Aug 29, 2010

राज्य एवं शक्ति

राज्य का उद्देश्य होता है व्यवस्था को बनाये रखना |न्याय ,धर्म,सत्य एवं पुण्यात्मक समाज की व्यवस्था को बनाये रखना |अनादि काल से भारतीय मनीषियों द्वारा शोध करने के बाद यह उद्दघोषणा की गयी की इस सृष्टि में पाप का पुण्य से ,अधर्म का धर्म से ,अन्याय के न्याय से,असत्य का सत्य से एवं बिषरूपी समाज का अमृतरूपी समाज से झगडा है,एवं दोनों ही के अस्तीत्व को नकारना सच्चाई से मुंह मोड़ना होगा |क्योंकि असत्य के बगेर सत्य को,अधर्म के बगेर धर्म को,अन्याय के बगेर न्याय को,परिभाषित ही नहीं किया जासकता है |और न हीं इन अच्छाइयो का कोई महत्व ही रह जायेगा |अत: दोनों अस्तीत्व एक दुसरे के लिए अत्यावश्यक है |और दोनों में द्वंद्द होना भी स्वभाविक है |अर्थात यह सृष्टि द्वंदात्मक है |अच्छाई को बुरे,न्याय को अन्याय ,सत्य को असत्य ,धर्मं को अधर्म एवं अमृतरूपी समाज को बिष रूपी समाज हमेशा दबाने की कोशिश करते रहते है |अत:सत्य,न्याय,धर्म,अच्छाई,एवं बिष रूपी समाज पर अमृतरूपी समाज की विजय सुनिशिचित करने के लिए एवं व्यवस्था को बनाये रखने के लिए ,परमपिता-परमेश्वर ने एक शक्ति की उत्पत्ति अपने ह्रदय से की |और उसे यह जिम्मेदारी सौंपी की अमृत रूपी समाज (अच्छाई युक्त समाज) की बिष रूपी समाज(बुराईमें रत समाज)से रक्षा करना |इस सृष्टि को क्षय से त्राण कराने की,अर्थात इस सुन्दर सृष्टि को विनाश से बचाने की |और उस शक्ति का नाम है क्षत्रिय ,अत:क्षत्रियों का यह कर्तव्य है कि वह इस सृष्टि(संसार) को विनाश से बचाए|
अब यही जिम्मेदारी राज्य की भी हैकि वह संसार या समाज को विनाश से बचाए |इसीलिए आजकल यह सुनने में अरहा हैकि अब क्षत्रित समाज एवं क्षत्रित्व की कोई आवयश्कता नहीं रही,और आदमी की पूंछ की तरह यह अनुपयोगी है |क्योंकि तर्क है की समाज,धर्म,राष्ट,एवं न्याय की रक्षा का दायित्व राज्य भली भांति वहां कर रहा है |मई यहाँ पर पाठको का ध्यान थोडा इस बात पर केन्द्रित करना चाहता हूँ कि वर्तमान में समाज कितना व्यवस्थित वह निम्न उदहारण द्वारा अच्चितारह समझा जा सकेगा |बिहार के एक IAS अधिकारी जिसका नाम कुछ विश्वास करके था|करीब 9 -10 वर्ष पूर्व देल्ही भाग कर आया और उसने अपनी नौकरी छोड़ते हुए बताया कि उसकी पत्नी का पिछले एक वर्ष से स्वयं उस ही के सरकारी बंगले में उस ही के सामने कुछ तथाकथित राजनैतिक गुंडे बलात्कार करते रहे है|वह अपने साथ हुए इस भीषण अत्याचार का कारण स्वयं का दलित IAS होना बता रहा था |उसकी इस दलील के बाद सभी राजनैतिक दल एवं मिडिया जगत ने उसके साथ-साथ खूब आंसू बहाए \अब बताइए कि क्या भारतीय संविधान में दलित IAS अधिकारी को सामान्य वर्ग के IAS अधिकारी से कम शक्तियाँ प्रदान कि गयी है ?मई जानना चाहता हूँ कि इतने निकृष्ट व्यक्ति का चयन IAS में कैसे होगया ?क्या चयन में उसका किताबी ज्ञान एवं आरक्षण के लिए जाति हिआधर मन गया था,और यदि हाँ तो यह बहुत ही शोचनीय स्थिति है | और सहानुभूति इस कायर के बजाय उन चार-पांच जनपदों कि जनता के साथ दर्शाओ जिनका जिला-कलेक्टर यह कायर(न:पुंसक)रह चुका था |उपरोक्त उदहारण का प्रतिपाद्द है कि केवल शक्तिशाली पद पर बैठ जाने मात्र से कोई शक्ति का सदुपयोग नहीं कर सकता है जबतक कि उस व्यक्ति के स्वभाव में कोई गुण एवं क्षमता ना हो |जब राज्य में नौकरशाही का चयन ही इतना घटिया है तो व्यवस्था क्या खाक बनाये रखेगा |क्योंकि विश्वास जैसे प्रशासक ना जाने कितने ही भरे पड़े है|राज्य में शक्ति तो असीमित है पर उनमे प्रयोग करने वालो में ना क्षमता है और ना ही दृढ़ इच्छा शक्ति ही है |
