वो कौम न मिटने पायेगी
ठोकर लगने पर हर बार , उठती जाएगी |
युग युग से लगे है यहाँ पर देवों के दरबार
इस आँगन में राम थे खेले , खेले कृष्ण कुमार , झूम उठे अवतार ||
गंगा को धरती पर लाने भागीरथ थे आये
ध्रुव की निष्ठा देख के भगवन पैदल दौड़े आये , साधक आते जायें ||
विपदा में जो देवों की थी अभयदायिनी त्राता ही
चंडी जिनकी कुलदेवी हो बल तो उसमे आता ही , जय दुर्गा माता की ||
बैरी से बदला लेने जो हंस हंस शीश चढाते
शीश कटे धड से अलबेले बढ़-बढ़ दांव लगाते , मरकर जीते जाते |
जिनके कुल की कुल ललनाएं कुल का मान बढाती
अपने कुल की लाज बचाने लपटों में जल जाती , यश अपयश समझाती ||
मरण को मंगलमय अवसर गिन विधि को हाथ दिखाने
कर केसरिया पिए कसूँबा जाते धूम मचाने , मौत को पाठ पढ़ाने ||
कितने मंदिर कितने तीरथ देते यही गवाही
गठजोड़ों को काट चले थे बजती रही शहनाई , सतियाँ स्वर्ग सिधाई ||
कष्टों में जिस कौम के बन्दे जंगल -जंगल छानेंगे
भोग एश्वर्य आदि की मनुहारें ना मानेंगे , घर-घर दीप जलाएंगे ||
स्व. श्री तन सिंह जी द्वारा रचित :७ जून १९६०
सुख और स्वातन्त्र्य
कसर नही है स्याणै मै
वो कौम न मिटने पायेगी
Ratan singh shekhawat, Mar 1, 2010
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स्व.श्री तनसिंहजी की कलम से
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सचमुच बहुत ओजस्वी कविता है | तन सिंह जी की लेखनी को सलाम |
होली की सतरंगी शुभकामनायें
बहुत ओज से भरी कविता। भावी पीढ़ी के लिये कंठस्थ करने योग्य है।
ओजपूर्ण कविता . हो सके तो इस्को सुनवाये भी
बहुत शानदार कविता
होली पर आपको अनेक शुभकामनाएं
उदकक्ष्वेड़िका …यानी बुंदेलखंड में होली
होली पर हार्दिक शुभकामनाएं. पढ़ते रहिए www.sansadji.com सांसदजी डॉट कॉम
स्व. तन सिंग जी की रचना पढ़वाने का आभार.
ये रंग भरा त्यौहार, चलो हम होली खेलें
प्रीत की बहे बयार, चलो हम होली खेलें.
पाले जितने द्वेष, चलो उनको बिसरा दें,
खुशी की हो बौछार,चलो हम होली खेलें.
आप एवं आपके परिवार को होली मुबारक.
-समीर लाल ’समीर’
बहुत सुंदर रचना ,स्व. तन सिंग जी का आभार ओर आप का धन्यवाद
THIS IS VERY NICE COMMENT