Dec 1, 2012

विधवा-विवाह और क्षत्राणी

कुँवरानी निशा कँवर
आजकल कुछ लोग हीन भावना से इतने ग्रषित है कि दुसरे वर्ग या वर्ण के समाजों के पैमाने से क्षत्रिय समाज की परम्पराओं ,मान्यताओं ,कर्त्यव निष्ठां ,धर्म पालन,यहाँ तक की क्षात्र धर्म की आधार शिला एवं क्षात्र धर्म की जननी परिवार एवं वैवाहिक संस्था तक को आधुनिकता,नारी के सामान अधिकारों के नाम पर विधवा हित चिन्तक बनकर क्षत्राणी को भी अबला,निस्सहाय,आदि शब्द देकर उसे अन्य समाजो के पैमानों पर कशने का दु :साहस कर रहे है,,,,,,, वे तथाकथित हित चिन्तक मुझे कुछ सावों का जवाब देने का कष्ट करें ,

1)सर्व प्रथम मुझे बताये कि किसी विधवा क्षत्राणी के पूर्ण अधिकार जिसकी वह है अधिकारिणी है नये पतिदेव प्रदान करेंगे ????? यानि अपने मृत पति का श्राद्ध कर्म करने का अधिकार उसे मिलेगा ?????

2)क्या वह क्षत्राणी अपने पूर्व सास श्वसुर की सेवा करने के लिए स्वतन्त्र होगी ??????

3) पुनर्विवाह किस उम्र तक की क्षत्राणी को करना चाहिए ??????

4)किस विधवा को पुनर्विवाह करने की छूट होगी ,,,,,????????मतलब आर्थिक रूप से कमजोर या संतानहीन या 1 बच्चे की माँ ,2बच्चे की माँ या फिर वृद्धावस्था में जब बच्चे भी ठुकरा दे ?????
v 5)यदि विधवा का विवाह केवल इस आधार पर करने की वकालत की जारही हो कि "सारी जवानी कैसे कटेगी ?" तो उनके बारे में क्या व्यवस्था की जारही जो जीवित रह कर भी सूर्यास्त होते ही मदिरा की गोद में चले जाते है उनकी पत्नियों को भी यह आजादी मिलेगी ????? या फिर वर्ष के 10 माह राष्ट्र की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात है क्या उनकी पत्नियों को भी अस्थायी विवाह करने यह आजादी मिलेगी ?????

6)अन्य समाजो के पैमाने लिए फिरने वालो ने इस बात पर गौर किया या नहीं कि विवाह के प्रारम्भ सभी को सामंजस्य में थोडा समय लगता है ,अतः जब अन्य समाजों में आये दिन पति को पत्निठुकरा रही है तब पुनर्विवाह चलन में होने पर यह बुराई हमारे समाज में भी एक भयावह रूप क्यों नहीं लेगी ??????

7)विधवा को एक देवी और तपस्विनी की तरह सम्मान मिलने की स्थिति में पुनर्विवाह से अधिक सक्षम और समर्थ क्षत्राणी(राजमाता कुन्ती ) क्यों स्वीकार नहीं है आपको ??????

कुछ लोग फरमा रहे है कि हमने हर तर्क के लिए नोट बना रखे है ,आलेख लिख रखे है,,,,,,,,,,,,,,,उनके लिए रही बात नोटया आलेखों की, तो बना हुकुम,एक ही चीज को बार बार लिखने के बजाये ,,,,उसे लिख कर रख लिया जाये तो क्या ,,,,,,,,,,बुराई है ,,,,,,एक पत्निवृतियो से भी क्षत्रिय समाज भरा पड़ा ,,,,महाराज हरिचन्द्र जी स्वयं सर्वश्रेष्ट क्षत्रिय श्री राम ,राजर्षि मधुसुधन दास जी महाराज जैसे आज भी हजारो क्षत्रिय है ,,,,,,,,यहाँ फेस बुक के बजाये कोई शंका या वाद्विवाद है आमने सामने बैठकर होसकता है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मै क्षत्राणी और सिर्फ क्षत्राणी की ही बात ज्यादा कर सकती हूँ ,,,,,मै ऐसे किसी तर्क से सहमत नहीं जो क्षत्राणी को अबला,बेचारी,निस्सहाय ,या अकेले सतीत्व की रक्षा करने में असमर्थ सिद्ध करने का प्रयास करे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,यदि कोई यह कहता या सोचता हो कि केवल पति के कारण क्षत्राणी अपने सतीत्व की रक्षा कर सकती है तो यह उसका बहम है इसे वह आज और अभी अपने जेहन निकाल दे,क्योंकि संसार का कोई व्यक्ति युधिष्ठर ,भीम,अर्जुन,नकुल और सहदेव की सयुंक्त शक्ति से अधिक शक्तिशाली नहीं होसकता ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,फिरभी द्रौपदी की लाज बचाने में सफल नहीं होपाये ,द्रौपदी के सतीत्व की रक्षा उसके स्वयं के तेज़ ने की ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,श्री राम से बड़ा कोई योद्धा नहीं किन्तु फिरभी माता सीता के ऊपर रावण ने कुदृष्टि की ,,,,,,,,,,,,और माता सीता के तेज़ से ही उनके सतीत्व की रक्षा हुयी ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,रही बात आजके युग की सोनिया गाँधी के पीहर और ससुराल दोनों कुलों में विधवा विवाह पर कोई रोकटोक नहीं फिर वह क्या इस बात का उदाहरन पर्याप्त नहीं कि नारी यदि सक्षम है तो उसे विधवा विवाह की कोई जरुरत नहीं

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्या क्षत्राणी इस सोनिया के बराबर भी सक्षम नहीं बन सकती ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,फिर धिक्कार है ऐसे क्षत्रित्व पर ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आज आवश्यकता है राजपूत कन्याओ को सक्षम,समर्थ बनाया जाये उन्हें इतना समर्थ और सक्षम बना दिया जाये की स्वयं धर्म् न्याय और समाज उसकी ओर ताके ,न कि क्षत्राणी किसी आसरे की खोज करती फिरे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,क्षत्राणी कोई गाय नहीं है कि उसे खूंटा उखड जाने पर दुसरे ,तीसरे पर बाँधते फिरे ,,,,,,,,,,,जिनमे क्षत्रित्व नहीं वे पति के मरने का भी क्यों इंतजार करे,,,,,,,,,नहीं पसंद आरहा तो क्या जरुरत है सामंजस्य की ,,,,,,,,,,,,,,,,,,उसके जीते जी करो दूसरा ,तीसरा ,,,,हम सिर्फ और सिर्फ क्षात्र धर्म पालकों की बात कर रहें ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,जो सामाजिक,धार्मिक वर्जनाओ को नहीं मानना चाहते ,,,,उन्हें कोई नहीं रोक रहा ,,,,,,,,,,,,,,
"जय क्षात्र धर्म "
कुँवरानी निशा कँवर
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति

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