2013

जेता-कुम्पा के बलिदान से प्रेरणा ले राजपूत युवा : उम्मेद सिंह करीरी

जोधपुर के सेनापति जेता और कुम्पा से "सुमेल गिरी" युद्ध के पश्चात् शेरशाह सूरी का ये कथन कि - "मैं मुठ्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत गँवा बैठता|" शायद हर राजपूत को गौरवान्वित कर देने के लिए प्रयाप्त होता है| लेकिन मित्रों क्या जेता कुम्पा के इस बलिदानी निर्णय पर कभी विचार मंथन किया है ??

ऐसी क्या परिस्तिथियाँ रही होंगी उनके सामने की नौ कुंटी मारवाड़धीश (जोधपुर नरेश मालदेव) के मैदान छोड़ने के निर्णय के बावजूद उन्होंने शेरशाह सूरी का सामना कर उसके दांत खट्टे कर डाले| क्योंकि उन्हें अपनी मातृभूमि, अपनी कौम के सम्मान, अपने देश की जनता से मोहब्बत थी| वो अपनी कौम का अस्तित्व बचाने के लिए लड़े, और हिंदुस्तान के सुल्तान शेरशाह सूरी को ये कहने के लिए विवश कर डाला "मैं मुठ्ठी भर बाजरे के की लिए हिंदुस्तान की सल्तनत गँवा बैठता" जिस पर हम सब का सीना गर्व से फूल उठता है|

मित्रों क्या हम अपनी कौम का अस्तित्व बचाने के लिए इस चुनावी समर में एक दिन के लिए जेता और कुम्पा जैसा निस्वार्थ समर्पण अपनी कोम के लिए नहीं दिखा सकते ?? क्या हम अपने क्षणिक लाभ हित की चिंता छोड़ समाज के हित की परवाह नही कर सकते ?? आपको अपना मत राजपूत को कमजोर करने वाली राजपूत विरोधी पार्टियों को देना है ? या सिर्फ राजपूत उम्मीद्वार को भले वो किसी भी पार्टी से हो ! जितनी ज्यादा संख्यां में हमारे लोग विधायिका में पहुंचेंगे उतनी ही मजबूती इस कौम के अस्तित्व को मिलने वाली है|

आपको जानकारी दे दू वर्तमान विधानसभा में 25 राजपूत विधायक है, इनमे राजपूत नहीं आम राजपूत कितने है आप जानते ?? 15 राजपरिवारो से जिन्हें आम राजपूत की न तकलीफ से मतलब है न हमारे गिरते हुए ग्राफ से ...आम राजपूत सिर्फ दस है| समाज बंधुओं जो हमारे हित में कार्य करने के लिए हम सब ने मिल कर जिताए ....... उनमे से पाँच पार्टियों के जरखरीद बन बैठे.....बाकि बचे पाँच को ये सरकारी भय दिखा चुप करा देते है|

विचार कीजिये ऐसे कौन लोग होंगे ? जो आम राजपूत की बात को अपने अस्तित्व से जोड़ जेपा और कुम्पा की भांति अपना सर्वस्व लुटा कौम के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रतिबद्ध होंगे .......? इस चुनाव में सिर्फ आम राजपूत को वोट कीजिये राज घराने का गोबर उठा अपने गुलाम होने वाली मानसिकता से छुटकारा पा लीजिये ...अपना समय और समर्थन आम राजपूत के लिए खर्च कीजिये .......... सोचो ..........समझो ........... समर्पण ............ और समर्थन .... तभी कीजियेगा ...... कई आयेंगे कौम बेंचने !!

सिर्फ कौम के लिए मतदान कीजियेगा मित्रो मेरी यही इल्तिजा ......प्राथर्ना अनुनय विनय ओर आराधना है ...........जय क्षात्र धर्म (उम्मेद सिंह करीरी : अध्यक्ष, राजपूत युवा परिषद् राजस्थान)

Oct 12, 2013

राजपूत युवा परिषद् अलवर ने किया वीरांगनाओं का सम्मान

श्री राजपूत युवा परिषद् की ओर से शुक्रवार को अलवर शहर के कोठी गंगा निवास में आयोजित कार्यक्रम में वीरांगनाओं को सम्मानित किया गया और महापुरुषों के चित्रों की प्रदर्शनी के साथ राजपूत इतिहास से सम्बंधित पुस्तक मेले का आयोजन किया गया| इस अवसर पर वीरांगनाओं को कार्यक्रम के अतिथियों ने शाल ओढ़ाकर व प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया|