एक बार एक राजा था जिसने अपना राज्य में अनेको कल्याण कार्य जैसे कुंए,नाहर,सड़क,परिवहन एवं विद्धालयो का निर्माण किया था |उसने सोचा कि मेरी शासन व्यवस्था का आकलन करवाना चाहिए ,इसके लिए उसने अपने एक वृद्द प्रजाजन को बुलवाया और उससे पूंछा कि आपने मेरे पितामह से लेकर मुझ तक सभी कि शासन व्यवस्था देखी है| अत:आप बताइए कि किसका राज्य सबसे श्रेष्ट था ?वह वृद्ध बोला कि "महाराज मै अपने जीवन में घटित एक वाकया आपको सुनना चाहता हूँ जिससे शायद आपको कोई कुछ संकेत मिल जायेगा |जब आप के पितामह का राज्य था ,उन दिनों मै युवा अवस्था में था|एक शाम कि संधि बेला में गाँव से कुछ दूर जंगल में मुझे हाँफती हुई एक सुन्दर युवति मिली, जो कि स्वर्ण आभुषनो से लदी हुई थी ,उसने बताया कि कुछ डाकू उसके पीछे लगे हुए है| मने डाकुओ से उसे बचा लिया तथा उसे अपनी बहिन मन कर अपने घर में रात्रि में रखा|प्रात-काल उसे उसके पति के पास छोड़ कर आगया |उसके पति ने मुझे स्वर्ण आभूषण देना चाहे तो मैंने उसे अपनी बहिन मानने कि बात बताकर यथा संभव उपहार देकर आगया | .
उस घटना के १५ वर्ष बाद आपके पिता महाराज का राज्य-अभिषेक हुआ थ |कुछ ही दिनों बाद मुझे अहसास होने लगा की मैंने घर आये धन को यों ही लौटा दिया |युवति को बहिन बना कर रखना तो ठीक था किन्तु उसके स्वर्ण-आभूषण लौटने की क्या आवश्यकता थी |और महाराज अब मै आपके राज्य में हूँ और मुझे लगता है की मैंने इतनी सुन्दर स्त्री को अपनी मुर्खता से यों ही जाने दिया वरन उसे भी भोगता और उन स्वर्ण-आभूषण को भी रख लेता तो इस बुढ़ापे में दोनों कम आते |यह सुन कर रजा का भ्रम दूर हो गया और वह जन गया की उसके राज्य में स्त्री एवं धन दोनों असुरक्षित है |और आजकल हमे रोज अखबारों में पड़ने को मिल जाता है कि कुछ नर-पिशाच अपनी सगी बेटियों तक से बलात्कार कर रहे है |तो इस राज्य में शक्ति कहाँ रही ?अर्थात क्षात्र-धर्म,क्षत्रिय समाज एवं क्षत्रित्वता कि आज जितनी आवश्यकता तो पहले कभी नहीं रही |और अब यह मान लेना चाहिए कियाः समाज,यह राष्ट्र,विनाश के गहरा गर्त में तेजी से जा रहा है |लेकिन यह सब हम क्षत्रियों के जीवित रहते हो रहा है तो लानत है हमारे क्षत्रित्व पर ,और लानत हमारे जीवन पर !क्या आज हम हमारे क्षात्र-धर्म का पालन करने में सक्षम है ?शायद नहीं ,क्योंकि क्षात्र-धर्म पालन के लिए राज्य(दंड) हमारे(क्षत्रिय) अनुकूल होना चाहिए|जबकि राज्य(दंड) इस समय किन्ही कमजोर,बेबश,मनचले,स्वार्थी ,एवं दिग्भ्रमित हाथो में है ,जो कदाचित सड़क,पानी,बिजली,स्कूल,परिवहन,आरक्षण एवं संचार की व्यवस्था तोजैसे तैसे ,जोड़-तोड़ बिठा-कर या झूंटे-सच्चे आंकड़े एकत्रित करके करके दिखा भी देंगे |किन्तु राज्य का अत्यावश्यक कार्य न्याय ,शांति,एवं धन और इज्जत की सुरक्षा को बनाये रखने में पूर्णतःअक्षम सिद्ध हुए है |हमारे धर्म पालन में बाधक है वर्तमान राज्य ,क्षत्रिय ही ब्राहमण सहित समाज के सभी वर्णों के भी धर्म पालन में यह राज्य-व्यवस्था बाधक है |इसीलिए योगीराज अरविन्द ने तो यहाँ तक कहा है की "जिस देश का रजा क्षत्रिय नहीं हो उस देश में ब्राहमण को निवश ही नहीं करना चाहिए |अतः धर्म-पालन राज्य क्षत्रिय धर्मानुकूल हो|अतः राज्य में शक्ति लानी हो या क्षत्रिय को अपना धर्म-पालन करना दोनों का हल केवल और केवल मात्र एक ही है की "क्षत्रिय दंड(राज्य)को धारण करे |यही आज सभी का धर्म एवं कर्म है की क्षात्र तेज़ को जाग्रत किया जाये ताकि इस बिलखती हुई मानवता को सत्य,न्याय,धर्म एवं शांति-पूर्ण जीवन जीने का नैसर्गिक अधिकार मिल सके |
"कुँवरानी निशा कँवर नरुका"
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति


