Apr 24, 2009

राजस्थान के लोक देवता श्री गोगा जी चौहान


राजस्थान की लोक गाथाओं में असंख्य देवी देवताओं की कथा सुनने में आती है | इन कथाओं में एक कथा श्री जाहर वीर गोगा जी चौहान की भी है | मै इस कथा के बारे में लिखने से पहले पाठको को एक बात बताता चलू की यह कथा इतिहास के नजरिये से अगर आप देखते है तो इसमें बहुत से विवाद और पेच है | और जन मानस की भावना के दृष्टीकोण से देखने पर यह आपको एक सुन्दर कथा लगेगी |
वर्तमानकाल में जिसे ददरेवा कहा जाता है यह जिला चुरू (राज.) में आता है | इसका पुराना ऐतिहासिक महत्व भी था क्यों की यह चौहान शासको की राजधानी थी | ददरेवा के राजा जीव राज जी चौहान की पत्नी ने भगवान की भक्ती की जिसके फलस्वरुप वहा गुरु गोरखा नाथ जी महाराज पधारे और उन्होंने बछल देवी को संतानोपत्ति का आशीर्वाद दिया | कुछ समय उपरांत उनके घर एक सुन्दर राजकुमार का जन्म हुआ | जिसका नाम भी गुरु गोरखनाथ जी के नाम के पहले अक्षर से ही रखा गया | यानी गुरु का गु और गोरख का गो यानी की गुगो जिसे बाद में गोगा जी कहा जाने लगा | गोगा जी ने गूरू गोरख नाथ जी से तंत्र की शिक्षा भी प्राप्त की थी |
यहाँ राजस्थान में गोगा जी को सर्पो के देवता के रूप में पूजा जाता है | कुछ कथाकार इनको पाबूजी महाराज के समकालीन मानते है तो कुछ इतिहास कार गोगाजी व पाबूजी के समयाकाल में दो सो से दाई सो वर्षो का अंतराल मानते है | कथाओं के मुताबिक पाबूजी के बड़े भाई बुढाजी की पुत्री केलम इनकी पत्नी थी | इनकी शादी का भी एक रोचक वर्तांत है जो मै अगले भाग में बताऊंगा |
नोट - इस पोस्ट में लिए गए चित्र हमारे नही है गूगल से लिए गए है | कथा लोगो के मुख से सुनी गयी है | इस पोस्ट के किसी भी अंश पर किसी को आपत्ति हो तो हम से समपर्क करे हम तुंरत हटा देंगे |

Apr 10, 2009

बलि पथ के सुंदर प्राण

बलि पथ के सुंदर प्राण |
बलि होना धर्म तुम्हारा,
जीवन हित क्यों पय पान ||

आज खडा तू मंदिर आगे,
देव पुरुष के है भाग्य जागे |
टूट रहे है जग के धागे ||
मत मांग अभय वरदान ||१||
जीवन है कर्तव्य की कहानी,
चंद दिनों की मस्त जवानी |
मर कर चख ले रे अज्ञानी ||
कर ले पुरे अरमान ||२||
दीपक की बलि है जलने में,
फूलों की बलि है खिलने में |
बलि होता स्वच्छ सलिल झरने में ||
कह बलिदान चाहे कल्याण ||३||
वीर पूंग्वो की धरनी पर ,
प्रेममई भारत जननी पर |
यज्ञ भूमि दुःख ताप हरनि पर ||
अब जलने दो श्मशान ||४||
श्री तन सिंह बाड़मेर
२४ मार्च १९५०

Apr 5, 2009

आराम कहाँ

आराम कहाँ अब जीवन में अरमान अधूरे रह जाते |
दिल की धड़कन शेष रहे हाथों के तोते उड़ जाते ||

तिल-तिल कर तन की त्याग तपस्या का अमृत संचय करते |
अमिय भरे रस कुम्भ कभी यदि माया की ठोकर खाते ||