कार्यक्रम में आये वक्ताओं ने समाज को एकजुट रहने का आव्हान किया| वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज का व्यक्ति किसी भी राजनैतिक पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़े हमारा लक्ष्य उसे जीतना होना चाहिए| जिससे राजपूत समाज के अधिक से अधिक लोग चुनकर विधानसभा में जाये| कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संगठन के संस्थापक सदस्य महावीर सिंह राठौड़ थे, जबकि विशेष अतिथि संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उम्मेदसिंह करीरी थे|

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर्नल राजेन्द्र सिंह नरुका व अलवर विधानसभा से भारतीय शक्ति दल के उम्मीदवार बच्चू सिंह बसेठ ने की| मंच संचालन संगठन के अलवर जिलाध्यक्ष राहुल सिंह शेखावत ने किया|

Oct 8, 2013

      !!"राजपूत है हम"!!

कहते तो हम सब है की राजपूत है हम ,
मानवता की लाज बचाने वाले हिन्द के 
वो सपूत है हम ।

पर वो क्षत्रियोचित सँस्कार अब कँहा है ।
वो राणा और शिवाजी की तलवार अब कँहा है॥

बेटे तो हम उन मर्यादापुरुषोत्तम राम
के वँश के है ।
और राणा शिवाजी और दुर्गा दास जी के
अँश के है ॥

तो फिर राम का मर्यादित जीवन अब कँहा है ।
राणा और दुर्गादास जी के जैसी लगन अब कँहा हैँ ॥

दानी कर्ण और राजा शिवी का नाम हम लेते है ।
भागिरथ और सत्यवादी हरिश्चन्द्र की साख हम
दूनियाँ को देते है॥

तो फिर भागिरथ जैसा तप अब कँहा है ।
झुकाया था भगवान को सत्य के आगे वो
सत्य का अवलम्ब अब कँहा है ।

हमेँ गर्व है की हम शर कटने पे भी लङते थे ।
खेल खेल मेँ ही हमारे वीर जँगली शेरो से अङते थे।

जिस सत के सहारे धङ लङते थे वो सत
अब कँहा है ।
आज वो हजार हाथीयोँ का अथाह बल
अब कँहा है।

सतयुग, त्रेता और द्वापर तो क्षत्रियोँ के स्वर्ण युग रहै ।
कलयुग मे भी आज तक क्षत्रिय श्रेष्ठ रहे चाहै
उन्होने कठिन कष्ठ सहै ॥

पर सोचना तो हमे है जो क्षत्रिय धर्म
और सँस्कार भूल रहै ।
देख रहा हुँ आज शेर भी गीदङो की
गुलामी कबूल रहै है

अब तो ईस राख मे छुपे अँगारे
को जगा लो साथियोँ ।
जिस धर्म ने महान बनाया हमे
उसे अपनालो साथियोँ ।
जय क्षत्रिय ॥
जय क्षात्र धर्म ॥

Oct 2, 2013

क्या है जोधा बाई की एतिहासिक सच्चाई ??

आदि-काल से क्षत्रियो के राजनीतिक शत्रु उनके प्रभुत्वता को चुनौती देते आये है ! किन्तु क्षत्रिय अपने क्षात्र-धर्म के पालन से उन सभी षड्यंत्रों का मुकाबला सफलता पूर्वक करते रहे है ! कभी कश्यप ऋषि और दिति के वंशजो जिन्हें कालांतर के दैत्य या राक्षस नाम दिया गया था, क्षत्रियो से सत्ता हथियाने के लिए भिन्न भिन्न प्रकार से आडम्बर और कुचक्रो को रचते रहे ! और कुरुक्षेत्र के महाभारत में जबकि अधिकांश ज्ञानवान क्षत्रियों ने एक साथ वीरगति प्राप्त कर ली, उसके बाद से ही हमारे इतिहास को केवल कलम के बल पर दूषित कर दिया गया ! इतिहास में भरसक प्रयास किया गया की उसमे हमारे शत्रुओं को महिमामंडित किया जाये और क्षत्रिय गौरव को नष्ट किया जाये !