एक वीर जिसने दो बार वीर-गति प्राप्त की |
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Aug 27, 2010

उस राज कन्या ने मेवाड़ का भाग्य बदल दिया

चित्र गूगल से साभार 
 तुर्क हमलावर अलाउद्दीन खिलजी ने जैसे तैसे चितौड़ जीत कर अपने चाटुकार मालदेव को मेवाड़ का सूबेदार बना दिया था | युध्ध में रावल रतन सिंह सहित चितौड़ के वीरो ने केसरिया बाना पहन कर आत्माहुति  दी | खिलजी की मौत के बाद मुहम्मद तुगलक दिल्ली का सुलतान बना तो मालदेव ने उसकी अधीनता स्वीकार कर ली | सीसोदा की जागीर को छोड़कर लगभग सारा मेवाड़ तुर्कों के कब्जे में था और सिसोदा के राणा हम्मीर सिंह को इसी का दुःख था |

बापा रावल की सैंतीस्वी पीढी के रावल करण सिंह ने जब अपने बड़े बेटे क्षेम सिंह को मेवाड़ की बागडोर सौंपी तो छोटे बेटे राहप को राणा की पदवी दे सिसोदा की बड़ी जागीर दे दी | केलवाडा इस ठीकाने की राजधानी था | रावल क्षेम सिंह के वंश में आगे चल कर रावल रतन सिंह हुए | राणा राह्प के वंशज अरि सिंह इनके समकालीन थे और खिलजी से युध करते हुए राणा अरि सिंह ने भी रावल रतन सिंह के साथ वीरगति पायी | उन्ही का युवा पुत्र हम्मीर इस समय केलवाडा में मेवाड़ को विदेशी दासता से मुक्त करने  की योजना बना रहा था |

पहले तो हम्मीर ने मालदेव का स्वाभिमान जगाने की कोशिश  की ,पर जिसके खून में ही गुलामी आ गयी हो वह दासता में ही अपना गौरव समझता है | इस लिए उसने उलटे हम्मीर को ही तुर्कों की शरण में आने को क़हा | हमीर ने मालदेव और तुर्कों पर छापेमार कर हमले करने शुरू कर दिए | मालदेव ने इस से बचने के लिए चाल सोची  और हम्मीर को अपनी लड़की की शादी के प्रस्ताव का नारियल भिजवाया |
हम्मीर ने काफी सोचविचार के बाद उस विवाह प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया | और तय समय पर अपने गुप्तचरों और सैनिको के साथ  चितौड़ दुर्ग पहुँच गए | वंहा जाकर दुर्ग का निरिक्षण किया | विवाह के बाद उनका साक्षात्कार राजकुमारी सोनगिरी से हुआ  तो राजकुमारी ने हाथ जोड़ कर निवेदन किया " महाराज मै आपके शत्रु की कन्या हूँ इसलिए मै आपके योग्य नहीं हूँ मेरे पिता तुर्कों  के साथ है लेकिन मै आपका साथ देकर  मातृभूमि के लिए संघर्ष करूंगी | "
हम्मीर उसकी देशभक्ती से प्रभावित हुए वे बोले " देवी अब आप सिसोदा की रानी है | अब आपका लक्ष्य भी हमारा लक्ष्य है | हम मिल कर मेवाड़ की स्वतन्त्रता की लड़ाई लड़ेंगे |"

