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Apr 10, 2009

बलि पथ के सुंदर प्राण

बलि पथ के सुंदर प्राण | बलि होना धर्म तुम्हारा, जीवन हित क्यों पय पान || आज खडा तू मंदिर आगे, देव पुरुष के है भाग्य जागे | टूट रहे ह...

Apr 5, 2009

आराम कहाँ

आराम कहाँ अब जीवन में अरमान अधूरे रह जाते | दिल की धड़कन शेष रहे हाथों के तोते उड़ जाते || तिल-तिल कर तन की त्याग तपस्या का अमृत संचय करते | ...

Nov 16, 2008

भारत का मान बिन्दु

भारत का मान बिन्दु ,तिरंगा यह झंडा हमारा | मर के अमर हो जाना, पर ये झंडा ना झुकाना || लाखों चढ़े थे शमा पर किंतु बुझने न दी ये ज्योति | बलिदा...

Nov 5, 2008

हम भूल चुके है हाँ

हम भूल चुके है हाँ हम भूल चुके है जिस पीड़ा को उसको फ़िर उकसानी है | केसरिया झंडा सुना रहा है हमको अमर कहानी || ऋषि मुनियों की जन्म...

Oct 21, 2008

भगवान की गोद

पु.स्व.श्री तनसिंह जी की कलम से (बदलते द्रश्य) छविग्रह में जब में पहुँचा तब चित्र शुरू हो गया था देखने वालों की कमी नही थी किंतु उनमे भी अधि...

Oct 19, 2008

चुनौती

स्व. पु.श्री तन सिंह जी की कलम से भाग्य और पुरुषार्थ में विवाद उठ खड़ा हुवा उसने कहा में बड़ा दुसरे ने कहा में बड़ा | विवाद ने उग्र रूप धार...