किन्तु जिस प्रकार किसे हीरे के ऊपर लाख धूल डालो उसकी चमक फीकी नहीं पड़ती ठीक वैसे ही ,क्षत्रिय गौरव उस दूषित किये गए इतिहास से भी अपनी चमक बिखेरता रहा ! फिर धार्मिक आडम्बरो के जरिये क्षत्रियो को प्रथम स्थान से दुसरे स्थान पर धकेलने का कुचक्र प्रारम्भ हुआ ,जिसमे आंशिक सफलता भी मिली,,,,किन्तु क्षत्रियों की राज्य शक्ति को कमजोर करने के लिए उनकी साधना पद्दति को भ्रष्ट करना जरुरी समझा गया इसिलिय्रे अधर्म को धर्म बनाकर पेश किया गया ! सात्विक यज्ञों के स्थान पर कर्म्-कांडो और ढोंग को प्रश्रय दिया गया ! इसके विरोध में क्षत्रिय राजकुमारों द्वारा धार्मिक आन्दोलन चलाये गए जिन्हें धर्मद्रोही पंडा-वाद ने धर्म-विरोधी घोषित कर दिया ,,इस कारण इन क्षत्रिय राजकुमारों के अनुयायियों ने नए पन्थो का जन्म दिया जो आज अनेक नामो से धर्म कहलाते है ,,,,,ये नए धर्म चूँकि केवल एक महान व्यक्ति की विचारधारा के समर्थक रह गए और मूल क्षात्र-धर्म से दूर होगये, इस कारण कालांतर में यह भी अपने लक्ष्य से भटक कर स्वयं ढोंग और आडम्बर से ग्रषित होगये ! इसके बाद इन्ही धर्मो में से इस्लाम ने बाकी धर्मो को नष्ट करने हेतु तलवार का सहारा लिया ,,,इस कारण क्षत्रियों ने इसका जम कर विरोध किया और इस्लाम के समर्थको ने राज्य सत्ता को धर्म विस्तार के लिए आसान तरीका समझ ,आदिकाल से स्थापित क्षत्रिय साम्राज्यों को ढहाना शुरू कर दिया ! क्षत्रियों ने शस्त्र तकनिकी को तत्कालीन वैज्ञानिक समुदाय यानि ब्राह्मणों के भरोसे छोड़ दिया तो, परिणाम हुआ क्षत्रिय तोप के आगे तलवारों से लड़ते रहे ,,,,,चंगेज खान से लेकर बाबर तक तो सिर्फ भारत को लूटते रहे किन्तु बाबर ने भारत में अपना स्थायी साम्राज्य स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर ली !

किन्तु भारत में पहले ही आ चुके अफगानों ने हुमायु से सत्ता छीन ली और हुमायूँ दर-दर की ठोकरे खाता हुआ हुआ शरण के लिए अमरकोट के राजपूत राजा के यहाँ पहुंचा !अपनी गर्भवती बेगम को राजपूतों की शरण में छोड़ ,अपने राज्य को पुनः प्राप्त करने की तैयारियों में जुट गया !वहीँ जलालुद्धीनका जन्म हुआ और १३ वर्ष तक उसकी परवरिश राजपूत परिवार में हुयी ! हुमायूँ जब बादशाह बना तब पर्शिया से कुछ परिवारों को अपने साथ भारत लाया था ! जो की मूलरूप से मीनाकारी का कार्य किया करते थे ! उनके परिवारों में लड़कियों के विवाह का चलन नहीं था ,,इस कारण उनके कुछ परिवार अमरकोट और उसके आसपास कुछ पर्शियन लड़कियाँ दासियों का कार्य करती थी! इन्ही में से कुछ दासिया जोधपुर राजपरिवार में भी रहने लगी ! जोधपुर की राजकुमारी की एक निजी दासी जो पर्शियन थी ,जब उसके एक कन्या का जन्म हुआ तब वह रोने लगी कि इस बच्ची का कोई भविष्य नहीं है क्योंकि इसका विवाह नहीं होगा , तब राजकुमारी ने उसे वचन दिया कि मै इसका विवाह किसी राजपरिवार में करूंगी !