सोनगिरी ने क़हा महाराज अप देहेज में दीवान मौजा राम मोहता को मांग लीजिये वे बहुत नीतिग्य और देश भक्त है |
मालदेव ने सोचा की मोहता अपने लिए गुप्तचरी करेंगे यह समझ कर उनहोने सहर्ष हम्मीर की बात मान दीवान मोहता को उनके साथ कर दिया | हमीर की विदाई रानी और मोहता के साथ कर दी गयी | दुर्ग के कपाट बंद कर किलेदार को आदेश दिया गया की आज से हम्मीर या उनका कोइ सैनिक  इस किले में ना आ पाये |
थोड़ी दूर जाने पर दीवान मोहता ने हम्मीर से क़हा की महाराज मालदेव आपको असावधान  करके केलवाड पर हमला  करने की फिराक में है | लेकीन  अभी  तुगलक ने उसे सेना सहित सिंगरौली बुलाया है | वह कूच करने वाला है | इस लिए चितौड़ विजय का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा |

मोहता  की बात सुन कर हम्मीर ने पास के ही जंगल में डेरा डाल दिया  और मालदेव के सिंगरौली जाने का इन्तजार करने लगे | जैसे हे उन्हें  अपने गुप्तचरों के द्वारा  मालदेव के बाह जाने का सन्देश मिला अपने सैनिको को इकठ्ठा करके वापस किले की तरफ रवाना हो गए | राणा हम्मीर भी स्त्री वेष में हो लिए और मोहता मोजा राम को आगे कर दिया | खुद पालकी में बैठ गए | रात्री का समय हो गया था किले के दरवाजे पर जाकर आवाज लगाई "द्वारा खोलो मै दीवान मोजा राम मोहता हूँ , राजकुमारी पीहर आयी है | किले दार ने झांक कर देखा तो उन्हें मोजा राम पालकी के साथ दिखाई दिए तो उन्हें कोइ ख़तरा ना जान और मोजा राम तो अपने आदमी है तथा आदेश केवल राणा  हम्मीर के लिए ही था सो किले दार ने ज्यादा बिचार किये बिना द्वार खोल दिए | अन्दर घुसते ही राणा हम्मीर और सैनिको ने द्वार रक्षक सैनिको  का काम तमाम कर दिया | अगले द्वार पर भी यही प्रक्रिया दोहराई गयी | किले में मालदेव के थोड़े से ही सैनिक थे इस लिए बात ही बात में किले पर राणा हमीर का कब्जा हो  गया | सुबह की पहली किरन के साथ ही केसरिया ध्वज लहरा दिया गया |

माल देव को पता लगा तो वह उलटे पैर चितौड़ की ओर दोड़ा पर हम्मीर ने उसे रास्ते में ही दबोच लिया | उसके सैनिक भी हम्मीर के साथ हो लिए | अब बिना समय गवाए हम्मीर ने सिंगरौली में बैठे तुगलक पर हमला बोल दिया उसके सैनिक भाग गए और तुगलक पकड़ा गया | तीन महीने तक कारागृह में रहने के बाद मेवाड़ के साथ साथ अजमेर व नागौर के इलाके पचास लाख  रूपये  और सो हाथी देकर अपने प्राण बचाए |

राणा हम्मीर अब पूरे मेवाड़ के महाराणा हो गए | यहीं से मेवाड़ के शिशोदिया वंश का काल खंड शुरू हुआ | राष्ट्र भक्त क्षत्राणी महारानी सोनगिरी ने राष्ट्र - हित में अपने पिता को त्याग कर मेवाड़ को पुन भारत का मुकुट बना दिया |    

(पाथेय कण अंक जून २०१० से साभार )


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राणा प्रताप के प्रन की जेय....

धन्य हुआ रे राजस्थान,जो जन्म लिया यहां प्रताप ने।

विलक्षण व्यक्तित्व के धनी महाराणा प्रताप
राजस्थानी भाषा में कुछ शब्द वाक्य जिन्हें बोलना त्याज्य है

Aug 23, 2010

द्वितीय क्षत्रिय मंथन शिबिर का आयोजन...!

