Jan 4, 2009

राजस्थान के लोक देवता श्री पाबूजी राठौङ भाग-2

राजस्थान के लोक देवता श्री पाबूजी राठौङ की कथा श्रृंखला की यह दूसरी कडी है । पाठकों से निवेदन है
कि इस लेख को इतिहास कि कसौटी पर ना परखे क्यों कि यह एक कथा है और जन मानस के मुख से
सुनी हुइ है ।श्री पाबूजी राठौङ का जन्म कोळू ग्राम में हुआ था । कोळू ग्राम जोधपुर से फ़लौदी जाते है
तो रास्ते मे आता है । कोळू ग्राम
के जागीरदार थे धांधल जी । धांधल जी की ख्याति व नेक नामी दूर दूर तक थी । एक दिन सुबह सवेरे
धांधलजी अपने तालाब पर नहाकर भगवान सूर्य को जल तर्पण कर रहे थे । तभी वहां पर एक बहुत ही
सुन्दर अप्सरा जमीन पर उतरी । राजा धांधल उसे देख कर मोहित हो गये । उन्होने अप्सरा के सामने
विवाह का प्रस्ताव रखा । जवाब में अप्सरा ने एक वचन मांगा कि राजन आप जब भी मेरे कक्ष में प्रवेश
करोगे तो सुचना करके ही प्रवेश करोगे ।जिस दिन आप वचन तोङेगें मै उसी दिन स्वर्ग लोक लौट जाउगीं।
राजा ने वचन दे दिया ।
कुछ समय बाद धांधलजी के घर मे पाबूजी के रूप मे अप्सरा रानी के गर्भ से पुत्र प्राप्ति होती है । समय
अच्छी तरह बीत रहा था । एक दिन भूल वश या कोतुहलवश धांधलजी अप्सरा रानी के कक्ष में बिना सूचित
किये प्रवेश कर जाते है । वे देखते है कि अप्सरा रानी पाबूजी को सिंहनी के रूप मे दूध पिला रही है । राजा
को आया देख अप्सरा अपने असली रूप मे आ जाती है और राजा धांधल से कहती है कि "हे राजन आपने
अपने वचन को तोङ दिया है इसलिये अब मै आपके इस लोक में नही रह सकती हूं । मेरे पुत्र पाबूजी
कि रक्षार्थ व सहयोग हेतु मै दुबारा एक घोडी(केशर कालमी) के रूप में जनम लूगीं । यह कह कर अप्सरा
रानी अंतर्ध्यान हो जाती है ।


समय पाकर पाबूजी महाराज बड़े हो जाते है । गुरू समरथ भारती जी द्वारा उन्हें शस्त्रों की दीक्षा दी जाती
है । धांधल जी के निधन के बाद नियमानुसार राजकाज उनके बड़े भाई बुङा जी द्वारा किया जाता है । इसी
बात को विडीयो मे भी दिखाया है ।



क्या कभी ऊंट के पांच पैर थे ? जवाब जानने के लिये आपको इस
कथा कि अगली कडी का इन्तजार करना पड़ेगा शेष
कथा अगले भाग में :-

9 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

नरेश जी राजस्थान के लोक देवता पाबू जी के बारे बचपन में फड सुनते थे जोगी लोग सारंगी बजाकर पाबू जी के बारे गा कर सुनते थे जिसे फड बांचना कहते थे वे एक चित्रों वाला परदा भी लगाते थे ! लेकिन समय बीतने के बाद पाबू जी के बारे में ज्यादा कुछ याद नही रहा ! अब आप इस वीर लोकदेवता के बारे जानकारी देकर बहुत अच्छा कर रहे ! जोधपुर के मंडोर गार्डन में एक जगह पहाड़ी काट कर राजस्थान के सभी लोक देवताओं की प्रतिमा बनाई हुई है जिसे देवताओ की साळ कहते है वहां पाबूजी की भी प्रतिमा लगी है अगली जोधपुर यात्रा पर इन प्रतिमाओ का चित्र लाऊँगा |

एक बात और हमारे समाज में शादी में सात की जगह चार फेरे ही होते है और इस बात का सम्बन्ध भी शायद पाबूजी की शहादत से ही जुड़ा हुआ है आप तो राजस्थान में ही रहते है गांव के बड़े बुजुर्गों से इस सम्बन्ध में जरुर चर्चा करना !

ताऊ रामपुरिया said...

बडी ज्ञानवर्धक जानकारी मिलि इस पोस्त से तो. बहुत आभार आपका.

रामराम.

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर क्था के बारे आज पता चला, धन्यवाद

विनीता यशस्वी said...

achhi jankari.

नटवर सिंह राठौड़ said...

पाबूजी के बारे इतनी बढ़िया और सटीक जानकारी मिली कि कुछ कह नही सकते ! बहुत बहुत धन्यबाद

JHAROKHA said...

Respected Naresh ji,
Sabse pahle to mere blog ka sadasya banane ke liye dhanyavad sveekaren.
Ap ke dvara rajasthan kee lok kathaon ko logon tak pahunchane ka yah prayas sarahneeya hai.badhai.

ONKAR RATHORE said...

respected Naresh ji, thanks jankari dene ke liye..aage jidi likhna..Onkar singh rathore[dhandal

ONKAR RATHORE said...

THANKS ...AAGE JLDI LIKHNA

ONKAR RATHORE said...

THANKS