जब जोधपुर कि राजकुमारी जो कि आमेर के राजा भारमल की रानी बनी ,ने प्रथम मिलन की रात्रि को ही राजा भारमल से वचन ले लिया कि हरखू को मैंने अपनी धर्म बेटी बनाया हुआ है और मै चाहती हूँ कि उसका विवाह किसी राजपरिवार में हो ,,राजा भारमल ने जोधपुर की राजकुमारी को वचन दे दिया कि वह उसका विवाह किसी राजपरिवार में कर देंगे ! किन्तु यह आसान कार्य नहीं था क्योंकि किसी भी राजपूत परिवार ने हरखू से विवाह करना उचित नहीं समझा इस कारण उसकी उम्र काफी हो गई! किसी भी राजपरिवार तो दूर साधारण गैर राजपूत हिन्दू परिवार ने भी तत्कालीन परिस्थितियों में हरखू से विवाह करने से मना कर दिया ,,इस कारण रानी का राजा भारमल से अपना वचन नहीं निभाने का उलहना असहनीय होता जा रहा था ! इससे पूर्व जलालुद्धीन अकबर जब बादशाह बना तब ढूँढार (आमेर) में नरुकाओं का विद्रोह चल रहा था, इस कारण राजा भारमल ने बाध्य होकर अकबर से संधि करली थी, ताकि नरुकाओं एवं अन्य सरदारों के विद्रोह को दबाया जासके ! और अकबर से राजा भारमल की इस संधि में कोई वैवाहिक शर्त जैसा कि आज दिखाने का प्रयास किया जाता है, कुछ नहीं था !जब अकबर अजमेर शरीफ की यात्रा के लिए जा रहा था,तो रास्ते में राजा भारमल जी ने शिष्टाचार भेट कि तो वह कुछ चिंतित थे, अकबर ने भारमल जी से चिंता का कारण जाना तो उन्होंने हरखू के के विवाह से सम्बंधित बात सविस्तार बतायी ,,अकबर ने पूंछा कि "महाराज उसका विवाह हिन्दू रीती से होगा या मुश्लिम रीति से?" भारमल जी ने बताया कि हिन्दू रीति से तब अकबर ने पूंछा कि कन्यादान कौन करेगा ? भारमल जी ने कहा कि हरखू मेरी धर्म पुत्री है और इस नाते कन्यादान मै ही करूँगा ! तब बादशाह अकबर ने कहा कि "मै राजपूत नहीं हूँ, किन्तु मेरा जन्म और परवरिश राजपूत परिवार में हुयी थी ,,,ठीक उसी तरह जैसे हरखू राजपूत नहीं है , किन्तु उसका भी जन्म और परवरिश भी राजपूत परिवार में हुयी है " अतः यदि आपको उसके पिता बनाने में कोई ऐतराज नहीं तो मुझे उसके साथ विवाह करने में भी कोई ऐतराज नहीं है !

इसके बाद हरखू का विवाह अकबर के साथ किया गया ! यह कोई शर्मिंदगी या बदनामी की बात नहीं थी ,बल्कि राजा भारमल की बुद्धिमानी और धर्म और नारी जाति के प्रति सम्मान था,जिसकी सर्वत्र प्रशंसा की गयी,खासतोर पर पर्शिया के धर्म गुरुओं ने राजा भारमल को पत्र लिखकर एक पर्शिया लड़की के जीवन को संवारने के लिए प्रशंसा पत्र भेजा ! सिक्खों के गुरुओं ने भी इसकी प्रशंसा की और राजा भारमल की बुद्धिमानी के लिए साधुवाद दिया ! यह कहना गलत है कि यह हरखू जीवन भर हिन्दू रही,, ,वह कभी भी हिन्दू नहीं थी ,,,हां जब वह आमेर में रहती थी तब आमेर राजपरिवार के इष्ट देव श्री गोविन्देव जी की पूजा किया करती थी, इस कारण वह गोविन्द देव जी की पुजारी जरुर थी वरन तो वह फिर कभी भी जीवन में हरखू नहीं कहलाई उसका नाम मरियम बेगम पड़ गया और उसे बाकायदा इस्लाम रीति से ही कब्र में दफनाया गया था ! जहाँगीर उसी मरियम उज्जमानी का बेटा था ! जोधा नाम से जो प्रसिद्द थी वह जोधपुर की एक दासिपुत्री जगत गुसाईं (जो कि हरखू के ही भाई कि बेटी थी), जिसका निकाह जहाँगीर के साथ हुआ था और शाहजहाँ की माँ थी ,वह चूँकि जोधपुर से सम्बंधित थी और उसका कन्यादान मोटा राजा उदय सिंह जी ने किया था , इस कारण जोधा भी कहलाती थी !