सम्मानीय क्षत्रिय बंधु

जय संघ शक्ति
मुझे “श्री क्षत्रिय वीर ज्योति” के संस्थापक राज ऋषि मधुसूदन दास जी महाराज द्वारा आप जैसे चुनिंदा क्षत्रिय सरदारो के साथ संपर्क करने हेतु निर्देशित किया गया है!
आप एवं आप की संस्था जो समाज जागरण पुनीत प्रयास मे संलग्न है, साधु वाद के पात्र है !
आज की इस विषाक्त ....क्षीण एवं चहूं ओर से पतन पर पहुँची दयनीय व्यवस्था के लिए निश्चित रुप से पतन की पराकाष्ठा को पार कर चुका भ्रष्ट  नेतृत्व ही उत्तरदायी है !
यह आप सभी से छिपा हुआ नहीं है !
वर्तमान परिवेश मे जहाँ मानवीय मूल्यों के साथ आमजन का जीवन दु:भर हो गया है !
इस अराजक बेलगाम, झूठ से परिपूर्ण, दुश्चरित्र शक्तियों के व्यवस्था संचालन के अनैतिक, दिशाहीन, कुकृत्यों ने संपूर्ण मानव जाति को विनाश के गहरे गर्त में गोते लगाने के लिए छोड़ दिया है!
आज की इस विभत्स परिस्तिथि को यदि तुरंत रोकने का प्रयास नहीं किया गया तो वर्तमान क्षत्रिय शक्तियों का पूर्णत: लोप होने के कड़ुवे सत्य को स्वीकार करने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं बचेगा!
और हम प्रकृति एवं मानवता पर गहराए इन काले ख़तरे के बादलों को मूकदर्शक बन कर देखते हैं तो हमारे इस क्षत्रिय धर्म के विरुद्ध आचरण को निश्चय ही क्षत्रिय इतिहास में काले अक्षरों में लिखा जाएगा!
समाजवेता एवं भारतीय मनीषीयों को यह एकमत से स्वीकार्य है की यदि कभी भी और कहीं पर भी मानवता एवं सृष्टि के अस्तित्व ख़तरे में हो तो इसका अर्थ है की उस काल एवं स्थान विशेष क्षत्रित्व सुषुप्त अवस्था हो चुका है !
अत: आज क्षात्र तत्व की सुषुप्तता को चैतन्य करने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं हो सकता !
इन विषम हालातों के परिमार्जन का केवल और केवल एक ही उपाय है और वह है “क्षात्र धर्म का पुन: उत्थान” ...!
क्षात्र तत्व को चेतन्य करके चहुँ ओर हो रहे क्षय (विनाश) का त्राण करना यह ना केवल वर्तमान क्षत्रिय शक्तियों का दायित्व ही है बल्कि अपने पूर्वजों के यश को सुरक्षित रखने एवं आगामी पीढ़ियों के समक्ष क्षत्रिय आदर्शों को धुंधला न पड़ने देने का एकमात्र रास्ता है !
पवित्र ग्रंथ श्री गीता में भी साक्षात ईश्वर श्री कृष्ण द्वारा द्वितीय अध्याय के श्लोक 31 से 33 में “संघर्ष के पलायन को आतुर तत्कालीन क्षत्रित्व के प्रतीक अर्जुन को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया है की ” निश्चित रूप से धर्म युक्त संग्राम से बढ़कर दूसरा कोई कार्य क्षत्रिय के लिए नहीं है
अपने आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार स्वरूप इस प्रकार के धर्म संग्राम को भाग्यशाली क्षत्रिय ही प्राप्त करते हैं जिसमें विजय होने पर महामहिम (इस लोक का राज्य) और हारने पर देवत्व (स्वर्ग) प्राप्त होता है
!”
अत: ईश्वर के अति निकट दिव्य शक्तियों से विभूषीत राज ऋषि मधुसूदन दास जी महाराज, जो की श्री क्षत्रिय वीर ज्योति के संस्थापक होने के साथ ही सुविख्यात निर्वाणी अखाड़े के ख़ालसा के श्री महंत भी हैं, को सूक्ष्म ईश्वरीय चेतना द्वारा यह दिव्य निर्देश पाप्त हुआ है की - संपूर्ण आर्यवृत में बिखरी हुई व दिशाहीन क्षत्रिय शक्तियों को खोए हुए गौरव को पुन: स्थापित करने के लिए सार्थक एवं परिणाम मूलक एक लक्ष्य के सूत्र में पिरो कर धर्ममय समाज का शंखनाद करें!
इन्हीं सब विषयों पर गहन चिंतन हेतु एक पाँच दिवसीय मंथन शिविर का आयोजन - राज ऋषि की तपो भूमि, प्रकृति के सुरम्य वातावरण वर्तमान परिवेश से बिल्कुल दूर तीन नदियों के संगम तट जो की हाडोति एवं रण्थम्भोर (राजस्थान) के निकट है - में किया जाना सुनिश्चित हुआ है !
मंथन शिविर में आर्यवृत के कोने कोने में कार्यरत सभी क्षत्रिय संगठनों के 2-2 पूर्ण अधिकार संपन्न प्रतिनिधियों को भाग लेना है ताकि एक स्थायी “क्षत्रिय संसद” के निर्माण की प्रक्रिया भी पूरी हो सके!
हमारे विश्वस्तसूत्रों से जानकारी मिली है की आप एवं आपका संगठन भी क्षत्रिय जागृति प्रयास में उच्च कोटि की भूमिका निभा रहे हैं !
अत: हम सभी के इस पावन, ईश्वरीय प्रयास को साकार करने हेतु अपने संगठन के 2 पूर्णत: अधिकार संपन्न, सुविज्ञ प्रतिनिधि नियत समय एवं स्थान भेजकर इस धर्ममय मंथन शिविर को संपन्न करवाने में अपनी महत्ती भूमिका निभायें ...!  जय क्षात्र धर्मं...!
विशेष सूचना: इस मंथन शिबिर में देश के कोने --कोने में कार्यरत कोई भी कार्यकर्ता या किसी भी क्षत्रिय संघटन के सदस्य हिस्सा ले सकते है!
सादर
प्रचार प्रमुख
श्री क्षत्रिय वीर ज्योति मिशन
मोबाइल : 09868004695, 09213365865
 
