Jan 9, 2011

----:क्षत्राणी:----

कुँवरानी निशा कँवर नरुका


मै दुर्गा की जयेष्ट-पुत्री,क्षात्र-धर्म की शान रखाने आई हूँ !
मै सीता का प्रतिरूप ,सूर्य वंश की लाज रखाने आई हूँ!1!

मै कुंती की अंश लिए ,चन्द्र-वंश को धर्म सिखाने आई हूँ !
मै सावित्री का सतीत्त्व लिए, यमराज को भटकाने आई हूँ !२!


मै विदुला का मात्रत्व लिए, तुम्हे रण-क्षेत्र में भिजवाने आई हूँ !
मै पदमनी बन आज,फिर से ,जौहर की आग भड़काने आई हूँ !३!

मै द्रौपदी का तेज़ लिए , अधर्म का नाश कराने आई हूँ !
मै गांधारी बन कर ,तुम्हे सच्चाई का ज्ञान कराने आई हूँ !४!


मै कैकयी का सर्थीत्त्व लिए ,तुम्हे असुर-विजय कराने आई हूँ !
मै उर्मिला बन ,तुम्हे तम्हारे क्षत्रित्त्व का संचय कराने आई !५!

मै शतरूपा बन ,तुम्हे सामने खडी , प्रलय से लड़वाने आई हूँ!
मै सीता बन कर ,फिर से कलयुगी रावणों को मरवाने आई हूँ!६!


मै कौशल्या बन आज ,राम को धरती पर पैदा करने आई हूँ !
मै देवकी बन आज ,कृष्ण को धरती पर पैदा करने आई हूँ !७!

मै वह क्षत्राणी हूँ जो, महा काळ को नाच नचाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ जो ,तुम्हे तुम्हारे कर्तव्य बताने आई हूँ !८!


मै मदालसा का मात्रत्त्व लिए, माता की माहिमा,दिखलाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ जो ,तुम्हे फिर से स्वधर्म बतलाने आई हूँ !९!

हाँ तुम जिस पीड़ा को भूल चुके, मै उसे फिर उकसाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ ,जो तुम्हे फिर से क्षात्र-धर्म सिखलाने आई हूँ !१०!



"जय क्षात्र-धर्म "

कुँवरानी निशा कँवर नरुका
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति

6 comments:

मेरे हमसफ़र said...

वाकई में क्षात्रधर्म से ओतप्रोत ...लिखा है हुकम ..इक क्षत्राणी के ह्रदय में उठे तूफ़ान को मेरा शत : शत : नमन !!!!!!!!!! जय क्षात्रधर्म ::

प्रवीण पाण्डेय said...

नारीत्व की वीरता को नमन।

राज भाटिय़ा said...

नारी की वीरता को दर्शाती आप की यह अति सुंदर रचना, धन्यवाद

Rewat said...

Khama Ghani Hukum

Your's Noble thought really deserve to appriciation. Would like to suggest send it to "Sang Shakti" A 8 Tara Nagar Jhotwara Jaipur. where might be publish in newspaper and reach to every nook and corner of rajasthan and Gujrat MP UP. dELHI etc.

Rewat said...

I am happy and appriciate your nobel thoughts.I am fully assured if every and each socity's Women come forward like this than we are not far from that aspicious day when we will be on top and peoples will come to us.

Anonymous said...

bahut sarahniya hukum