सागर में सीपें खोज-खोज माला में मोती पोये थे |
पर हाय ! अचानक टूट पड़े यदि प्रेम तंतु जब पहनाते ||

घोर अँधेरी रात्रि में था दीप जला टिम-टिम करता |
अंधेर हुआ जब बह निकला नैराश्य पवन मग में चलते ||

निर्जीव अँगुलियों के चलते स्वर साधक बनना सीखा था |
मादक वीणा के टूट चुके हों तार अभागे हा ! बजते ||

बचपन में बाहें डाल चले सोचा था साथी है जग में |
दो कदम चले फिर बिछुड़ गए एकाकी को आराम कहाँ ?
श्री तन सिंह ,बाड़मेर
११ अगस्त १९४९

Apr 1, 2009

काली पहाड़ी ग्राम में जमुवाय माता के मन्दिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा

बगड़ ग्राम काली पहाडी में जमुवाय माता की मूर्ति स्थापना पर दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम में सोमवार को शोभा यात्रा निकाली गयी शोभा यात्रा टीले पर स्थित श्री करनी माता मंदिर से ग्राम के मुख्य मार्गो से होती हुये मंदिर स्थल पहुँची | आरम्भ में मंदिर परिसर में भक्त शायर सिंह शेखावत के सान्निध्य में पूजा अर्चना की गयी | शोभा यात्रा में फूलों से सजी जीप में जमुवाय माता की मूर्ति को विराजमान किया गया | मंदिर परिसर में पहुंचने के बाद हवन का कार्यक्रम हुआ | हवन का कार्यक्रम . सुभाष शर्मा के आचार्यत्व में हुआ |
मूर्ति के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में सोमवार को हुए जागरण में भजन गायकों ने एक से बढ़ कर एक प्रस्तुतिया दी | भजन गायक बलबीर बेदी , जानी राम बेदी & पार्टी ने माँ के भक्ति भरे भजन गाकर श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया |




मंगलवार ३१ मार्च दोपहर ११ बजे को इस दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का समापन जमुवाय माता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के साथ हुआ | प. सुभाष शर्मा व प्रकाश शर्मा के आचार्यत्व में भक्त शायर सिंह शेखावत व दादू द्वारा बगड़ के महा मंडलेश्वर अर्जुन दास महाराज ने प्राण प्रतिष्ठा कराई | इससे पूर्व ग्राम के चोंक में महा मंडलेश्वर का ग्रामीण जनों द्वारा बैंड बाजे के साथ स्वागत किया गया | चौक से मंदिर स्थल तक बैंड बाजे के साथ लाया गया | और हवन की पूर्ण आहुति का कार्यक्रम संपन्न किया गया | इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु व एव
गणमान्य लोग उपस्थित थे जिनमें पूर्व पालिका अध्यक्ष विक्रम सिंह शेखावत , कनिष्ठ अभियन्ता जगदीश सिंह शेखावत ,डॉ नत्थू सिंह शेखावत आदि मुख्य थे | इस अवशर पर मंदिर के मुख्य पुजारी शायर सिंह शेखावत ने बताया की इससे पूर्व जमुवाय माता का मंदिर धमाणा धाम ग्राम भोडकी जिला झुंझुनू में व बड़ा व पुराना मंदिर जमुवाय रामगढ में स्थित है | अब इस मंदिर के बन जाने से आस पास के शेखावत भक्तो को देवी के दर्शनों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा | ज्ञात रहे की माँ जमुवाय शेखावत वंश की कुल देवी है |
(इस पोस्ट मे जो चित्र काम मे लिये गये है वह अस्थायी है मूल चित्र बाद मे मिलेन्गे तब दुबारा लगा दिये जायेन्गे । यह रिपोर्ट दैनिक भास्कर के शेखावाटी संस्करण में दिनांक ३० व ३१ मार्च को प्रकाशन के अधार पर लिखी गयी )