शिविर स्थल

राज ऋषि का आश्रम, राजधानी की छतरी, हाडोति, जिला - करौली (राजस्थान)

कोटा - नई दिल्ली रेलवे खंड पर, गंगापुर सिटी से सवाई माधोपुर के बीच मालरना रेलवे स्टेशन पर जीप उपलब्ध रहेगी
वहाँ से 15 किलो मीटर जंगल में आश्रम है
शिविर तिथि
08-11-2010 --15-11-2010 के मध्य कोई 02 दिवस अभी निश्चित होनी है


सामान्य अनुदेश

शिविर में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को अपने आगमन की सूचना एवं अपना मोबाइल नंबर प्रधान कार्यालय को शीघ्रातिशीघ्र देने होंगे !
किंतु 10-10-2010से पूर्व

*शिविर में आते समय अपने साथ 2 धोती 1 जनेऊ तथा 1 साफ़ा (पगड़ी) लेकर आएँगे तो सुविधा रहेगी !
*कृपया नियत तिथि से 1 दिन पूर्व में पहुँचने का प्रयास करें!

*हमारे कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क तुरंत बनाएँ ---


संपर्क सूत्र

राज ऋषि जी(हाडोती)- 09982771573
कुँवर राजेंद्र सिंह(गुरगाव) - 09957330847,09783400450
कुँवर भवानी सिंह (दिल्ली) - 09213365865
भंवर जयपालसिंह गिरासे(शिरपुर) -09422788740
कुँवर तेजवीर सिंह  जादौन -09414231797, 09968044887
डा  सिकरवार - 09981932302
श्री भरत सिंह चौहान - 09414814342
श्री मान सिंह राठौड़ - 09460609888
कुँवर संजीव सिंह (बिहार) - 09708409309
कर्नल D.R.S. सिकरवार(लखनौ) - 09415021582
कुँवरानी निशा कँवर (गुरगाव)- 09350038422

ई-मेल
rs.naruka@yahoo.co.in
singh@rajputworld.com  

Aug 16, 2010

कुंवर विक्रांतसिंह रावल के जन्मदिन पर हार्दिक बधाई...!