रही बात आज लोग उस जगत गुसाईं उर्फ़ जोधा को अकबर से क्यों जोड़ बैठे ?? तो यह तो सिर्फ फ़िल्मी जगत की उपज है ,जब पहली बार हरखू को जोधा बाई बना दिया गया, वह थी मुगले-आजम फिल्म ,,उस समय फिल्मों को कोई गंभीरता से नहीं लेता था ! इस कारण फिल्म की प्रसिद्धि के बाद जोधा का नाम अकबर से जुड़ गया ! और इस फिल्म के बाद जो छोटे मोटे इतिहासकार हुए उन्होंने भी अकबर के साथ जोधा का नाम जोड़ने का ही दुष्कृत्य किया है ! और रही सही कसर पूरी कर दी आशुतोष गोवोरकर ने "जोधा-अकबर" नाम से फिल्म बनाकर !अब इसे आगे बढ़ा रही है ,नारी के नाम पर धब्बा ,एकता कपूर जो एक बदनाम सीरियल को जी टी वी पर प्रसारित लगातार प्रसारित किये जारही है ! अब हम बात करते है कि यह सब अनायास हुआ या किसी साजिश के जरिये ???? बहुत सी डीबेटों में हम से यह भी पूंछा गया गया कि आखिर फिल्म ,टी.वी.और मिडिया ,शासन-प्रशासन और तमाम प्रचार प्रसार के साधन राजपूत -क्षत्रिय संस्कृति के विरोधी क्यों होगये ?? इसका बिलकुल साफ-साफ उत्तर है कि देश के विभाजन से पूर्व तक लगभग सभी स्थानीय निकाय या शासन तंत्र पर क्षत्रियों का ही अधिकार था और यदि राजपूत-क्षत्रियों की छवि को धूमिल नहीं किया जाता तो, हमसे जिन लोगो ने सत्ता केवल झूंठ और लोगो को सब्जबाग दिखाकर प्राप्त की थी, उसे शीघ्र ही क्षत्रिय समाज पुनः वापिस लेलता !और हो सकता है कि राष्ट्र को आज तक के ये दुर्दिन देखने ही नहीं पड़ते !इसलिए राजनीतिक षड़यंत्र के तहत क्षत्रिय समाज की संस्कृति ,इतिहास और छवि को मटियामेट करने के लिए समस्त साधन एकजुट होकर हमला करने लगे ,,,,ताकि क्षत्रिय होना कोई गौरव की बात नहीं रहे बल्कि शर्म की बात होजाये,,,,,किन्तु क्षत्रिय समाज ने अपने पुरुषार्थ के बल पर न केवल अपनी प्रसान्सगिकता ही बनाये रखी बल्कि तमाम दुश्चक्रो को तोड़ने में सक्षमता दिखाई है ,,,,,,इस कारण यह समस्त विरोधी शक्ति एक साथ अब पुनः क्षत्रिय स्वाभिमान और गौरव को नष्ट करने में जुट गयी है !जहाँ तक इतिहास का सवाल है तो वर्तमान समय में उपलब्द्ध इतिहास दो तरह के लोगो के द्वारा लिखा गया है ,,,,एक तो चारणों ,भाटों और राजपुरोहितों द्वारा लिखा गया है, इसमें यह कमी रही है कि यह या तो अपने स्वामी की प्रशंसा में या अपने स्वामी के शत्रु की छवि को धूमिल करने के लिए लोखा गया था !

दूसरी तरफ लिखा गया इतिहास विदेशी आक्रान्ताओं और हमारे राजनितिक शत्रुओं ने अपने स्वामी मुगलों और आतातायियों के पक्ष में इतिहास लिखा और हमारे चारणों और भाटों ने हमारे लिए इतिहास लिखा किन्तु देश के विभाजन के बाद पंडित नेहरू जैसे लोगों ने हमारे राजनितिक शत्रुओं और विदेशी आक्रान्ताओं के लिखे इतिहास को मान्यता दी ताकि क्षत्रियो की छवि को धूमिल किया जासकें और हमारे परम्परागत इतिहासकारों के इतिहास को ख़ारिज कर दिया ताकि क्षत्रियो में स्वाभिमान के पुनर्जीवन का अवसर ही नहीं मिल पाए ! !,,,,,फिर भी लोकगीतों,भजनों,लोक-कथाओं,स्वतन्त्र कहानीकार और साहित्यकार मुंशी प्रेम चंद जैसे लोगों, मंदिर के शिलालेखो,के जरिये आमजनता के समक्ष क्षत्रिय गौरव पहुँच गया है !इसलिए शिक्षा के नाम पर जो इतिहास पढाया जाता है ,और मनोरंजन के नाम पर टी.वी. पर जो दिखाया जाता है वह असत्य के आलावा और कुछ नहीं है !!!! ऐसे में हम क्षत्रिय जो समस्त चर-अचर ब्रह्मांड के रक्षक है, क्या केवल अपने धर्म ,संस्कृति और गौरव की रक्षा के लिए भी नहीं जागेंगे ???? तब धिक्कार है ऐसे कायरता और नपुंसकता भरे जीवन को ,,,,,,,,,

"जय क्षात्र-धर्म"
कुँवरानी निशा कँवर चौहान