उत्तर महाराष्ट्र में स्थित दोंडाइचा के भूतपूर्व संस्थान के राजकुमार कुंवर विक्रांत जी १६ अगस्त के दिन २५ साल के हो जायेंगे! ऐतिहासिक राजघराने में जन्म लेकर....आधुनिक वातावरण में पल-बढ़ कर भी सामान्य जनता से प्रेम एवं आस्था रखने वाले कुंवर जी महाराष्ट्र के युवा दिलों... की धड़कन है! २४ साल की उम्र में ही "अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय राजपूत युवा संघ" के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर वे काम कर रहे है! साथ ही अपनी रावल संस्थान की विरासत का कारोबार भी सम्भाल रहे है! स्व.दादासाहेब जयसिंह रावल (भूतपूर्व विधायक) ने रावल परिवार का उद्योग जगत में प्रवेश कराया! स्टार्च फैक्ट्री ,रावल बैंक,दूध संघ, स्कूल, कोलेजेस आदि क्षेत्र के साथ रावल परिवार सामाजिक, राजनैतिक ,औद्योगिक क्षेत्र में भी अग्रणी रहा है ! रावल परिवार ने मध्ययुगीन काल में प्रजा का अच्छा पालन तो किया ही था लेकिन वर्तमान में भी हजारो लोग इसी परिवार की मदद से अपनी रोजी-रोटी कमा रहे है!
स्व.दादासाहेब रावल के कनिष्ठ सुपुत्र श्री ठा.बापूसाहेब जयदेव सिंहजी के कु.विक्रांत सिंह कनिष्ठ पुत्र है! आपके पिता भी महाराष्ट्र के युवा विधायक थे! उन्हीके नेतृत्व में चल रहा दूध संघ आज हजारो परिवार को स्वावलंबन का सहारा दे रहा है!
कु.विक्रांतसिंह एक शालीन...समझदार...ऊँचे विचार वाले...अछे संस्कार वाले युवा है! हर रोज जिम जा कर अपनी सेहत का ख्याल तो वे रखते ही है...साथ ही अपने फार्म हाउस पर जाकर अपने घोड़े...गाय....बकरिया आदि का भी ख्याल रखते है! ''फैला-बैला'' जात की घोड़ी जो सिर्फ अफगानिस्तान में ही पाई जाती है.....उसका कद सिर्फ दो या तिन फीट होता है...कुंवर जी के फार्म हाउस पर आप को नजर आएगी! उसी जात की पैदास उन्होंने शुरू कर दी! घोड़े तो कुंवरजी का खास शौक है! आपके फार्म पर कई जात के घोड़े और बकरिया पाई जाती है! पुराणी चीजों का भी आप खासा शौक रखते है! आप के अश्व-पालन केंद्र की वजह से आप को दुनिया भर में प्रसिद्धि मिली है !
कुंवर जी का एक महत्वपूर्ण गुणविशेष है की वे सामान्य वातावरण एवं सामान्य जनता के बिच ज्यादा रहते है...! जनता के सुख-दुःख में साथ रहते है! इसलिए नवजवानों में आकर्षण का वे केंद्र है! एक रईस परिवार में जन्म लेने के बावजूद......वे बेहद ही सीधे-साढ़े है! कोई भी उन्हें आसानी से मिल सकता है!
ऐसे हमारे आदर्श....हमारे प्रेरणास्रोत....हमारे परममित्र कुंवर विक्रांतसिंहजी के २५ वे जन्मदिन के शुभअवसर पर हार्दिक शुभकामनाये ........! आपका जीवन हमेशा प्रकाशमान रहे......भविष्य उज्वल रहे.......यश-कीर्ति-सेहत हमेशा साथ दे यही हम प्रभु एकलिंगजी से एवं कुलस्वामिनी बाण माता से प्रार्थना करते है! "अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय राजपूत युवा संघ" और "क्षत्रिय संसद" की ओर से भी हार्दिक बधाई..!

जयपालसिंह गिरासे ,शिरपुर

राजपूत वर्ल्ड परिवार की ओर से कुंवर विक्रांतसिंह रावल के जन्मदिन पर हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएँ




आज का ख्याल-4
जन्म कुंडली देखे बिना पता करे , सरकारी नौकरी का योग

Aug 8, 2010

क्षत्रिय एकता मंच फरीदाबाद : सभा का आयोजन

क्षत्रिय एकता मंच,सारण गांव फरीदाबाद द्वारा प्रेस क्लब में एक विशाल क्षत्रिय सभा का आयोजन किया गया| सभा को स्थानीय क्षत्रिय नेताओं के अलावा हरियाणा सरकार की संसदीय सचिव सुश्री शारदा राठौड़,पलवल कांग्रेस अध्यक्ष डा.हरेन्द्रपाल सिंह ,अखिल भारतीय क्षत्रिय समन्वय मोर्चा के अध्यक्ष ठाकुर अनूप सिंह,फरीदाबाद के महापौर श्री अशोक अरोड़ा व प्रेम नारायण शास्त्री जी ने संबोधित किया |सभा में फरीदाबाद शहर के सैकड़ों क्षत्रियों ने भाग लिया |
अपने संबोधन ने सुश्री राठौड़ ने क्षत्रियों से संगठित व सुशिक्षित होने का आव्हान किया | उन्होंने महाराणा प्रताप के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनसे प्रेरणा लेने को कहा | हरियाणा की संसदीय सचिव सुश्री राठौड़ ने शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि यदि हमें हमारा खोया गौरव पुन: प्राप्त करना है तो सबसे ज्यादा शिक्षा पर ध्यान दें अपने बच्चों को शिक्षित करें ताकि वे अपने जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने में कामयाब हों ,सुश्री राठौड़ ने सारण गांव में महाराणा प्रताप पुस्तकालय बनाने के लिए पूरा सहयोग करने व पुस्तकालय के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराने हेतु जितना जरुरत हो उतना धन देने की भी घोषणा की |
ज्ञात हो कि आज सुश्री राठौड़ द्वारा फरीदाबाद के सारण गांव चौक पर महाराणा प्रताप पुस्तकालय का उदघाटन करना तो जो कतिपय कारणों से टालना पड़ा |

सभा को संबोधित करते हुए शहर के प्रथम नागरिक व महापौर श्री अशोक अरोड़ा ने भी सामाजिक एकता पर बल दिया | उन्होंने अपने संबोधन में कहा -क्षत्रिय ही छतीस बिरादरी को साथ लेकर चलने में सक्षम थे और अब भी है इसलिए क्षत्रियों ने लम्बे समय तक देश पर शासन किया अपने भाषण में उन्होंने महाराणा प्रताप पुस्तकालय बनाने के लिए हर संभव सहायता का वादा किया तथा २० अगस्त को फरीदाबाद में स्व.राजीव गाँधी की मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में शहर के सभी क्षत्रियों को आने हेतु आमंत्रित किया |

सभा को संबोधित करते हुए युवा क्षत्रिय नेता व पलवल कांग्रेस अध्यक्ष डा.हरेंद्रपाल सिंह सामाजिक एकता पर बल दिया |

अपने ओजस्वी संबोधन में श्री प्रेम नारायण शास्त्री ने कहा - भारत के इतिहास से यदि राजपूत इतिहास निकाल दिया जाये तो कुछ नहीं बचेगा उन्होंने अपने संबोधन में इतिहास पढने पर बल देते हुए कहा कि वाही समाज जिन्दा रह सकता है जिसे अपने इतिहास के बारे में पता हो ,इतिहास हमें प्रेरणा देता है ,इतिहास हमें पूर्व में की गयी गलतियों का विश्लेषण करने का मौका देता है ,इतिहास ही हमें नैतिकता सिखाता है इसलिए सभी को इतिहास जरुर पढना चाहिए









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Aug 2, 2010

असिस्टेंट कमान्डेंट राज्यश्री राठौड़ :राजस्थान की पहली महिला पायलट

नागौर जिले के मकराना पंचायत समिति के इटावा गांव के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता,लेखक और जोगसंजोग.कॉम के मोडरेटर ठाकुर मगसिंह जी राठौड़ की २२ वर्षीय पुत्री राज्यश्री राठौड़ को राजस्थान की पहली महिला पायलट बनने का गौरव हासिल हुआ है | एक मध्यमवर्गीय परिवार से सम्बन्ध रखने व गच्छीपुरा जैसे छोटे गांव से शिक्षा की शुरुआत करने वाली राज्यश्री राठौड़ आजकल एजिमाला स्थित इंडियन नेवल एकेडमी में असिस्टेंट कमान्डेंट पायलट डिफेन्स का प्रशिक्षण ले रही है |
अमेरिका स्थित फ़्लाइंग स्कूल एयर-डी से फलाइंग का प्रशिक्षण लेने के बाद राज्यश्री ने देश की सेवा करने के जज्बे के चलते प्राइवेट एयरलाइन्स में ऊँची आमदनी वाली नौकरी करने के बजाय इंडियन कोस्ट गार्ड चुना |
अपनी मेहनत और लगन से अपने बचपन के सपनों की ऊँची हसरत पूरी कर कामयाबी की ऊँचाइयाँ छूने वाली राज्यश्री राठौड़ को हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाएँ | सुश्री राज्यश्री राठौड़ उन राजपूत लड़कियों की भी प्रेरणाश्रोत बनेगी जो अपनी जिन्दगी में कुछ खास करके ऊँचाइयाँ छूना चाहती है | राज्यश्री ने यह भी साबित कर दिखाया कि यदि प्रतिभा हो तो शिक्षा गांव में लें या शहर में कोई फर्क नहीं पड़ता |








ग्लोबल होता राजस्थानी साफा |
ब्लोगिंग के दुश्मन चार इनसे बचना मुश्किल यार